रायगढ़, 24 मार्च। कोल ब्लॉक्स के 11 वें दौर की नीलामी खत्म हो चुकी है। जिंदल पावर लिमिटेड ने एक और माइंस को अपने कब्जे में किया है। बनई-भालुमुंडा को जेपीएल ने सर्वाधिक बोली लगाकर हासिल किया है। इसके साथ ही जिंदल समूह के पास रायगढ़ जिले में छह कोल ब्लॉक हो गए हैं। कोयला मंत्रालय ने 11 वें दौर की नीलामी में 20 नई खदानों को रखा था। साथ ही दसवें राउंड से बची हुई सात माइंस भी थी। कमर्शियल माइनिंग को बढ़ाने के लिए कोल ब्लॉक्स की नीलामी की गई है। कोल इंडिया से कोयला आपूर्ति का दबाव कम करने के लिए ही प्राइवेट कंपनियों को कमर्शियल यूज के लिए आवंटन किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने दिसंबर में कोयला खदानों का 11 वां लॉट जारी किया था। इस खेप में कुल 20 कोल ब्लॉक्स को रखा गया था और रुचि रखने वाली कंपनियों से बोलियां मंगवाई थी।

इसमें छत्तीसगढ़ की चार, महाराष्ट्र की तीन, मप्र की चार, झारखंड की पांच, अरुणाचल प्रदेश की दो और ओडिशा की दो कोल ब्लॉक हैं। छग की विजय सेंट्रल, चैनपुर, बनई और भालुमुड़ा हैं। बनई और भालुमुड़ा तो रायगढ़ जिले की हैं। इसके अलावा सात ऐसे कोल ब्लॉक्स को भी शामिल किया गया है जो दसवें दौर में नीलाम नहीं हो सकी थी। इसमें छग की दो, मप्र की तीन और ओडिशा की दो माइंस हैं। छग की भटगांव 2 एक्सटेंशन (बोझा) और वेस्ट ऑफ बायसी को शामिल किया गया था।
बनई और भालुमुंडा कोल ब्लॉक के लिए पीसीआईएल पावर एंड होल्डिंग्स लिमिटेड, भारत एल्युमिनियम कंपनी लिमिटेड, दामोदर वैली कॉर्पोरेशन, जिंदल पावर लिमिटेड और रायगढ़ नेचुरल रिसोर्सेस लिमिटेड ने बोली लगाई थी। इलेक्ट्रॉनिक ऑक्शन में जिंदल पावर लिमिटेड ने 48 प्रश की सर्वाधिक बोली लगाकर इस कोल ब्लॉक को हासिल कर लिया। इसके अलावा ओडिशा की सरधापुर जलटाप ईस्ट कोल ब्लॉक को भी जिंदली स्टील एंड पावर लिमिटेड ने प्राप्त किया है।
कोरबा का विजय सेंट्रल रुंगटा सन्स को
कोरबा के विजय सेंट्रल कोल ब्लॉक के लिए छग की एक चर्चित कंपनी जय अंबे रोडलाइंस ने भी बिडिंग की है। लेकिन ऑक्शन में रुंगटा सन्स प्रालि ने सर्वाधिक बोली लगाकर इसे जीता है। कुल 12 कोल ब्लॉकों की नीलामी की गई। रायगढ़ में एक के बाद एक कोल ब्लॉक जिंदल समूह के नाम होते जा रहे हैं। आने वाले पांच साल में जिंदल ग्रुप का कोयला उत्पादन एसईसीएल के आसपास हो जाएगा।
एनटीपीसी-जेएसडब्ल्यू ने ठुकराया
बनई और भालुमुंडा का आवंटन पूर्व में एनटीपीसी को हुआ था, तब एनटीपीसी ने दोनों को मर्ज करके आवंटन करने की मांग की थी जिसे कोयला मंत्रालय ने नकार दिया था। 2020 में एनटीपीसी ने दोनों माइंस को सरेंडर कर दिया। इसके बाद कोयला मंत्रालय ने दोनों को मर्ज करके नीलामी की तो जेएसडब्ल्यू स्टील ने इसे हासिल कर लिया। एनटीपीसी ने इसका विरोध करते हुए आवंटन निरस्त करने की मांग रखी। इस बीच जेएसडब्ल्यू ने नुकसान दिखने पर एग्रीमेंट नहीं किया। कोयला मंत्रालय ने दोबारा आवंटन निरस्त करते हुए नीलामी के लिए रखा था। दोनों कोल ब्लॉक को मिलाकर करीब 1376 मिलियन टन कोयला भंडार होने का अनुमान है। यहां हाई स्ट्रिपिंग रेशियो आने की बात कही जा रही है।
