पुरी जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी और पवित्र रसोई मानी जाती है, जहां 56 भोग का महाप्रसाद तैयार होता है. यहां टमाटर समेत कई विदेशी सब्जियों का उपयोग वर्जित है, जिससे परंपरा और शुद्धता को बनाए रखा जाता है. जानिए इसकी दिलचस्प वजह

भारत में कई मंदिर अपनी आस्था, परंपरा और रहस्यों के लिए प्रसिद्ध हैं. इन्हीं में से एक है ओडिशा के पुरी शहर में स्थित भगवान जगन्नाथ जी का मंदिर, जो न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है. यह मंदिर विशेष रूप से हर साल होने वाली रथयात्रा के लिए प्रसिद्ध है. इस दौरान लाखों श्रद्धालु भगवान के दर्शन करने के साथ-साथ 56 भोग के महाप्रसाद का आनंद लेने यहां पहुंचते हैं.
लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस मंदिर में बनने वाले प्रसाद में टमाटर का उपयोग पूरी तरह से वर्जित है? आइए जानते हैं इसकी वजह
टमाटर क्यों नहीं होता शामिल?
ओडिया भाषा में टमाटर को ‘बिलाती’ कहा जाता है, जिसका अर्थ है विदेशी. मान्यताओं के अनुसार टमाटर भारत में विदेशियों द्वारा लाया गया था, इसलिए यह शुद्ध भारतीय सब्जी नहीं मानी जाती है. यही कारण है कि जगन्नाथ मंदिर की पाकशाला में टमाटर के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया गया है.
सिर्फ टमाटर ही नहीं, इन सब्जियों पर भी रोक
भगवान जगन्नाथ पुरी मंदिर के महाप्रसाद में टमाटर के अलावा कई और अन्य सब्जियों का भी उपयोग नहीं किया जाता है. इनमें शामिल हैं:
आलू
फूलगोभी
पत्तागोभी
चुकंदर
मक्का
हरी मटर
गाजर
शलजम
बेल मिर्च
धनिया
बीन्स
मिर्च
हरी बीन्स
करेला
भिंडी
खीरा
क्यों नहीं दी जाती इन सब्जियों की अनुमति?
मंदिर के महाप्रसाद में केवल स्थानीय उपज का उपयोग किया जाता है.
शुद्धता और परंपरा को बनाए रखने के लिए विदेशी सब्जियों को वर्जित किया गया है.
आलू का इतिहास, जानें कैसे पहुंचा यह भारत
आलू की खेती सबसे पहले पेरू देश में शुरु की गई थी. इसको भारत में अंग्रजों द्वारा जहांगीर के शासन काल में लाया गया था.…
दुनिया की सबसे बड़ी रसोई
जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी रसोई मानी जाती है. यहां हर दिन 240 मिट्टी और ईंट के चूल्हों पर भोग तैयार किया जाता है. हर चूल्हे पर एक के ऊपर एक 9 बर्तनों को रखकर खाना पकाया जाता है. ये 9 बर्तन नवग्रह, नवधान्य और नवदुर्गा का प्रतीक माने जाते हैं.
आस्था और परंपरा की मिसाल
पुरी जगन्नाथ मंदिर की रसोई सिर्फ खाना बनाने की जगह नहीं, बल्कि हिंदू परंपराओं, संस्कृति और भक्ति भाव का प्रतीक है. यहां हर व्यंजन में आस्था, नियम और श्रद्धा का समावेश होता है. और यही इसे दुनिया की सबसे खास रसोई बनाता है.
