सरगुजा: आषाढ़ माह के पहले दिन सरगुजा जिले के रामगढ़ में महोत्सव का आयोजन किया जाता है. इस आयोजन में भारतीय साहित्य, संस्कृति और धार्मिक पहलुओं का समागम देखने को मिलता है. देश से कई विद्वान यहां आते हैं और रामगढ़ के साहित्य पर उनके द्वारा प्रकाशित शोध पत्रों का वाचन किया जाता है. संस्कृत के विद्वान और मंचन के बड़े कलाकारों के भी आयोजन यहां होते हैं.

प्राचीन नाट्यशाला: सरगुजा के रामगढ़ में एक प्राचीन नाट्यशाला है. इस नाट्यशाला को देखकर ही लगता है कि किसी बड़े आयोजन के लिए यहां मंच और लोगों के बैठने की व्यवस्था की गई होगी. नाट्यशाला में गूंजती आवाज किसी साउंड सिस्टम का अहसास कराती है. इन अद्भुत खूबियों की वजह से यह भी माना जाता है कि भरत मुनि ने इसी नाट्यशाला से प्रभावित होकर नाट्य शास्त्र की रचना की थी.
रामगढ़ में प्राचीन नाट्यशाला
पंडित योगेश नारायण मिश्र कहते हैं कि रामगढ़ पर जब मैंने शोध किया तो एक ज्योतिषी और वास्तुशास्त्री होने के कारण मुझे वहां का अद्भुत वास्तु दिखा. नाट्यशाला ऐसी है, जिसका मुख्य सम दिशा यानी की पूर्व, पश्चिम, उत्तर, दक्षिण में नहीं है, बल्कि वो वायव्य कोण की ओर मुख करके बनाई गई है. ये वायु के प्रवाह की दिशा है. इस कारण जब उस मंच पर एक घुंघरू भी खनकेगा तो उसकी आवाज सामने दर्शक दीर्घा तक स्पष्ट पहुंचेगी. ऐसा अद्भुत वास्तुकला का संयोजन है कि करीब सवा लाख लोगों की दर्शक दीर्घा से मंच को स्पष्ट देखा और सुना जा सकता है
शोधकर्ता आचार्य नीलिम्प त्रिपाठी ने बताया, ” सरगुजा कौशल प्रांत में है. यहां नाट्यशाला हजारों साल पुरानी है.महाकवि कालिदास ने अपना पहला काव्य खंड मेघदूत यहीं लिखा.”
रामगढ़ में स्थित रामगिरि पर्वत से मेघ के टकराने, बादल की गर्जना और बारिश के संबंध को महाकवि कालिदास के महाकाव्य मेघदूतम में बताया गया है. ऐसा दावा किया जाता है कि इसी पर्वत के प्रभाव से कालिदास ने यह रचना की थी. भगवान राम वनवास के दौरान यहां रहे थे, इसका वर्णन भी मेघदूतम में मिलता है.
महकवि कालिदास की रचना स्थली रामगढ़ (ETV Bharat Chhattisgarh)
हाथी की आकृति वाला रामगिरि पर्वत: रामगढ़ के पर्वत को ही रामगिरि पर्वत कहा जाता है. रामगढ़ पर्वत हाथी की आकृति का है. इन गुफाओं में मिलने वाले पद चिन्ह भगवान राम से संबंधित होने के दावे की पुष्टि करते हैं. सीताबेंगरा एक छोटे आकार की गुफा है. यहां सीढ़ियों से पहुंचा जा सकता है. इसका भू-विन्यास आयताकार है. गुफा 14 मीटर लंबी, 5 मीटर चौड़ी है. गुफा के सामने अर्धचंद्राकार बेंच बनी है. जोगीमारा गुफा की लंबाई 3 मीटर, चौड़ाई 1.8 मीटर है.
