बलौदाबाजार : छत्तीसगढ़ में अब खाद्य सामग्रियों में मिलावट करने वाले लोगों पर खाद्य विभाग सख्ती कर रहा है.अक्सर ऐसा देखा जाता रहा है कि त्यौहारी सीजन में ही खाद्य विभाग की टीम एक्टिव होती थी और कार्रवाई करती थी.इस पर भी जो प्रतिष्ठान अवमानक मामले में दोषी पाए जाते थे,उन पर सिर्फ जुर्माना लगाया जाता था. ऐसे कई मामले देखे गए जिनमें नमूना लिया गया, चालान बना , रिपोर्ट आई और फिर मामला फाइलों में दब गया. लेकिन बलौदाबाजार प्रशासन ने इस परिपाटी को तोड़ दिया है. क्योंकि बलौदाबाजार खाद्य सुरक्षा विभाग अब इन मामलों में न सिर्फ कार्रवाई कर रहा है बल्कि मिलावटखोरों को सजा भी दिला रहा है.

खाद्य सुरक्षा को लेकर ऐतिहासिक प्रशासनिक अभियान : छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में इन दिनों एक ऐतिहासिक प्रशासनिक अभियान चर्चा में है. यह सिर्फ प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक कानूनी मिसाल है, जो पूरे राज्य में पहली बार देखने को मिली है.बीते छह माह में यहां 40 प्रतिष्ठानों को अदालत से दोषी करार देकर सजा दिलाई गई है. यही नहीं एक साल में कुल 45 मामलों में मिलावटखोरों, नकली सामान बेचने वालों, और स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने वाले कारोबारियों को सजा मिली है. इसके साथ-साथ लगभग 13 लाख रुपये से ज्यादा की वसूली भी की गई है.
अदालत से सजा दिलाने में अव्वल :ऐसा पहली बार हुआ है कि पूरे छत्तीसगढ़ में बलौदाबाजार जिले की खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच सिर्फ नोटिस या चालान तक सीमित नहीं रही, बल्कि दोषियों को अदालत से सजा भी दिलाई गई. छत्तीसगढ़ में खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई पहले भी होती रही है, लेकिन मामला अदालत तक पहुंचकर वहां से सजा दिलवाने का काम सिर्फ बलौदाबाजार जिले में ही हुआ है.
कैसे बदली तस्वीर? : छह महीनों के भीतर, खाद्य सुरक्षा अधिकारी उमेश वर्मा और उनकी टीम ने बाजारों में लगातार छापेमारी की.जिसमें नमूने लिए, लैब टेस्ट कराए गए और जो दोषी मिले उनके खिलाफ अदालत में चालान पेश किया. इन सभी मामलों में खुद उमेश वर्मा ने वकील की भूमिका निभाई. अदालत में केस को इस तरह प्रस्तुत किया कि 40 में से 40 मामलों में दोषियों को सजा मिली. इस पूरे अभियान की रीढ़ कहें तो वो उमेश वर्मा ही हैं. जो एक सरकारी अधिकारी होने के साथ-साथ एक प्रशिक्षित विधिवेत्ता भी हैं.
बलौदाबाजार में दो कोर्ट बेंच हैं – एक ADM अपर कलेक्टर दीप्ति गोते की अध्यक्षता वाली प्रशासनिक अदालत में 43 केस, और दूसरी मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट CJM की अदालत में 2 केस. दोनों में उमेश वर्मा ने ज्यादातर केसों की बहस की और जीत हासिल की. उमेश वर्मा ने ETV भारत को कहा कि हमारा उद्देश्य सजा दिलाना नहीं बल्कि आमजनों के सेहत की चिंता है. लोगों को सही और कॉलिटी प्रोडक्टस मिले.मेरे लिए यह सिर्फ ड्यूटी नहीं, मिशन है. हर नागरिक को साफ और सुरक्षित खाद्य सामग्री मिले, यही मेरा लक्ष्य है.
मिलावटखोरों को मैसेज : उमेश वर्मा की माने तो उन्होंने अवमानक खाद्य सामग्री वाले मामलों में लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वालों को कड़ी चेतावनी के साथ एक मैसेज भी दिया है.वो खाद्य पदार्थ जो सेहत के लिए हानिकारक है उनकी बिक्री ना हो.साथ ही साथ जो लोग इस तरह का काम कर रहे हैं उनके मन में डर पैदा हो.
हमारा उद्देश्य केवल आरोपियों को सजा दिलाना ही नहीं, बल्कि आम जन मानस को स्वस्थ एवं सुरक्षित खाद्य सामग्री मिले, यह भी सुनिश्चित करना है ताकि लोगों के स्वास्थ्य पर असर न पड़े. पिछले महीने में जिले में कार्यरत लगभग 150 खाद्य कारोबारियों एवं स्व सहायता समूहों को निःशुल्क FOSTAC प्रशिक्षण भी कराया गया- उमेश वर्मा, खाद्य सुरक्षा अधिकारी
बलौदाबाजार में कितने मामले आए सामने : बलौदाबाजार में खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने जिन 40 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की है. उनकी खामियां चौंकाने वाली थी.
मिथ्या छाप एवं मिस ब्रांडेड प्रोडक्ट – पैकेट पर मैन्युफैक्चरिंग, एक्सपायरी, बैच नंबर, इंग्रेडिएंट्स की जानकारी नहीं होती
अवमानक मिठाइयां – इनमें मेटानिल यलो जैसे प्रतिबंधित अखाद्य कलर का इस्तेमाल होता है.
नकली ब्रांड- नकली लेबल लगाकर सस्ते सामान की ऊंचे दाम पर बिक्री
खराब सामान – बासी और एक्सपायरी सामान की बिक्री
मिलावट से सेहत के साथ खिलवाड़: बलौदाबाजार जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉ. अशोक वर्मा के अनुसार मिलावटखोरी सिर्फ कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि यह धीमा जहर है. बासी, अमानक और नकली खाद्य पदार्थ लंबे समय तक खाने से कैंसर, लीवर-किडनी की बीमारियां, पेट के संक्रमण और बच्चों में कुपोषण जैसी समस्याएं हो सकती हैं.
बलौदाबाजार में जिस तरह प्रशासन ने सजा दिलाई है. यह पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक मॉडल बन सकता है। हम मेडिकल टीम की तरफ से भी नियमित सैंपल जांच और जागरूकता अभियान में सहयोग करते रहेंगे – डॉ अशोक वर्मा,सिविल सर्जन
जनता ने अभियान की सराहना की : इस पूरी प्रक्रिया को लेकर जनता में खुशी है.बाजार में मिलावटखोरी को लेकर लोग चिंतित तो थे, लेकिन प्रशासनिक कार्रवाई कभी भी इस स्तर तक नहीं पहुंची थी.
बलौदाबाजार में पहली बार लोगों को लगा कि अब सिस्टम वाकई में जाग गया है. हमें स्वस्थ और सुरक्षित भोजन मिलेगा -रोशन साहू, दुकानदार
“पहले तो लगता था कि प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति करता है, लेकिन अब असली सजा देखकर लगता है कि मिलावट करने वाले डरेंगे- दिनेश साहू,रहवासी
जहां एक ओर आम जनता खुश है, वहीं व्यापारियों में खलबली मची हुई है. कई व्यापारियों ने माना कि जो नियमों के खिलाफ हैं, उन्हें दंड मिलना ही चाहिए.
अब हम खुद हर प्रोडक्ट की जांच करवाते हैं, ताकि कोई गलती ना हो. जो गलती करेगा, उसे सजा मिलेगी इसमें अब कोई संदेह नहीं. हमारे दुकान में ऐसा कोई भी प्रोडक्ट नहीं है जिसमें एक्सपायरी डेट या लेबल ना हो.हम ऐसा कोई भी सामान नहीं बेचते हैं – राज पुरोहित, बीकानेर
बलौदाबाजार जिला खाद्य न्याय मॉडल बन रहा है. जिले की खाद्य सुरक्षा टीम ने न सिर्फ मिलावटी सामान की बिक्री पर अंकुश लगाने का काम किया है.बल्कि मामलों को कोर्ट तक लाकर सजा भी दिलवाई है.सजा के बाद जिले के दूसरे दुकानदारों में भी खौफ का माहौल है.बीते छह महीनों में 40 मामलों को कोर्ट में पेश किया गया,जिसमें सभी पर जुर्माना के साथ सजा दिलाया गया है.बलौदाबाजार ने प्रदेश के दूसरे जिलों के लिए नजीर पेश की है.यदि इसी तरह की कार्रवाई हर जिले में होने लगे तो मिलावटखोरों पर काफी हद तक अंकुश लग सकता है.
