धमतरी: अपनी धार्मिक मान्यताओं और मंदिरों के लिए धमतरी शहर जाना जाता है. सुबह और शाम यहां मंदिरों में बजने वाले घंटे और आरती खास होते हैं. यहां के ज्यादर लोगों के दिन की शुरुआत पूजा पाठ से ही होती है. यहां की आराध्य देवी मां विंध्यवासिनी और अधिष्ठात्री देवी मां अंगारमोती की महिमा अपरंपार है. पानी करता है हनुमान जी को प्रणाम: धमतरी जिले से होकर बहने वाली नदी महानदी को यहां के लोग जीवनदायिनी नदी के रुप में मानते हैं. शहर की और गांव की एक बड़ी आबादी इसी नदी के किनारे बसी है. एक बड़ी आबादी की पानी की जरूरत को महानदी ही पूरा करती है. धमतरी में बने बड़े बांधों में से एक गंगरेल बांध इसी महानदी पर बना है.

गंगरेल बुझाता है इंसान और जमीन की प्यास: धर्म की नगरी के नाम से भी इस शहर को जाना जाता है. गंगरेल बांध के पानी से यहां के किसानों की सिंचित होती है. गंगरेल डैम का पानी धमतरी ही नहीं बल्कि रायपुर और भिलाई के लोगों की भी प्यास बुझाता है. हजारों एकड़ की फसल डैम के पानी से लहलहाती है.
पानी करता है पवनपुत्र को प्रणाम
गंगरेल बांध पर बना हनुमान जी का मंदिर है खास: गंगरेल डैम पर बना हनुमान जी का मंदिर यहां से सबसे खास है. मंदिर को लेकर कई मान्यताएं और धार्मिक कहानियां प्रचलित हैं. इस मंदिर से लोगों की बड़ी आस्था जुड़ी है.
बाढ़ में भी नहीं डूबते यहां हनुमान
क्या है मंदिर से जुड़ी मान्यता: लोगों का ऐसा मानना है कि जब गंगरेल बांध का पानी यानी महानदी का जलस्तर हनुमान जी के चरणों को स्पर्श करता है तब गंगरेल बांध का गेट खोल दिए जाते हैं. कहा यह जाता है कि हनुमान जी आज तक इस पानी में डूबे नहीं हैं. दशकों से बजरंग बली का मंदिर यहां अडिग खड़ा है.
पानी करता है पवनपुत्र को प्रणाम
बांध का कैचमेंट एरिया फुल: 32 टीएमसी वाले गंगरेल बांध में 90 फ़ीसदी से ज्यादा जल भराव हो गया है. बांध में 30 टीएमसी पानी भर गया है. कैचमेंट एरिया में हो रही लगातार बारिश से 10 हजार से ज्यादा क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई है. आंकड़ों की बात करें तो गंगरेल बांध की 348.70 मीटर की जलस्तर की क्षमता है. जो 347.85 फीसदी भर चुका है. जो अधिकतम स्तर से मात्र 0.85 मीटर कम है.
प्रशासन ने जारी किया अलर्ट: लगातार बढ़ते जल स्तर को लेकर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है. अधिकारियों को अलर्ट पर रहने को कहा गया है. इसके साथ ही बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लोगों को अलर्ट किया गया है. यह सब गंगरेल बांध में बढ़े जलस्तर को लेकर किया जा रहा है. बांध में बढ़ते जलभराव के बाद भी भक्तों की आस्था ऐसी है कि वो यहां हनुमान जी के दर्शनो के लिए लगातार पहुंच रहे हैं.
क्या है मंदिर से जुड़ी कहानी: अंगार मोती मंदिर के पुजारी तुकाराम मरकाम ने बताया कि 1973 में जब माताजी को विराजमान करवाया गया. तब कृषि विभाग वालों ने यहां हनुमान जी को भी विराजित करवाया. हनुमान जी को लेकर मान्यता है कि जो भी भक्त अपनी मनोकामना लेकर आते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती है. कष्ट, दर्द, संकट को हनुमान जी दूर करते हैं. हनुमान जी का प्रमाणित यही है कि गंगा मैया उनके चरणों को स्पर्श करती है. तब बांध का गेट खुलता है. जितना लेवल बना हुआ है उतना ही जलस्तर रहता है. आजतक बाढ़ यहां नहीं आया है. हनुमान जी का मंदिर नहीं डूबा है. यहां देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते हैं. संगम नगरी से भी भक्त यहां हनुमान जी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
पर्यटकों की आस्था: यहां आने पर्यटक बताते हैं कि यहां का नजारा का काफी अदभुत होता है. जो भी इच्छा होती है भक्त यहां मांगता है और भगवान उसे खुद पूरा करते हैं. स्थानीय पर्यटक भी ये मानते हैं कि यह मंदिर काफी अदभुत है. जब भगवान के चरणों में पानी पहुंचता है तब बांध के गेट भी खोले जाते हैं.
कलेक्टर की अपील: धमतरी कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि गंगरेल बांध 91 प्रतिशत भर चुका है. अगर लगातार बारिश होती रही तो गंगरेल बांध के गेट खोले जाएंगे. हमने एडवाइजरी जारी की है. केशकाल और कांकेर एरिया में बारिश होती है तो यहां पर गेट खोलने की स्थिति आएगी. हमने लोगों को सतर्क किया है कि नदी की ओर अपने पशुओं को ना छोड़े और ना ही खुद जाएं. गेट खोलने से पहले सभी को जानकारी मुहैया कराई जाएगी.
