कांकेर: जिला अब नक्सल से नहीं बल्कि आधुनिक और उन्नत खेती के नाम से पहचान बना रहा है. धान जैसे पारंपरिक फसलों के अलावा अब यहां किसान लाख की खेती भी कर रहे हैं. साथ ही इससे बंपर कमाई भी कर रहे हैं. लाख की खेती के मामले में कांकेर जिला नंबर वन बन गया है. जिले में हर साल लगभग 7,000 मैट्रिक टन लाख का उत्पादन हो रहा है.

लाख की खेती का ‘सेमियालता मॉडल’: कुसुम और बेर के पेड़ में लाख का उत्पादन पारंपरिक तौर पर होता है. हालांकि अब किसान सेमियालता में लाख उत्पादन कर रहे हैं. इसे एक मॉडल के रूप में विकसित कर लिया गया है. कृषि वैज्ञानिक और किसान बताते हैं कि सेमियालता के पौधे में लाख की खेती में शुरुआती लागत के बाद खर्च कम होते जाता है. साथ ही प्रति एकड़ 1 लाख रुपए तक कमाई हो जाती है.
कांकेर में लाख की खेती से जुड़े तथ्य
सेमियालता क्यों विशेष?
1 साल में पौधा तैयार
हर 6 महीने में लाख की फसल
एक बार लागत, बाद में खर्च कम
प्रति एकड़ ₹1 लाख+ कमाई
जानिए किसानों की कहानी: किरकादंड गांव के किसान पुरषोत्तम मंडावी ने वर्ष 2005 में लाख की खेती शुरू की. उन्होंने वन विभाग से प्रशिक्षण लिया, झारखंड रांची के लाख प्रशिक्षण केंद्र में उन्नत तकनीक सीखी. उन्होंने बताया कि शुरुआत में 5-10 किलो उत्पादन होता था लेकिन अब 50 किलो तक उत्पादन होने लगा है.
कृषि विज्ञान केंद्र कांकेर से मुझे निशुल्क 120 सेमियालता का पौधा मिला था, जहां मैने इस पौधे में लाख लगाया, एक साल बाद मुझे इससे 27 किलो लाख मिला. मैंने 2 से 3 डिसिमिल जगह में ही लगाया था. अब मैं 8 एकड़ में सिर्फ सेमियालता का पौधे में लाख उत्पादन कर रहा हूं और 12 लाख रुपए सालाना मुनाफा हो रहा है. – किसान पुरषोत्तम मंडावी
लाख की खेती में कांकेर बना नंबर-1
कम लागत में बेहतर मुनाफा: तारसगांव के किसान मनीष सोरी बताते हैं, सेमियालता पौधे को तैयार होने में 1 साल लगता है, बीज/कीड़ा चढ़ाने के 6 महीने बाद लाख तैयार हो जाता है. पिछले सीजन में 820 रुपये/किलो के भाव में मैंने इसे बेचा है. 1 एकड़ से 70–80 हजार रुपये की कमाई हो जा रही है. प्रारंभिक लागत लगभग 1-डेढ़ लाख है लेकिन आगे लागत कम होती जाती है.
अभी तक मैं पिछले साल जैसे देखा तो हम लोग बेर, कुसुम और सेमियालता को जोड़ कर करीबन 3 से 4 लाख एक साल में मुनाफा कमा लिए है.- मनीष सोरी किसान
अलग-अलग जगह लाख के मुख्य उपयोग
उद्योग- ग्रामोफोन रिकॉर्ड, विद्युत उपकरणों के इंसुलेटर, वार्निश, पॉलिश, स्याही और सीमेंट निर्माण
कला और शिल्प: लाख की चूड़ियां, आभूषण, फर्नीचर पॉलिश, लकड़ी के खिलौनों को रंगने में उपयोग
स्वास्थ्य: आयुर्वेद और यूनानी दवाओं में उपयोग, त्वचा रोगों के उपचार में सहायक, घाव भरने की प्रक्रिया तेज
कुसुमी लाख, कांकेर की पहचान: जिला कृषि विज्ञान केंद्र प्रमुख डॉ. बीरबल साहू के अनुसार, कांकेर में देश का सबसे उच्च गुणवत्ता वाला ‘कुसुमी लाख’ तैयार होता है. बीज की कमी दूर करने के लिए सेमियालता में भी उत्पादन शुरू किए हैं. 60-70 एकड़ क्षेत्र में सेमियालता की फसल है.
किसानों को बीज पूरे साल मिलता है क्योंकि कुसुम की हार्वेस्ट के बाद सेमियालता में इनोकुलेशन और फिर सेमियालता के बाद कुसुम में इनोकुलेशन इससे चक्र बना रहता है, खेती का दर्जा और MSP पर खरीदी से और मजबूती मिली है- डॉ. बीरबल साहू, कृषि विज्ञान केंद्र प्रमुख
जहां कभी नक्सल गतिविधियों की वजह से कांकेर सुर्खियों में था, वहीं अब यहां के किसान लाख उत्पादन से आर्थिक रूप से मजबूत हो रहे हैं और क्षेत्र की छवि बदल रहे हैं. कांकेर ना सिर्फ देश का सबसे उच्च क्वालिटी के लाख का उत्पादन कर रहा है बल्कि यहां से अब अन्य राज्यों को भी लाख के बीज दिए जा रहे हैं.
