धमतरी: जो किसान पूरे देश का पेट अपनी हाड़ तोड़ मेहनत से भरता है, वही किसान दो वक्त की रोटी के लिए जान जोखिम में डालने को मजबूर है. किसान श्रीराम इन बातों को कहते कहते भावुक हो जाते हैं. धमतरी जिला मुख्यालय से 55 किमी दूर और जिले के अंतिम छोर पर बसा कोलियारी गांव, आजादी के बाद से विकास की राह देख रहा है. गांव के किसान देवप्रसाद कहते हैं कि वो जान जोखिम में डालकर अपने खेतों में फसल उगाने और परिवार का पेट भरने को मजबूर हैं. दो वक्त की रोटी के लिए सालों से कोलियारी के किसान मौत को मात देकर खेती कर रहे हैं. इन किसानों को कभी अपने डूबने का तो कभी जंगली जानवरों से सामना होने का भय रहता है.

मौत को मात देकर करते हैं खेती
दरअसल, धमतरी के अंतिम छोर पर बसा कोलियारी गांव गंगरेल डुबान क्षेत्र में आता है. गांव वालों के ज्यादातर खेत डुबान क्षेत्र में ही आते हैं. गांव के लोग अपने खेतों में धान की फसल ज्यादा लगाते हैं, क्योंकि यहां सिचाई के लिए पानी की दिक्कत नहीं होती. लेकिन यही पानी इनके जीवन के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है.
नाव से जाते हैं खेती करने और फसल काटने
गांव के किसान श्रीराम कुंजाम बताते हैं कि उनके पिता भी इसी तरह से नाव से फसल लाने जाते थे. पिता के बाद वो भी नाव से ही फसल लाने को मजबूर हैं. गांव वाले कहते हैं कि अगर यही हाल रहा तो उनके बेटे भी इसी तरह से जान जोखिम में डालकर खेती करेंगे. गांव वाले कहते हैं कि अगर सरकार सड़क की सुविधा इस इलाके में कर दे तो हमारी जिंदगी संवर जाए. गांव वाले कहते हैं कि हम सालों से पुलिया की भी मांग कर रहे हैं, लेकिन वो आजतक अधूरी पड़ी है.
धमतरी को ”धनहा धमतरी” भी कहते हैं
धनहा का अर्थ होता है वो किसान जो सिर्फ धान की खेती करता है. इस इलाके के ज्यादातर किसान सिर्फ धान की ही खेती करते हैं. सालभर में जो भी धान उपजता है, उससे ये किसान परिवार का पेट पालते हैं, घर की बाकी जरूरतों को पूरा करते हैं. गांव के किसान कहते हैं कि हम दूसरों का पेट भरते हैं लेकिन अपना ही पेट भरने के लिए इस तरह के खतरे उठाते हैं.
डुबान क्षेत्र में डूबने का डर
कोलियारी गांव में जितने भी किसान हैं, वो नाव की मदद से अपने धान के खेतों तक पहुंचते हैं. फसल काटकर नाव की मदद से उसे अपने घर तक पहुंचाते हैं. गांव वाले कहते हैं कि फसल लाने के दौरान नाव पर काफी ज्यादा वजन होता है. कई बार नाव पलटने का भी खतरा बना रहता है. गांव के किसान श्रीराम कहते हैं कि बच्चों का पेट पालने के लिए हम जान जोखिम में डालकर यहां आते हैं. गांव के एक और किसान देवप्रसाद कहते हैं कि जब हम घर से फसल लाने के लिए निकलते हैं तो पूरा परिवार चिंतित रहता है. जब हम सकुशल घर लौट आते हैं तो परिवार की जान में जान आती है.
रोड और पुल बन जाए तो जिंदगी संवर जाए
कोलियारी गांव के किसान कहते हैं कि एक अदद पुल और सड़क की मांग हम दशकों से कर रहे हैं. शासन अगर चाहे तो हमारी दिक्कत का अंत तुरंत हो जाए. किसानों की इस समस्या को जब ईटीवी भारत की टीम ने कलेक्टर के सामने रखा तो वो भी चौंक गए. कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि हमारी कोशिश होगी कि इन किसानों की समस्या का समाधान जल्द से जल्द हो. कलेक्टर ने कहा कि धान खरीदी का उत्सव प्रदेश में चल रहा है. हमारी कोशिश है कि किसानों का धान सुरक्षित तरीके से खरीदी केंद्र तक पहुंचे जाए, इसकी व्यवस्था भी हम कर रहे हैं.
तिर्रा ग्राम पंचायत में आता है गांव
कोलियारी गांव के किसान बताते हैं कि धान लगाने से लेकर काटने तक उनकी मुसीबत बनी रहती है. गांव में करीब 60 लोगों का परिवार रहता है. करीब-करीब पूरा गांव ही धान की खेती पर निर्भर है. गांव की बसाहट दो हिस्सों में बंटी है. एक हिस्सा जमीन वाला है तो दूसरा हिस्सा बांध वाले क्षेत्र में आता है. दोनों बसाहट के बीच में बांध का पानी भरा रहता है. इसी पानी को नाव से पार कर दोनों ओर के किसान अपने खेतों तक पहुंचते हैं. गांव वाले कहते हैं एक रास्ता है, जो उनके खेतों तक जाता है लेकिन वहां से ट्रैक्टर के जरिए फसल लाना काफी महंगा पड़ता है. ढुलाई इतनी ज्यादा लगती है कि फसल की लागत भी नहीं निकल पाती. अगर कोई किसान फसल को ट्रैक्टर से लाना भी चाहे तो समय पर गाड़ी नहीं मिलती.
गांव में रहते हैं 60 परिवार
गांव के ज्यादातर किसानों का कहना है कि उनके पास इतनी ही जमीन है, जिससे उनका गुजर बसर चल जाए. अगर वो चाहें भी कि धान की कटाई और मिंजाई के लिए मजदूर रख लें तो ये उनके लिए संभव नहीं है. ऐसे में किसान फसल काटने से लेकर पहुंचाने तक का काम खुद करते हैं. गांव वाले कहते हैं कि वो अपनी फसल बेचने के लिए अकलाडोंगरी उपार्जन केंद्र ले जाते हैं. ये धान खरीदी केंद्र उनके खेतों से करीब 2 से 3 किमी की दूरी पर है. सिर्फ इतनी दूर तक फसल पहुंचाने में उनके पसीने छूट जाते हैं.
कलेक्टर ने दिया मदद का भरोसा
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा कहते हैं कि कोलियारी गांव डुबान प्रभावित गांव है. वहां पर पूर्व में भी रोड के लिए प्रयास किया गया था. वहां एरिगेशन का पट्टा किसानों को मिला है. लेकिन फॉरेस्ट एरिया आने से रोड बनाने में समस्या है. कलेक्टर ने भरोसा जताया है कि जल्द ही इस समस्या को दूर करने का काम हम करेंगे.
