गुप्त नवरात्रि वर्ष में दो बार माघ और आषाढ़ मास में आती है। ‘गुप्त’ शब्द स्वयं इस पर्व की प्रकृति को स्पष्ट करता है, जहां साधक अपनी साधना को गोपनीय रखते हैं और दिखावे से दूर रहकर देवी शक्ति की आराधना करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस काल में की गई साधना शीघ्र फल देने वाली मानी जाती है और मनोकामनाओं की पूर्ति के साथ-साथ आत्मबल में वृद्धि करती है।

इस नवरात्रि में देवी दुर्गा के उग्र और सिद्धिदायी स्वरूपों के साथ दस महाविद्याओं की उपासना का विशेष महत्व माना गया है। साधक मंत्र-जप, ध्यान, दुर्गा सप्तशती पाठ और व्रत के माध्यम से शक्ति साधना करते हैं। यह साधना भय, रोग, मानसिक अस्थिरता और जीवन की बाधाओं से मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करती है। वहीं सामान्य श्रद्धालु भी सरल पूजा और संयमित जीवनचर्या अपनाकर माँ की कृपा प्राप्त करते हैं।
प्रतिपदा तिथि का प्रारंभ: 19 जनवरी 2026, सोमवार को सुबह 01:21 बजे.
प्रतिपदा तिथि का समापन: 20 जनवरी 2026, मंगलवार को सुबह 02:14 बजे.
उदयातिथि के अनुसार: माघ गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ 19 जनवरी 2026 को होगा.
घटस्थापना (कलश स्थापना) का शुभ मुहूर्त
घटस्थापना मुहूर्त: सुबह 7:14 से 10:46 बजे तक.
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक.
माघ गुप्त नवरात्रि प्रारंभ
ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि पंचांग की गणना के अनुसार सोमवार 19 जनवरी को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग तथा मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी में गुप्त नवरात्र का आरंभ होगा. मध्यान काल में शुभ अभिजीत के समय सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग रहेगा. सर्वार्थसिद्धि योग प्रत्येक शुभ कार्य को सफल करने वाला माना गया है. इस योग में किए गए शुभ मांगलिक कार्य मनोरथ पूर्ण करते हैं. इस योग में साधना, आराधना की शुरुआत करने से यह शीघ्र फलित होती है.
चार रवियोग का संयोग
ज्योतिषाचार्य डा.अनीष व्यास ने बताया कि दो सर्वार्थसिद्धि व चार रवि योग का संयोग माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी पर्यंत गुप्त नवरात्रि का अनुक्रम रहता है. यह साधक और आराधकों के लिए विशेष महत्वपूर्ण होती है. इस कालखंड में चुंकी सूर्य का उत्तरायण होता है, जो शुभ मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है. ग्रह योग की गणना भी इस बार श्रेष्ठ है जो साधना का अनुकूल और मनवांछित फल प्रदान कर सकती है. इस बार नवरात्र के नौ दिनों में दो सर्वार्थ सिद्धि योग है और चार रवि योग का संयोग बन रहा है.
19 जनवरी: कुमार योग, सर्वार्थ सिद्धि
20 जनवरी: द्विपुष्कर योग, राजयोग
21 जनवरी: राजयोग, रवि योग
22 जनवरी: रवि योग
23 जनवरी: कुमार योग, रवि योग
24 जनवरी: रवि योग
25 जनवरी: रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि
27 जनवरी: सर्वार्थ सिद्धि योग.
गुप्त नवरात्रि में साधना
कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि प्रत्यक्ष नवरात्रि में मां भगवती की पूजा जहां माता के ममत्व के रूप में की जाती है तो वहीं गुप्त नवरात्रि में देवी दुर्गा के विभिन्न रूपों की पूजा शक्ति रूप में की जाती है. मान्यता है कि गुप्त नवरात्रि में देवी साधना किसी को बता कर नहीं की जाती है. इसलिए इन दिनों को नाम ही गुप्त दिया गया है. गुप्त नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक गुप्त अनुष्ठान किये जाते हैं. इन दिनों देवी दुर्गा के दस रूपों की पूजा की जाती है. मान्यता है कि इन नवरात्रि में देवी साधना से शीघ्र प्रसन्न् होती हैं और मनोवांछित फल प्रदान करती हैं. जितनी अधिक गोपनीयता इस साधना की होगी उसका फल भी उतनी ही जल्दी मिलेगा. देवी के मां कालिके, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी देवी, भुनेश्वरी देवी, मां धूम्रावती, बगलामुखी माता, मातंगी माता और देवी कमला की गुप्त नवरात्रि में पूजा की जाती है. मंत्र जाप, श्री दुर्गा सप्तशती, हवन के द्वारा इन दिनों देवी साधना करते हैं. यदि आप हवन आदि कर्मकांड करने में असहज हों तो नौ दिन का किसी भी तरह का संकल्प जैसे सवा लाख मंत्रों का जाप कर अनुष्ठान कर सकते हैं. या फिर राम रक्षा स्त्रोत, देवी भागवत आदि का नौ दिन का संकल्प लेकर पाठ कर सकते हैं. अखंड जोत जलाकर साधना करने से माता प्रसन्न होती हैं.
मां दुर्गा के इन स्वरूपों की होती है पूजा
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि मां कालिके, तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूम्रवती, माता बगलामुखी, मातंगी, कमला देवी
सामग्री
भविष्यवक्ता डा. अनीष व्यास ने बताया कि मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र, सिंदूर, केसर, कपूर, जौ, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, बंदनवार आम के पत्तों का, लाल पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, जौ, बंदनवार, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, जावित्री, नारियल, आसन, रेत, मिट्टी, पान, लौंग, इलायची, कलश मिट्टी या पीतल का, हवन सामग्री, पूजन के लिए थाली, श्वेत वस्त्र, दूध, दही, ऋतुफल, सरसों सफेद और पीली, गंगाजल आदि.
मां दुर्गा की ऐसे करें पूजा
भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक डा. अनीष व्यास ने बताया कि गुप्त नवरात्रि के दौरान तांत्रिक और अघोरी मां दुर्गा की आधी रात में पूजा करते हैं. मां दुर्गा की प्रतिमा या मूर्ति स्थापित कर लाल रंग का सिंदूर और सुनहरे गोटे वाली चुनरी अर्पित की जाती है. इसके बाद मां के चरणों में पूजा सामग्री को अर्पित किया जाता है. मां दुर्गा को लाल पुष्प चढ़ाना शुभ माना जाता है. सरसों के तेल से दीपक जलाकर ‘ॐ दुं दुर्गायै नमः’ मंत्र का जाप करना चाहिए.
मां बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ जो पूरे देश में आस्था का प्रमुख केंद्र है, गुप्त नवरात्रि के दौरान एक शांत साधना स्थल के रूप में दिखाई देता है। यहां आने वाले श्रद्धालु और साधक भीड़-भाड़ और औपचारिकता से दूर रहकर मां बम्लेश्वरी के चरणों में ध्यान और जप में लीन रहते हैं। मंदिर परिसर में इस दौरान विशेष अनुशासन, स्वच्छता और शांत वातावरण बनाए रखा जाता है, ताकि साधना करने वालों को पूर्ण एकाग्रता मिल सके।
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि मां बम्लेश्वरी धाम में गुप्त नवरात्रि के दौरान की गई साधना विशेष फलदायी होती है। यही कारण है कि हर वर्ष इस पर्व पर सीमित संख्या में ही सही, लेकिन आस्था से परिपूर्ण श्रद्धालु डोंगरगढ़ पहुंचकर शक्ति उपासना करते हैं। कुल मिलाकर गुप्त नवरात्रि वह पर्व है जो व्यक्ति को बाहरी आडंबर से दूर ले जाकर आंतरिक शक्ति से जोड़ता है। माँ बम्लेश्वरी धाम डोंगरगढ़ में यह नवरात्रि श्रद्धा, साधना और आत्मिक चेतना का जीवंत प्रतीक बनकर भक्तों को शक्ति, धैर्य और संतुलन की अनुभूति करा रही है।
