नारायणपुर: सुदूर और कभी नक्सल प्रभावित रहे लंका गांव में शासन की ऐतिहासिक दस्तक देखने को मिली, जहां पहली बार जिला स्तरीय सुशासन आपके द्वार शिविर का आयोजन किया गया. घने जंगलों, पहाड़ों और दुर्गम रास्तों को पार कर प्रशासन जब इस अंतिम छोर तक पहुंचा, तो ग्रामीणों के लिए यह केवल एक शिविर नहीं, बल्कि विकास की नई उम्मीद बनकर सामने आया.

लंका गांव में सुशासन शिविर
ओरछा विकासखंड से लगभग 65 किलोमीटर और जिला मुख्यालय नारायणपुर से करीब 130 किलोमीटर दूर, इंद्रावती नदी के किनारे बसा लंका गांव वर्षों से बुनियादी सुविधाओं से दूर रहा है. बीजापुर जिले की सीमा से लगे इस गांव तक पहुंचना आज भी आसान नहीं है. नदी-नाले, पहाड़ी रास्ते और घने जंगल इस क्षेत्र को दुर्गम बनाते हैं.
ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात के बावजूद, मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और कलेक्टर नम्रता जैन के मार्गदर्शन में “नियद नेल्लानार योजना” के तहत 23 और 24 अप्रैल को यहां दो दिवसीय विशेष शिविर का आयोजन किया गया. यह आयोजन इसलिए भी खास रहा क्योंकि आजादी के बाद पहली बार इस गांव में इस स्तर का जिला स्तरीय कार्यक्रम आयोजित हुआ.
एक समय नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र में अब शासन की योजनाएं सीधे ग्रामीणों तक पहुंच रही हैं. लंका के साथ-साथ डोंडिमरका, पदमेटा, तालावाड़ा और कारंगुल जैसे आसपास के गांवों से भी सैकड़ों ग्रामीण शिविर में पहुंचे और विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाया.
इस शिविर का मुख्य आकर्षण सुशासन एक्सप्रेस रही. एक वाई-फाई युक्त मोबाइल सेवा वाहन, जिसने ग्रामीणों के लिए प्रशासन को उनके दरवाजे तक ला दिया. इस वाहन के माध्यम से 27 प्रकार के जरूरी दस्तावेज मौके पर ही तैयार किए गए। आधार कार्ड, जाति प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड जैसे जरूरी कार्य तत्काल संपन्न किए गए, जिससे ग्रामीणों को बार-बार दूरस्थ दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े. अब तक सुशासन एक्सप्रेस के माध्यम से जिलेभर में 17,520 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनमें से 16,279 का निराकरण किया जा चुका है, जो त्वरित सेवा वितरण का मजबूत उदाहरण है.
लंका में आयोजित इस शिविर में कुल 310 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 242 का तत्काल निराकरण कर दिया गया। शेष आवेदनों पर प्रक्रिया जारी है.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना: 99 आवेदन
आधार कार्ड: 80 आवेदन
राशन कार्ड: 25 आवेदन
जाति प्रमाण पत्र: 3 आवेदन
निवास प्रमाण पत्र: 2 आवेदन
इसके अलावा स्वास्थ्य, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, मनरेगा, महिला एवं बाल विकास जैसे विभागों से भी दर्जनों आवेदन प्राप्त हुए. शिविर में कृषि, स्वास्थ्य, प्रधानमंत्री आवास, खाद्य, राजस्व, समाज कल्याण, आदिवासी विकास, बैंकिंग और निर्वाचन सहित विभिन्न विभागों के स्टॉल लगाए गए। यहां ग्रामीणों को योजनाओं की जानकारी देने के साथ-साथ मौके पर ही पात्र हितग्राहियों को लाभान्वित किया गया.
कलेक्टर नम्रता जैन ने बताया कि “नियद नेल्लानार योजना” के तहत ऐसे शिविर अबूझमाड़ जैसे दुर्गम और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में शासन की मजबूत उपस्थिति को दर्शाते हैं. इन शिविरों से न केवल सेवाएं सुलभ हो रही हैं, बल्कि ग्रामीणों का शासन के प्रति विश्वास भी बढ़ रहा है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि अगला शिविर 29 और 30 अप्रैल को आदनार में आयोजित किया जाएगा, जिसमें आसपास के गांवों के लोग लाभान्वित होंगे. लंका में लगा यह शिविर सिर्फ एक प्रशासनिक पहल नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतीक है, जिसमें विकास को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का संकल्प दिखाई देता है. अबूझमाड़ के इन दूरस्थ इलाकों में सुशासन की यह दस्तक आने वाले समय में क्षेत्र की तस्वीर बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है.
