खैरागढ़ : खैरागढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के दावे एक बार फिर सवालों के घेरे में हैं. जिस हमर क्लिनिक को आम लोगों के इलाज का सहारा बनना था, वह शुरू होने से पहले ही आग की भेंट चढ़ गया. अब यह घटना सिर्फ आगजनी नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है.
आग की भेंट चढ़ा हमर क्लीनिक
खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जिले के अमलीपारा वार्ड क्रमांक 12 में लाखों की लागत से बना हमर क्लिनिक सोमवार रात संदिग्ध हालात में जल गया. हैरानी की बात ये है कि यह क्लिनिक अब तक शुरू ही नहीं हो पाया था. जिस भवन में मरीजों का इलाज होना था, वहां स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय फाइलों का अंबार रखा गया था.

बीएमओ सर से सूचना मिली कि हमर क्लिनिक भवन में आग लगी है.इसके बाद फायरब्रिगेड टीम को सूचना दी गई.अभी नया भवन बनाया गया है.इसमें किसी की पदस्थापना नहीं की गई है.बिजली कनेक्शन भी नहीं था,तो अंदेशा ये लग रहा है कि किसी अज्ञात ने आगजनी की है.अंदर किसी भी तरह का मेडिकल रिकॉर्ड नहीं था.सर्वे से जुड़ी फाइल और फॉर्म थे-डॉ आशीष शर्मा, CMHO खैरागढ़
हमर क्लिनिक योजना का मकसद था लोगों को मुफ्त ओपीडी, दवाइयां और प्राथमिक जांच की सुविधा देना.लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि महीनों बाद भी यहां एक भी मरीज का इलाज नहीं हुआ.स्वास्थ्य विभाग ने इसे अस्थायी स्टोर रूम में बदल दिया, जहां चिरायु योजना के दस्तावेज रखे गए थे और वही अब जलकर खाक हो चुके हैं. सबसे बड़ा सवाल आग लगने के कारणों को लेकर है.अधिकारियों के मुताबिक भवन में अब तक बिजली कनेक्शन ही नहीं था, ऐसे में शॉर्ट सर्किट की संभावना पूरी तरह खारिज हो गई है.इससे घटना को लेकर लापरवाही के साथ-साथ साजिश की आशंका भी गहराती जा रही है.
यह लापरवाही उस वार्ड में सामने आई है जिसे जिले का वीआईपी क्षेत्र माना जाता है.यहां जनप्रतिनिधियों के निवास होने के बावजूद न तो क्लिनिक चालू हो पाया और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम किए गए. घटना के बाद पुलिस जांच में जुट गई है और आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है.स्थानीय लोग कह रहे हैं कि अगर समय पर क्लिनिक शुरू हो जाता, तो न केवल इलाज मिलता बल्कि इस तरह की घटना भी टल सकती थी.
