कोरिया: खरीफ सीजन 2026 27 को देखते हुए जिले में किसानों को उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन पूरी तरह सक्रिय है. सहकारी समितियों के माध्यम से खाद वितरण लगातार जारी है. जिला प्रशासन इसकी नियमित निगरानी कर रहा है ताकि किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े.

कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने कृषि विभाग और सहकारी समितियों के अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि खाद वितरण व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी और सुचारु रहे. उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी किसानों को पीओएस मशीन के माध्यम से ही उर्वरक बांटा जाए और शासन द्वारा निर्धारित दर और मात्रा का पालन सुनिश्चित किया जाए.
उर्वरकों की कालाबाजारी पर नजर
उर्वरकों की कालाबाजारी, अवैध भंडारण और अनियमित वितरण पर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. कलेक्टर ने उड़नदस्ता दलों को सक्रिय रखते हुए ऐसे मामलों में संलिप्त व्यक्तियों और संस्थानों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं.
इधर कृषि विभाग किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूक कर रहा है. पारंपरिक यूरिया के साथ नैनो यूरिया के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है. कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार नैनो यूरिया कम मात्रा में अधिक प्रभावी परिणाम देता है, जिससे खेती की लागत घटती है और मिट्टी की गुणवत्ता भी सुरक्षित रहती है.
कोरिया जिले में उर्वरक वितरण
उप संचालक कृषि राजेश भारती ने बताया कि 1 जून 2026 तक जिले में उर्वरक वितरण लक्ष्य के मुकाबले उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है. कुल 12,150 मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 6,196 मीट्रिक टन उर्वरक किसानों को वितरित किया जा चुका है. एक ही दिन में 666 मीट्रिक टन खाद का वितरण कर खरीफ बुवाई की तैयारियों को और गति दी गई है.
उन्होंने आगे बताया कि वर्तमान में जिले के डबल लॉक केंद्रों में 1,883.969 मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध है, जिसमें यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी शामिल हैं. प्रशासन का दावा है कि किसानों को खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी.
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत सहकारी समितियों और लाइसेंसधारी विक्रेताओं से ही खाद खरीदें, पीओएस मशीन से रसीद अवश्य प्राप्त करें. आवश्यकता अनुसार ही उर्वरकों का उठाव करें. विभाग ने डीएपी और यूरिया के अत्यधिक उपयोग से बचते हुए एसएसपी, पोटाश, जैविक खाद और नैनो यूरिया के संतुलित उपयोग की सलाह दी है.
