- डिजिटल नवाचार, पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ विकसित छत्तीसगढ़ की नई प्रशासनिक पहचान
सुशासन केवल योजनाओं के निर्माण तक सीमित नहीं होता, बल्कि उसकी वास्तविक सफलता तब मानी जाती है जब शासन की प्रत्येक योजना का लाभ बिना किसी भेदभाव, बिना अनावश्यक विलंब और पूरी पारदर्शिता के साथ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार इसी सोच को आधार बनाकर प्रशासनिक सुधारों की नई संस्कृति विकसित कर रही है। “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास” की भावना के अनुरूप संवाद, तकनीक और पारदर्शिता को शासन का प्रमुख आधार बनाया गया है। आज सेवा सेतु, डिजिटल राजस्व सेवाएं, ई-ऑफिस, स्मार्ट पंजीयन, राजस्व ई-कोर्ट और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन जैसी अनेक पहलें आम नागरिकों के जीवन को सरल, सुगम और सुविधाजनक बना रही हैं।

सेवा सेतु : नागरिकों और शासन के बीच भरोसे का मजबूत पुल
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रारंभ किया गया “सेवा सेतु” प्रदेश में डिजिटल सुशासन का सबसे सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। इसका उद्देश्य नागरिकों को विभिन्न विभागों की सेवाएं एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराना है। पहले जहां ई-डिस्ट्रिक्ट पोर्टल पर केवल 86 सेवाएं उपलब्ध थीं, वहीं अब सेवा सेतु पोर्टल पर 30 से अधिक विभागों की 441 से अधिक सेवाएं एकीकृत रूप से उपलब्ध हैं।
अब नागरिकों को आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन, राशन कार्ड, भू-अभिलेख, श्रम पंजीयन, सामाजिक सुरक्षा योजनाओं, राजस्व सेवाओं और अनेक अन्य शासकीय सुविधाओं के लिए अलग-अलग कार्यालयों या पोर्टलों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। एक ही डिजिटल मंच से निर्धारित समय-सीमा में सेवाएं उपलब्ध हो रही हैं।
यह व्यवस्था केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि प्रशासनिक सोच में परिवर्तन का प्रतीक है। नागरिक अब घर बैठे अथवा अपने नजदीकी लोक सेवा केंद्र या पंचायत स्तर के सेवा सेतु केंद्र से आवेदन कर रहे हैं और समयबद्ध सेवाएं प्राप्त कर रहे हैं।
समयबद्ध सेवाएं बनीं सुशासन की पहचान
सेवा सेतु की सफलता उसके आंकड़ों से भी स्पष्ट होती है। पिछले 28 महीनों में 75 लाख 70 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 68 लाख 41 हजार से अधिक मामलों का निराकरण किया जा चुका है। यह लगभग 95 प्रतिशत से अधिक समयबद्ध निराकरण का प्रमाण है।
सबसे अधिक मांग आय, जाति, निवास प्रमाण-पत्र, विवाह पंजीयन और भू-अभिलेख संबंधी सेवाओं की रही है। सेवा सेतु ने न केवल नागरिकों का समय बचाया है, बल्कि प्रशासन की जवाबदेही भी सुनिश्चित की है।
व्हाट्सएप और पंचायत तक पहुंची डिजिटल सेवाएं
डिजिटल सेवाओं को और अधिक जनसुलभ बनाने के लिए सेवा सेतु को अब व्हाट्सएप प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा गया है। इसके माध्यम से नागरिक आवेदन की स्थिति, सेवाओं की जानकारी और अन्य आवश्यक सूचनाएं आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।
राज्य सरकार ने पंचायत सचिवों, सेवा सेतु केंद्र संचालकों और संबंधित कर्मचारियों को प्रशिक्षण देकर ग्राम पंचायत स्तर तक डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों के नागरिकों को जिला एवं तहसील मुख्यालय के बार-बार चक्कर लगाने की आवश्यकता काफी कम हो गई है। अब तक सेवा सेतु के माध्यम से 3.3 करोड़ से अधिक डिजिटल ट्रांजेक्शन किए जा चुके हैं, जो इसकी व्यापक स्वीकार्यता को दर्शाते हैं।
राजस्व सेवाओं में डिजिटल क्रांति
राजस्व विभाग ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में भूमि संबंधी सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया है। अब नागरिक राज्य के किसी भी स्थान से डिजिटल हस्ताक्षरयुक्त खसरा एवं बी-1 की प्रति निःशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं।
भूमि अभिलेख में किसी भी प्रकार के संशोधन की जानकारी पंजीकृत मोबाइल नंबर पर रियल-टाइम एसएमएस अलर्ट के माध्यम से प्राप्त होती है। कृषि ऋण के लिए गिरवी रखी गई भूमि की जानकारी भी ऑनलाइन उपलब्ध है, जिससे भूमि खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ी है।
सबसे महत्वपूर्ण सुधार यह है कि अब उप पंजीयक कार्यालय में दस्तावेज पंजीयन के साथ ही स्वतः नामांतरण प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। इससे नागरिकों को अलग से नामांतरण के लिए आवेदन नहीं करना पड़ता। मोबाइल ऐप के माध्यम से भी भूमि संबंधी रिकॉर्ड कहीं से भी देखा और डाउनलोड किया जा सकता है।
ई-ऑफिस : पारदर्शी और जवाबदेह प्रशासन की नई कार्यसंस्कृति
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में ई-ऑफिस प्रणाली प्रशासनिक कार्यप्रणाली में बड़ा परिवर्तन लेकर आई है। अब कागजी फाइलों की जगह डिजिटल फाइलों ने ले ली है।
ई-ऑफिस के माध्यम से प्रत्येक फाइल की ऑनलाइन ट्रैकिंग संभव है। कौन-सी फाइल किस अधिकारी के पास लंबित है और कितने समय से है, इसकी जानकारी तत्काल उपलब्ध हो जाती है। इससे कार्यों में अनावश्यक विलंब कम हुआ है तथा जवाबदेही बढ़ी है।
डिजिटल फाइलों से कागज की खपत कम हुई है, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिला है और दस्तावेजों के सुरक्षित संधारण की व्यवस्था मजबूत हुई है। सचिवालय से लेकर जिला एवं विकासखंड स्तर तक ई-ऑफिस के विस्तार से प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और प्रभावी बनी है।
स्मार्ट पंजीयन : आधुनिक सुविधाओं से आसान हुआ संपत्ति पंजीयन
राज्य सरकार ने पंजीयन विभाग में भी व्यापक सुधार किए हैं। पहले जहां संपत्ति की रजिस्ट्री कराने में कई घंटे या कई बार एक-दो दिन तक लग जाते थे, वहीं अब पूरी प्रक्रिया 15 से 20 मिनट में पूरी हो रही है।
स्मार्ट पंजीयन कार्यालयों में वातानुकूलित प्रतीक्षालय, हेल्प डेस्क, निःशुल्क वाई-फाई, मोबाइल चार्जिंग स्टेशन, टोकन प्रणाली, कैशलेस भुगतान, डिजिलॉकर सुविधा और व्हाट्सएप नोटिफिकेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
इन सुधारों से न केवल नागरिकों का समय बचा है, बल्कि बिचौलियों की भूमिका भी लगभग समाप्त हो गई है। शासन की “रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म” की नीति इस व्यवस्था में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।
राजस्व ई-कोर्ट : न्याय प्रक्रिया भी हुई डिजिटल
राजस्व मामलों में वर्षों से चली आ रही जटिलताओं को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने राजस्व ई-कोर्ट परियोजना लागू की है। अब नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, फौती, खाता सुधार जैसे मामलों की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है।
नागरिक अपने प्रकरण की स्थिति, सुनवाई की तिथि और आदेश की जानकारी डिजिटल माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं। इससे राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली अधिक पारदर्शी, त्वरित और जनोन्मुखी बनी है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय का स्पष्ट मत है कि तकनीक तभी सार्थक है जब उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे। ई-कोर्ट व्यवस्था ने इसी सोच को साकार किया है।
संवाद से समाधान तक मजबूत हुआ जनविश्वास
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन, जनदर्शन, सेवा सेतु और ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली ने शासन और जनता के बीच संवाद को नई मजबूती प्रदान की है। अब शिकायतों की ऑनलाइन मॉनिटरिंग, समयबद्ध निराकरण और जवाबदेही सुनिश्चित की जा रही है।
सरकार केवल योजनाएं संचालित नहीं कर रही, बल्कि यह सुनिश्चित कर रही है कि प्रत्येक पात्र नागरिक तक उनका लाभ पहुंचे। यही कारण है कि प्रशासनिक व्यवस्था अधिक संवेदनशील, उत्तरदायी और परिणामोन्मुखी बन रही है।
विकसित छत्तीसगढ़ की मजबूत आधारशिला
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में सुशासन का एक नया मॉडल विकसित हो रहा है, जिसमें तकनीक, पारदर्शिता और जनसहभागिता तीनों का प्रभावी समन्वय दिखाई देता है। सेवा सेतु, डिजिटल राजस्व सेवाएं, ई-ऑफिस, स्मार्ट पंजीयन और राजस्व ई-कोर्ट जैसी पहलें केवल प्रशासनिक सुधार नहीं, बल्कि नागरिकों के जीवन को सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक बनाने की दिशा में बड़े परिवर्तन हैं।
आज छत्तीसगढ़ की पहचान एक ऐसे राज्य के रूप में उभर रही है, जहां शासन कार्यालयों तक सीमित नहीं, बल्कि नागरिकों के घर तक पहुंच रहा है। संवाद से विश्वास, विश्वास से सहभागिता और सहभागिता से विकास का यह मॉडल विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण की मजबूत आधारशिला बन रहा है। यही “विष्णु का सुशासन” है—जहाँ तकनीक जनसेवा का माध्यम है, पारदर्शिता प्रशासन की पहचान है और नागरिक सर्वोच्च प्राथमिकता।
