कोरिया: छत्तीसगढ़ के कोरिया और मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के घने जंगलों में स्थित गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व अब देश के 56वें टाइगर रिजर्व के रूप में पहचान बना चुका है. क्षेत्रफल के हिसाब से यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा टाइगर रिजर्व है. वन विभाग का कहना है कि आने वाले समय में यह क्षेत्र बाघ संरक्षण के साथ-साथ पर्यटन और स्थानीय रोजगार का बड़ा केंद्र बन सकता है. 29 जुलाई को इंटरनेशनल टाइगर डे मनाया जाता है, ऐसे में आज आपको गुरु घासीदास टाइगर रिजर्व के बारे में बताते हैं.

कुछ साल पहले इस इलाके में पहली बार बाघों के पदचिह्न और कैमरा ट्रैप में उनकी तस्वीरें मिली थीं. जांच में पता चला कि ये बाघ मध्यप्रदेश के संजय नेशनल पार्क से प्राकृतिक कॉरिडोर के जरिए यहां पहुंचे थे. इसके बाद केंद्र और राज्य सरकार ने गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान और तमोर पिंगला अभयारण्य को मिलाकर टाइगर रिजर्व घोषित किया.
फिलहाल 4 से 5 बाघों की मौजूदगी
वन विभाग के अनुसार, अभी टाइगर रिजर्व में नियमित रूप से 4 से 5 बाघों की मौजूदगी के प्रमाण मिले हैं. कैमरा ट्रैप, पदचिह्न और अन्य वैज्ञानिक तरीकों से उनकी लगातार निगरानी की जा रही है.
बाघों की संख्या बढ़ाने की तैयारी
वन विभाग ने बाघों की सुरक्षा के लिए कोर एरिया में निगरानी बढ़ा दी है. जंगल में नियमित गश्त की जा रही है और कैमरा ट्रैप की संख्या भी बढ़ाई जा रही है. बाघों को पर्याप्त भोजन मिल सके, इसके लिए चीतल समेत अन्य शिकार प्रजातियों को जंगल में छोड़ा गया है.
प्राकृतिक टाइगर कॉरिडोर की बड़ी भूमिका
यह टाइगर रिजर्व मध्यप्रदेश के संजय नेशनल पार्क से लेकर झारखंड के बेतला टाइगर रिजर्व तक फैले प्राकृतिक कॉरिडोर का हिस्सा है. इसी रास्ते से बाघ एक जंगल से दूसरे जंगल तक सुरक्षित पहुंचते हैं, जिससे उनकी संख्या और आनुवंशिक विविधता बनाए रखने में मदद मिलती है.
पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा
टाइगर रिजर्व बनने के बाद यहां जंगल सफारी, ईको-टूरिज्म, होम-स्टे, नेचर ट्रेल, ट्रैकिंग, बर्ड वॉचिंग और वन व्याख्या केंद्र जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है. इससे कोरिया और एमसीबी जिले वन पर्यटन के बड़े केंद्र बन सकते हैं.
स्थानीय लोगों के लिए रोजगार
पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं को गाइड, सफारी चालक, होम-स्टे संचालक, होटल व्यवसाय, हस्तशिल्प और स्थानीय उत्पादों की बिक्री जैसे कई रोजगार के अवसर मिल सकते हैं. इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
वन विभाग की प्राथमिकताएं
- बाघों का संरक्षण
- प्राकृतिक आवास की सुरक्षा
- अवैध शिकार पर रोक
- आधुनिक निगरानी प्रणाली
- स्थानीय समुदाय की भागीदारी
- ईको-टूरिज्म का विकास
- रोजगार के नए अवसर
अधिकारी ने क्या कहा?
गुरु घासीदास-तमोर पिंगला टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर सौरभ सिंह ठाकुर ने बताया कि यह क्षेत्र बाघों का प्राकृतिक विचरण क्षेत्र है. कोरिया और सूरजपुर जिले की सीमा से लगे जंगलों में समय-समय पर बाघों की आवाजाही होती रहती है. फिलहाल वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है ताकि बाघों की गतिविधियों पर नजर रखी जा सके और किसी भी तरह की जनहानि न हो.
