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अबूझमाड़ के जंगलों से बाजार तक पहुंचा ‘डेंगूर फूटू’

नारायणपुर: जयस्तंभ चौक में डेली मार्केट में एक विशेष सब्जी की चर्चा हो रही है. यह मानसून की पहली बारिश के साथ जंगलों में उगा डेंगूर फूटू (देशी मशरूम) है. इस खास सब्जी को खरीदने के लिए मार्केट पहुंचे कृष्णा शांडिल्य कहते हैं, ”इसका स्वाद दूसरी सब्जियों से काफी अच्छा है.”
मार्केट की शान
डेंगूर फूटू पूरे मार्केट की शान बना हुआ है. पोषण से भरपूर इस दुर्लभ वनोपज की आवक बढ़ने से बाजार गुलजार है. दरअसल छत्तीसगढ़ का नारायणपुर जिला अपनी समृद्ध वन संपदा और आदिवासी संस्कृति के लिए जाना जाता है. बारिश के मौसम में यहां डेंगूर फूटू (देशी जंगली मशरूम) मिलता है. अबूझमाड़ और आसपास के वन क्षेत्रों से आदिवासी ग्रामीण इस मौसमी वनोपज को इकट्ठा कर नारायणपुर के जयस्तंभ चौक स्थित डेली मार्केट पहुंच रहे हैं. बाजार में डेंगूर फूटू की अच्छी आवक रही, जिससे खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी. स्थानीय बाजार में यह मशरूम 150 से 200 रुपये प्रति किलो अथवा 20-30 मशरूम वाली एक जुड़ी 40 से 50 रुपये में बिक रहा है, जबकि महानगरों में इसकी कीमत कई गुना अधिक बताई जाती है.
जंगल से लाते हैं. डेंगूर में आता है, इसे खोदना पड़ता है. 20 रुपए जुड़ी बेच रहे हैं. हम शहर नहीं जाते हैं. यहां बाजार में बेचते हैं. जब पानी ज्यादा गिरता है, तब ये निकलता है. खाने में अच्छा लगता है. लोग खरीदते हैं -सैनू राम, फूटू विक्रेता
जंगल से डेंगूर से निकलता है. सुबह जंगल जाते हैं और वहां से निकाल कर लाते हैं. आज पूरा फुटू का ही बाजार है. लोगों को बहुत पसंद आता है-जुगुल पोटाई, ग्रामीण विक्रेता
इस साल अच्छी मात्रा में मशरूम निकल रहा है. मैं 4 जोड़ी 100 रुपये में बेच रहा हूं. सब ले रहे हैं. एक झोला फुटू लेकर आया था, 500 से 600 रुपये में बेचा हूं-आशा राम यदव, ग्रामीण विक्रेता
डेंगूर फूटू क्या है
डेंगूर फूटू एक प्राकृतिक जंगली मशरूम है, जो मुख्य रूप से दीमक के पुराने टीले (बांबी) के आसपास स्वतः उगता है. पहली अच्छी बारिश, वातावरण में बढ़ी नमी और जमीन के भीतर की गर्मी एक आदर्श वातावरण तैयार करते हैं और बादलों की गड़गड़ाहट के बाद यह जमीन से बाहर निकलता है. इसका जीवनकाल बहुत कम होता है और यह केवल कुछ सप्ताह तक ही उपलब्ध रहता है.
वैज्ञानिक रूप से यह टर्मिटोमाइसिस (Termitomyces) समूह का खाद्य मशरूम माना जाता है, जो दीमकों के साथ सहजीवी संबंध में विकसित होता है. यह प्रोटीन, फाइबर, खनिज और कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और खाने में बेहद स्वादिष्ट होता है.
यह एक प्रकार का फंगस है, बारिश में तापमान अनुकूल होने पर मिट्टी से बाहर आते हैं. यह बहुत लाभकारी है. इसमें प्रोटिन रहता है, जो सेहत के लिए फायदेमंद है. इसमें फाइबर, विटामिन भी होता है. यह एंटीऑक्सिडेंट है. आयरन, कैल्शियम भी होता है. यह शरीर से सूजन को कम करता है. इम्यूनिटी बढ़ाने में मदद करता है. यह स्वाद में भी अच्छा होता है, इसलिए लोग बड़े चाव से खाते हैं. इसे सूखाकर रख सकते हैं. हमारे देश में बहुत प्रकार के मशरूम हैं. कुछ खाने वाले और कुछ जहरीले मशरूम भी होते हैं. ग्रामीणों को यह ध्यान रखना है कि जहरीले मशरूम को न खाएं. अच्छे से पहचान कर फूटू खाना चाहिए-डॉ. द्वीवेंदु दास, कृषि वैज्ञानिक एवं प्रमुख कृषि विज्ञान केंद्र नारायणपुर
नारायणपुर के बाजारों में देसी मशरूम
नारायणपुर के जयस्तंभ चौक स्थित डेली मार्केट में इन दिनों डेंगूर फूटू की भरपूर आवक देखने को मिल रही है. अबूझमाड़, ओरछा, कुतुल और भारंडा, रेमावंड, बेनूर एवं अन्य आसपास के वन क्षेत्रों से पहुंचे आदिवासी ग्रामीण सुबह-सुबह जंगलों से संग्रहित मशरूम लेकर बाजार पहुंच रहे हैं. स्थानीय बाजार में इसकी बिक्री 150 से 200 रुपये प्रति किलो तक अथवा 40 से 50 रुपये प्रति जुड़ी (20-30 मशरूम) के हिसाब से हो रही है. सीमित समय तक उपलब्ध रहने और अनूठे स्वाद के कारण खरीदार भी बड़ी संख्या में इसे खरीद रहे हैं.
नारायणपुर के बाजार में डेंगूर फूटू खरीदने वालों की भीड़ (ETV Bharat Chhattisgarh)
इसका स्वाद दूसरी सब्जियों से काफी अच्छा है. रायपुर, दुर्ग या दूसरे जिलों में काफी महंगा मिलता है लेकिन नारायणपुर में सस्ता मिलता है. यह जंगलों में मिलता है- कृष्णा शांडिल्य, फूटू ग्राहक
फूटू की नारायणपुर में काफी मांग है.बाहर के लोग भी खरीदते हैं. इसको शहर में बेचने के लिए भी व्यवस्था होनी चाहिए ताकि गांव के लोगों को अच्छा रेट मिले. गांव वाले दिनभर संग्रह करते हैं, उनकी अच्छी आय होनी चाहिए-गोपाल बघेल, मशरूम ग्राहक
इसकी सब्जी बहुत ही स्वादिष्ट होती है. इसे सुखाकर भी रखा जाता है. फिर सभी सब्जियों में मिलाकर बनाते हैं. वह ताजे फुटू से भी ज्यादा टेस्टी होती है. इस बार अच्छी आवक हुई है, इसलिए थोड़ा कम रेट मिल रहा है-जुगुल पोटाई, ग्रामीण विक्रेता
मार्केट में ज्यादातर लोग खरीद रहे डेंगूर फूटू
स्थानीय व्यापारियों के अनुसार, नारायणपुर और बस्तर से निकलने वाला यह मशरूम राज्य के अन्य शहरों के अलावा मध्यप्रदेश और ओडिशा तक भी पहुंचता है. बड़े शहरों और विशेष बाजारों में इसकी कीमत कई गुना अधिक हो जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां नारायणपुर में यह 150-200 रुपये किलो तक उपलब्ध है, वहीं महानगरों में गुणवत्ता और उपलब्धता के आधार पर इसकी कीमत हजार रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा पहुंच सकती है.
डेंगूर में मिलता है. सुबह सुबह जंगल जाते हैं और लाते हैं. 50 रुपए या 20 रुपए जूड़ी बेचते हैं. शहर में तो बहुत महंगा 800-1000 रुपए किलो में बेचते हैं. यह खाने में बहुत अच्छा लगता है. इसकी बहुत डिमांड है. गांव में तो कम कीमत में मांगते हैं लेकिन शहर में ज्यादा महंगा बिकता है-सोमदेर पोटाई, ग्रामीण
बारिश के दिनों में जंगल में डेंगूर में ये मशरूम निकलता है. मार्केट में बेचते हैं. नारायणपुर के मार्केट में 100 रुपये जोड़ी बेच रहे हैं. शहरों में 1000-1500 रुपये में बिकता है. गोंचा में निकला था, आगे अभी हरेली औऱ रक्षा बंधन में भी निकलेगा -बलराम उइके, ग्रामीण विक्रेता
जंगल से डेंगूर से निकालकर लाते हैं. खाने में अच्छा लगता है. लोग खरीदते हैं. अच्छे मसाले डालकर बनाते हैं तो स्वाद में अच्छा लगता है. बारिश के समय और दशहरा के समय इसे बेचते हैं. शहर में कितने रेट में बिकता है ये पता नहीं- जगदीश, मशरूम विक्रेता
पोषण का खजाना माना जाता है डेंगूर फूटू
विशेषज्ञों के अनुसार टर्मिटोमाइसिस प्रजाति के जंगली मशरूम प्रोटीन, आहार फाइबर, आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और अन्य आवश्यक खनिजों के अच्छे स्रोत माने जाते हैं. इनमें एंटीऑक्सीडेंट और जैव सक्रिय तत्व भी पाए जाते हैं, जिन पर विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययन किए जा चुके हैं. इसी कारण यह केवल स्वाद के लिए ही नहीं बल्कि पोषण के लिहाज से भी अत्यंत महत्वपूर्ण वनोपज माना जाता है.
जंगल से मशरूम आ रहा है. इसे डेंगूर फूटू कहते हैं. ये बारिश के मौसम में ही उपलब्ध होता है. इसके बाद दशहरा फूटू भी आता है, वह सितंबर महीने में आता है. डेंगूर फूटू को सब्जी बनाकर खाते हैं. इसको सुखाकर पाउडर बनाकर रख सकते हैं. इसे चावल के आटे में मिलाकर चीला बनाकर खा सकते हैं. अचार बना सकते हैं. इसका पकौड़ा भी बनता है. नारायणपुर एरिया में जून से स्टार्ट हो गया है और फिलहाल बहुत आवक हो रही है. नारायणपुर में तो कम कीमत में मिलता है, लेकिन शहरों में इसका रेट बहुत ज्यादा है-इंद्र कुमार हेमरो, प्रोग्राम असिस्टेंट, प्लांट पैथॉलजी
बिचौलिए के कारण आदिवासी ग्रामीणों को नहीं मिल पाती अच्छी कीमत
अबूझमाड़ और बस्तर अंचल के अनेक आदिवासी परिवार मानसून के दौरान जंगलों से डेंगूर फूटू का संग्रह कर बाजारों में बेचते हैं. इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त होती है. हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि कई बार स्थानीय बिचौलिए कम कीमत पर मशरूम खरीद लेते हैं और बाद में ऊंचे दामों पर बेचते हैं. यदि संग्रहकर्ताओं को सीधे बाजार उपलब्ध कराया जाए तो उन्हें उनकी मेहनत का बेहतर मूल्य मिल सकता है.
4 जोड़ी 100 रुपये में मिल रहा है. ये लगभग आधा किलो के आसपास है. 200 रुपये किलो खरीद रहा हूं और इसे 350 रुपये किलो में थोक में बेचूंगा. ये अपने आप ही उगता है. डेढ़ से 2 महीने ही मिलता है. उसके बाद नहीं मिलेगा. आज मार्केट में फुटू खरीदने वालों की बहुत भीड़ है-अमित सरकार, थोक सब्जी विक्रेता
डेंगूर फूटू आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने का माध्यम
बस्तर क्षेत्र पर हुए अध्ययनों में भी डेंगूर फूटू को स्थानीय समुदायों की आजीविका से जुड़ा महत्वपूर्ण वन उत्पाद बताया गया है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि डेंगूर फूटू के संग्रह, संरक्षण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग और विपणन की संगठित व्यवस्था विकसित की जाए तो यह बस्तर और अबूझमाड़ के आदिवासी परिवारों की आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है. वनोपज आधारित मूल्य संवर्धन, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और लघु वनोपज समितियों के माध्यम से इसकी बेहतर मार्केटिंग की संभावनाएं भी मौजूद हैं.
अबूझमाड़ के जंगलों से निकलकर नारायणपुर के बाजार तक पहुंचने वाला डेंगूर फूटू केवल एक मौसमी सब्जी नहीं, बल्कि जंगल, आदिवासी जीवन और स्थानीय अर्थव्यवस्था का जीवंत प्रतीक है. सीमित समय के लिए मिलने वाला यह जंगली मशरूम स्वाद और पोषण दोनों का अनूठा संगम है.यदि आदिवासी संग्रहकर्ताओं को उचित बाजार, बेहतर मूल्य और व्यवस्थित विपणन की सुविधा मिले, तो यह वनोपज हजारों परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ-साथ बस्तर की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है.
