राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत जब भी जयपुर से दिल्ली निकलते हैं, पहले ही पूरा बंदोबस्त कर लेते हैं. रणनीति ऐसी सधी होती है कि सारी चीजें वैसे ही होती हैं, जैसा वो तय कर चुके होते हैं. गांधी परिवार के दरबार में हाजिरी लगाने से लेकर मीडिया के सामने आकर बयान देने तक.

अशोक गहलोत पेशेवर जादूगर रहे हैं. जादूगर अपनी कला को चमत्कार नहीं बल्कि हाथ की सफाई बताते हैं – और अशोक गहलोत ने इस बार ऐसा जादू दिखाया कि आलाकमान लंबे अर्से तक ‘हाथ’ की सफाई देखता रहेगा.
सबसे बड़ी बात कि ये बात भी वो अच्छी तरह जानते हैं कि अपनी बात कैसे मनवानी है. ऐसे तौर तरीके अपनाते हैं कि उनकी बात कोई इनकार ही न कर सके. अपनी इसी कला के माध्यम से वो सचिन पायलट को नकारा, गद्दार और पीठ में छुरा भोंकने वाला साबित करते रहे हैं. अशोक गहलोत के खिलाफ लड़ाई में सचिन पायलट ने राहुल गांधी से जमानत तो मंजूर करा ली, लेकिन अशोक गहलोत ने उनके लिए राजस्थान में जो सियासी जेल बना रखा है, वहां से रिहाई होने ही नहीं दी.

