तारा बई घरोघर बूता बनी जावय अउ अपन आगापाली गाँव म तीन घर में बरतन भाड़ा घलो मांजय ओकर घरवाला बाबूलाल गाँव के बाहिर म गुपचुप बेचे के ठेला लगावय ओमन के बेटी लछमीन ह लइकाई ले पढ़े-लिखे म अंगेरही रहय। तभो ले घर के स्थिति ह बने नई होय के कारन दूसर-दूसर के जुन्ना-जुन्ना पुस्तक-कापी ल आधा दाम में बिसाके तारा बई लान देवय अउ लछमीन ओला अब्बड़ परेम से पढ़य पाँच साल के उमर से जब ले ओला बाबूलाल गाँव के सरकारी इसकूल में पढ़े-लिखे बर भरती कर देय रहिस तब ले बारवी के पढ़हत ले जुन्ना किताब ल पढ़के लछमीन अपन कछा म पहिली नम्बर से पास होवत रहिस। दाई-ददा के संग म ओहर अपन गाँव-गोड़ा के नाव ल घलो रोसन करत रहा। मिहनत करोइया मनखे ऊपर भगवान के घलो किरपा दृष्टि ह बरोबर रथे, ताराबई अउ बाबूलाल अपन बेटी ल पढ़ाय खातिर दिन-रात मिहनत करत रहंय तभे ओमन के घर में दू जोर के खाना अउ लछमीन के पढ़हाई खातीर साधन के ठीक-ठवा हो सकय। जइसे विद्यालय से महाविद्यालय में लछमीन ह हबरीस ओसने अपन पढ़ाई-लिखाई म अउ जोरतार मिहनत पूरा लगन से करे लागीस, काबर नानपन ले ही ओहर अपन दाई-ददा ल दू जुआर के रोटी अउ अपन पढ़हाई खातीर ओकर घर ले ओकर घर जाके बुता करत देखत रहय। कइसे बिहनिहा ले संझा के होत ल दाई- ददा मन परिश्रम करत रहंय वो जम्मों ह ओकर आँखी म झूलत रहय। पढ़ाई ल ओको घरी खाली रहितिस त अपन दाई-ददा के स्थिति ल कइसे सुधारे जाय कइके सोंचय अउ अपनो आँखी म कलेक्टर बने के सपना ल बुनत रहय। अपन छेत्र के स्थिति सुधारे खातीर लइकई से ही लछमीन अपन जिला के बड़का अधिकारी बने के सपना ल देखत रहय जी-जान ल लगाके ओकरे खातीर लछमीन दिन-रात अब्बड़ धियान से पढ़त-लिखत रहय। ताराबई अउ बाबूलाल दूनों झन म बाबूलाल ह चौथी पढ़े रहय अउ ताराबाई तो अनपढ़ रहय ओकर बर “करिया आखर भइस बरोबर” रहय। जेकर सेतीक ओमन लछमीन के पढ़ाई म कछु सहयोग नइ कर सकंय। घर के प्रारंभिक स्थिति ह घलो कमजोर होय से लछमीन ल टीवसन घलो पढ़ाय नइ सकत रहंय, तभो ले लछमीन ह कभू अपन मन में उदासी ल नइ आन दय ओहर हांसत-बदन अपन पढ़ाई-लिखाई ल आगू से आगू बढ़त पूरा करत रहय। ओला अपन मिहनत ऊपर पूरा भरोसा रहय अउ भगवान ह एक दिन जरूर सफल करही कइके कहय संग म मिहनत के फल हर अब्बड़ गुरतुर होथे कहिके कहय। जेहर गलत बात नोहय। जइसे लछमीन एम-एस. सी. के परीक्षा ल पहिली नम्बर में पास करिस अधिकारी बने के परीक्षा में बइठिस अउ अपन कठिन मिहनत से वो परीक्षा ल पास करके अपन जिला के जिला अधिकारी के पद में आसीन हो गइस। ताराबाई अउ बाबूलाल के खुसी के कोनों ठिकाना नइ रहिस। ओमन के पारिवारिक स्थिति ह घलो सुधर गय। लछमीन के इमानदारी के कारन ओकर पद परतिस्ठा अउ ओकर काम के प्रति लगनशीलता के जम्मों अंगत चरचा होवत रहय। ओकर भाग ह अइसना चमकत रहय कि ओकर पद ह जल्दी-जल्दी ऊँचा होवत रहय। एकठन अपन दाई-ददा के बेटी होय के कारन अपन दाई-ददा के जम्मों देख-रेख ल करय। ओहर अपन ऊपर जतका किरपा भगवान के मानय ओसने अपन दाई-ददा के आसीरवाद ल घलो मानय। लछमीन के संघर्ष ह ओला भागमानी बना दिहिस। लछमीन जेन अभावहीन स्थिति में मिहनत से पढ़-लिख के अपन दाई-ददा के घर ल रोसन करीस ओहर जम्मों समाज अउ देश के लइका मन बर मिसाल हावय। लछमीन हर अपन घर के गरीबी स्थिति ल अपन पढ़ाई में बाधा बनन नई दिहिस अउ पढ़-लिख के बड़का अधिकारी बनके अपन दाई-ददा के संग म पूरा आगापाली गाँव के “मुड़ ल ऊँचा” कर दिहिस।

*~ डॉ. मनोरमा चन्द्रा ‘रमा’*
*रायपुर (छ.ग.)*
