ग्राम पिनकापार में पेयजल की विकराल समस्या ने आखिरकार ग्रामीणों को लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने मजबूर कर ही दिया। दरअसल गांव में पेयजल समस्या को लेकर एक बैठक रखी गई, जिसमें ग्रामीणों ने एक मत से चुनाव बहिष्कार का निर्णय लिया। निर्णय की जानकारी कलेक्टर को दी गई है। ग्रामीणों ने कहा कि पानी टंकी लगभग बनकर तैयार है लेकिन लोक निर्माण विभाग ने पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त कर दिया है। उन्होंने कहा कि जब तक पाइपलाइन नहीं बिछेगी तो घर-घर जल कैसे दिया जाएगा।
विधायक के निर्देश का नहीं पड़ा कोई फर्क
जनप्रतिनिधि संजीव चौधरी, भूषण मारकंडे, जागृत देवांगन व भूषण यदु ने बताया कि अधिकारियों को बार-बार लिखित में पेयजल संकट की जानकारी देने के बाद भी किसी ने ध्यान नहीं दिया। ग्रामीणों ने विगत दिनों विधायक कुंवर सिंह निषाद को आवेदन देकर समस्या से अवगत कराया था। लेकिन विधायक के निर्देश का विभाग के अधिकारियों पर कोई फर्क नहीं पड़ा। कार्यपालन अभियंता को भी आवेदन दिया गया था। (lok sabha election 2024) लेकिन मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। जिला पंचायत में भी मामला गूंजा था। ग्रामीणों ने कहा कि अब वे भाजपा हो या कांग्रेस चुनाव में किसी का सहयोग नहीं करेंगे।
ठेकेदार नहीं कर रहे हैं काम
ग्राम के पूर्व सरपंच दिलेश्वर भुआर्य एवं इंदू भुआर्य ने बताया कि ग्राम पिनकापार में 2 वर्षों से जल जीवन मिशन के तहत टंकी एवं पाइपलाइन निर्माण का काम ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा है। रेट्रो फिटिंग नल जल योजना के लिए 97.29 लाख की स्वीकृति हुई है। ठेकेदार ने काम छोड़ अधूरा दिया है। इसके पूर्व भी निर्माण की स्थिति अत्यंत धीमी थी। एजेंसी को 9 माह में काम पूर्ण करना था। अधिकारी ठेकेदार को संरक्षण दे रहे हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी योजना जल जीवन मिशन को लेकर विभाग के अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। (lok sabha election 2024) उन्होंने कहा कि जब सड़क किनारे नाली निर्माण के लिए खुदाई की गई थी, उसी समय अगर पाइपलाइन बिछा दी जाती तो ये मुसीबत नहीं देखनी पड़ती।
जबकि लोक निर्माण विभाग ने सड़क के दोनों तरफ नाली खोदते समय पुरानी पाइपलाइन को तोड़ दिया। उसके बाद पीएचई विभाग द्वारा बिछाए गए नए पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त कर उस पर ठेकेदार ने ढलाई कर दी है। अब नई पाइपलाइन बिछाने लोक निर्माण विभाग से अनुमति मांगी जा रही है लेकिन दोनों विभाग के बीच सामंजस्य बन नहीं बन पा रहा है, जिसका खामियाजा गांव वालों को भुगतना पड़ रहा है।

