

अभी तक आपने तमाम जंगलों की कहानियां सुनी होंगी. लेकिन क्या ऐसे जंगल के बारे में जानते हैं, तो रात के समय जगमगाता हो. महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में मौजूद भीमाशंकर वाइल्डलाइफ रिजर्व ऐसी ही जगह है, जहां आपको कुछ न कुछ नया देखने को मिलता रहेगा. दिन के समय इसकी खूबसूरती पर्यटकों को खूब आकर्षित करती है.बता दें कि रात का नजारा तो यहां देखने लायक होता है. यहां जुगनुओं की रोशनी नहीं बल्कि पौधे भी चमकते हैं. खासतौर पर मानसून की बारिश शुरू होने के साथ ही इस जंगल की चमक कई गुना बढ़ जाती है. तो आप भी अगर महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में घूमने का प्लान बनाने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं इस जगह के बारे में.
जादुई दुनिया जैसा
मानसून के समय में यहां एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है. रात के समय ये जंगल किसी जादुई दुनिया जैसा लगता है. किसी पेड़ के तने तो कहीं झाड़ के बीच में और कहीं पेड़ से झड़ कर गिरने वाले पत्तों के ढेर के बीच हल्की चमक देखकर आप भी हैरान रह जाएंगे. लेकिन आखिर इस जंगल में ऐसा क्या है कि जो ये रात के समय जगमगाता है? क्या ये किसी जादुई दुनिया का हिस्सा है?
चमकती है मशरूम
दरअसल, इस जंगल में कोई जादू-टोने वाली बात नहीं है. रात के अंधेरे में भीमाशंकर वाइल्फलाइफ रिजर्व के चमकने की वजह माइसेना फंगस है. ये एक तरह की मशरूम है, जिसे कई बार लोग काई समझ लेते हैं. इस जंगल में यही मशरूम रात के अंधेरे में मिट्टी और पत्तों के ढेर के बीच चमकती दिखाई देती है.
कैसे चमकती है
बता दें कि ये मशरूम ल्यूसिफरेज नाम का एक खास किस्म का एंजाइम का उत्पादन करती है. जब यह लकड़ी में मौजूद ल्यूसिफरिन के संपर्क में आती है, तो चमकना शुरू कर देती है. ल्यूसिफरिन एक प्रकाश उत्सर्जक कंपाउंड माना जाता है.
इन दोनों तत्वों के केमिकल रिएक्शन के कारण ही बायोलुमिनसेंट चमक पैदा होती है. बता दें कि भीमाशंकर रिजर्व में दुनियाभर के जंगलों के मुकाबले बायोलुमिनसेंट सबसे ज्यादा पाए जाते हैं. अगर आप यहां जाने का प्लान बना रहे हैं तो जुलाई से सितंबर के बीच में भीमाशंकर वाइल्डलाइफ रिजर्व जाने का प्लान बनाएं.
