

प्रदेश सरकार अधिकारियों और कर्मचारियों की लापरवाही को लेकर सख्त हो गई है। इसे लेकर अधिकारियों और कर्मचारियों में बेचैनी बढ़ गई है। संकेत मिल रहे हैं कि लापरवाह अफसरों को लेकर सरकार लोकसभा चुनाव के नतीजों के बाद बड़े फेरबदल कर सकती है। वहीं दूसरी ओर वित्त विभाग भी सरकारी खर्चों पर लगाम कसने के लिए एक के बाद एक नए आदेश जारी कर रहा है। इसका असर सरकारी अमलों में साफ दिखाई दे रहा है। सूत्रों का कहना है कि इस बार सरकार तबादला नीति जारी करने से पहले ही थोक में तबादले करने की तैयारी में है। अधिकारी-कर्मचारियों को भी इसकी भनक लग गई है और वे भी राजनेताओं की शरण में पहुंच रहे हैं।
सरकारी दफ्तरों में लंबे समय तक बिना किसी पूर्व सूचना के गायब रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर अब सख्ती होगी। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागाें को रिमाइंडर भेजा है। साथ ही इस बात की भी हिदायत दी है कि सभी विभाग तत्काल इसकी समीक्षा करें और अनाधिकृत रूप से गायब रहने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई करें। सामान्य प्रशासन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया गया है कि ऐसे शासकीय सेवक, जो अनाधिकृत रूप से गायब रहते हैं, उनकी विभागीय जांच के दौरान निलंबित रखना जरूरी नहीं है। यदि ऐसा होता है, तो संबंधित शासकीय कर्मचारी निलंबन भत्ते आदि की मांग करते हैं।
तय होगी कार्यालय प्रमुख की जिम्मेदारी
एक माह से अधिक अवधि तक गायब रहने वाले शासकीय सेवकों को कार्रवाई करने से पहले कारण बताओ नोटिस भेजा जाएगा। संतोषजनक जवाब नहीं आने पर नियमानुसार सख्ती कार्रवाई की जाएगी। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देश के अनुसार कार्रवाई नहीं करने पर कार्यालय प्रमुख की जिम्मेदारी तय की जाएगी।
सरकार बदलने के बाद यह सख्ती
कोई भी विभाग अपनी मनमर्जी के अनुसार भर्ती नियम में बदलाव नहीं कर सकेगा। इसके लिए बकायदा सामान्य प्रशासन विभाग और विधि विभाग की सलाह ली जाएगी।
यदि किसी अफसर के पास एक से अधिक विभाग है, तो संबंधित के निवास पर केवल एक दूरभाष लगेगा। इसका खर्च शासन की तय सीमा के अनुसार होगा।
प्रदेश के शासकीय अधिकारी-कर्मचारी कार्य क्षेत्र के बाहर घूमने-फिरने के लिए शासकीय वाहन का उपयोग नहीं कर पाएंगे। विशेष परििस्थति में अनुमति मिलने के बाद ही कार्य क्षेत्र से बाहर शासकीय वाहनों को ले जा सकेंगे।
अधिकारी अपने लिए मनमर्जी से शासकीय वाहन नहीं खरीद सकेंगे। इसके लिए अफसरों के रैंक के हिसाब से राशि तय की गई है। अब 8.50 लाख से 12 लाख तक के वाहन ही खरीद सकेंगे।
सरकारी दौरे के दौरान यदि अफसर अपने रिश्तेदार के यहां ठहरेंगे, तो उन्हें शासन की ओर से तय भत्ता नहीं मिलेगा।
