लोरमी. मुंगेली जिले के लोरमी में एक निजी अस्पताल में 7 वर्षीय आदिवासी मासूम बच्चे की मौत का मामला सामने आया है. दरअसल निजी अस्पताल में इलाज के अभाव के चलते भोले भाले मरीजों की जाने जा रही है. इस पूरे मामले में कुछ दिनों पहले ही अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई थी. बावजूद इसके खुलेआम नियम विरुद्ध निजी अस्पताल का संचालन किया जा रहा है. वहीं घटना की जांच के लिए एसडीएम ने स्वास्थ्य विभाग को निर्देशित किया है.

दरअसल यह घटना 1 नवम्बर की बताई जा रही है, जहां लोरमी तहसील अंतर्गत मोहबंधा गांव के आश्रित गांव बांधी निवासी ओंकार गोंड रात करीब 11 बजे मस्तिष्क ज्वर (झटके) से पीड़ित अपने बेटे 7 वर्षीय धनंजय को 50 बिस्तर सामुदायिक अस्पताल में भर्ती कराया. प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए आधे घंटे बाद जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया. निजी एम्बुलेंस के दलालों ने कम खर्च में बेहतर इलाज का झांसा देकर बच्चे को बुध केयर हॉस्पिटल में एडमिट करने कहा तो परिजनों ने बच्चे को निजी एम्बुलेंस की मदद से निजी अस्पताल में एडमिट कर दिया, जहां बच्चे का समय पर उपचार नहीं होने एवं चाइल्ड विशेषज्ञ चिकित्सीय व्यवस्था नहीं होने के अभाव में मासूम की जान चली गई.
इस मामले काे लेकर मोहबंधा गांव के आश्रित गांव बांधी के सरपंच प्रतनिधि हेमपाल मरावी ने बताया कि घटना के दिन अस्पताल में भर्ती के पहले निजी अस्पताल के स्टाफ से अस्पताल में भर्ती करने को लेकर जाने समय बहस भी हुआ है. बावजूद इसके निजी अस्पताल के स्टाफ ने मनमानी करते हुए उन्हें निजी एंबुलेंस में निजी अस्पताल बुध केयर लेकर चले गए, जहां पर मौके पर कोई भी चाइल्ड रोग के विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद नहीं थे. सरपंच प्रतिनिधि हेमपाल सिंह ने कहा कि मामले को अस्पताल प्रबंधन दबाना चाहती है. आदिवासियों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग की है.
