बिलासपुर। नगर निगम की सीमा का विस्तार तो कर दिया गया। देवरीखुर्द को वार्ड नंबर 42 व 43 वार्ड बनाएं गए हैं, लेकिन यहां विकास कार्य नहीं हुआ। अब तीन साल होने के बाद भी इन क्षेत्रों के रहवासी मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। जहां नाली, पानी, बिजली, सफाई जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। अब नगर पंचायत नहीं रही और नगर निगम ध्यान नहीं दे रहा है। अब रहवासी कलेक्टर सौरभ कुमार के पास पहुंच रहे हैं और मूलभूत सुविधा की मांग कर रहे हैं।
शहर से लगा हुआ देवरीखुर्द पहले ग्राम पंचायत हुआ करता था। लेकिन बिलासपुर नगर निगम सीमा का विस्तार के दौरान इसे नगरीय निकाय क्षेत्र में शामिल कर लिया गया है। उस समय दावा किया गया कि जितने भी क्षेत्र निगम सीमा क्षेत्र में शामिल हो रहे हैं, उनका चहुंमुखी विकास होगा। जहां पर हर तरह की सुविधाएं हाेंगी। लेकिन इस बात को तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक क्षेत्र का विकास नहीं हुआव है। आलम यह है कि लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित चल रहे हैं।
हर दिन नहीं होता डोर टू डोर कचरा कलेक्शन
वार्ड में डोर टू डोर कचरा कलेक्शन चालू किया गया है। लेकिन इसके लिए पर्याप्त कचरा गाड़ी नहीं है। ऐसे में क्षेत्र में एक दिन के अंतर परडोर टू डोर कचरा उठाया जाता है। नियमित घरों से कचरा का उठान नहीं होने से रहवासियों को कचरा नालियों व बाहरी स्थान में फेंकने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसकी वजह से वार्ड के कई हिस्सों में काफी गंदगी बनी हुई है। इसका उठाव भी समय पर नहीं हो रहा है
कच्ची नालियों ने बढ़ाई परेशानी
वार्ड में सबसे ज्यादा पानी की समस्या है। सड़क के दोनों ओर पक्की नाली नहीं बन पाई है। जबकि पूरे क्षेत्र का दूषित पानी इस कच्ची नाली में आकर मिलता है। निकासी की सही व्यवस्था नहीं होने से सालभर कच्ची नाली ओवरफ्लो करती है और यह पानी क्षेत्र में फैलता रहता है। इसी वजह से यह क्षेत्र जलजनित बीमारियों के लिए संवेदनशील बना हुआ है और हर साल डायरिया, पीलिया जैसे मामले भी क्षेत्र में आते हैं। डायरिया का प्रकोप तो सालभर बना रहता है।
