जगदलपुर: बीजापुर जिले के भैरमगढ़ कैंप में रह रहीं नक्सल पीड़ित महिलाओं ने प्राकृतिक गुलाल तैयार किया है। इससे उन्होंने ना केवल अपनी आर्थिक ताकत बढ़ाई है, बल्कि पर्यावरण को सुरक्षित रखने का संदेश भी दिया है। प्रशासन ने इन महिलाओं के इस प्रयास को पंख देते हुए जिले के सभी विभागीय कार्यालयों में इनके गुलाल के स्टॉल लगाने की पहल शुरू की है।
मां दुर्गा स्व सहायता समूह इतामपार की महिलाओं ने पारंपरिक ज्ञान का उपयोग करते हुए फूलों और अन्य प्राकृतिक चीजों से गुलाल तैयार किया है। यह समूह भैरमगढ़ शिविर में रह रही उन महिलाओं का है, जिन्हें नक्सल हिंसा के कारण अपने गांव छोड़ने पड़े थे। शिविर में रह रही समूह की अध्यक्ष फगनी कोवासी बताती हैं कि जब हमें गांव छोड़ना पड़ा, तो लगा जिंदगी खत्म हो गई। लेकिन अब यह समूह हमारी ताकत बना है।
होली का यह रंग हमारे जीवन में भी रंग भरेगा यही उम्मीद है। समूह की सचिव अनिता कर्मा बताती हैं कि हमने सोचा कि क्यों न होली के रंग भी प्रकृति के रंगों से बनाए जाएं। यह सेहत के लिए सुरक्षित है और हमारे लिए आय का जरिया भी बना।
प्रशासन ने की महिलाओं की मदद
Bastariya Gulal: मुख्य कार्यपालन अधिकारी पुनीत राम साहू कहते हैं कि यह पहल महिला सशक्तीकरण और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक ट्रायल है। बीजापुर प्रशासन ने इन महिलाओं के हौसले को सराहते हुए उनके उत्पाद को बढ़ावा देने का फैसला किया है। अधिकारियों और कर्मचारियों से इसे खरीदने की अपील की गई है। इसे लिए बीजापुर जिला मुख्यालय में कई स्थानों पर स्टॉल लगाए गए हैं।








