धमतरी : छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्कूल भवनों की हालत बेहद खराब है. नए शिक्षण सत्र की शुरुआत हो चुकी है.ऐसे में अभिभावकों को उम्मीद थी कि वो जिस स्कूल में अपने नौनिहालों को भेजेंगे, वहां उनका आने वाला कल संवरेगा. लेकिन धमतरी के कुछ स्कूल अब इतिहास बनने को है. क्योंकि इन स्कूलों की हालत इतनी खराब है कि कभी भी कोई गंभीर दुर्घटना हो सकती है. स्कूल में अपने बच्चों को भेजने वाले पालक जर्जर भवन को सुधारने के लिए कई बार अधिकारियों को आवेदन दे चुके हैं. लेकिन अब तक किसी के कान में भी जूं तक नहीं रेंगी. इन स्कूलों की हालत कैसी है इस बात की रियलटी चेक करने के लिए मौके पर ईटीवी भारत की टीम पहुंची.

स्कूल भवन खस्ताहाल : ईटीवी भारत संवाददाता अभिषेक मिश्रा ने धमतरी के छाती गांव के स्कूल का रियलिटी चेक करने पहुंचे. जहां पिछले कई साल से नए स्कूल बिल्डिंग की मांग की जा रही है. लेकिन ना बिल्डिंग मिली और ना ही स्कूल की मरम्मत के लिए किसी ने कोई कदम उठाया. बच्चे जर्जर भवन में खतरा होने से अतिरिक्त कक्षा में बैठकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं. इस बात से शिक्षा विभाग के आंकड़े भी बताते हैं कि स्कूलों की स्थिति क्या है.जिले की यदि बात करें तो करीब 60 स्कूलों की हालत जर्जर है.
2008 में बना था भवन : धमतरी के छाती स्थित शासकीय नवीन प्राथमिक शाला का भवन साल 2008 में बना था. लेकिन अब 17 साल बाद इस स्कूल की हालत जर्जर हो चुकी है. स्कूल की छतों से पानी टपकता है, जगह-जगह दरारें आ गई है. यहां के शिक्षक बताते हैं कि बच्चों की सुरक्षा के मद्देनजर अब अतिरिक्त क्लास रूम में पढ़ाई करवाई जा रही है. सभी क्लॉस के बच्चे एक साथ बैठते हैं. इससे पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. कमरे के दोनों ओर ब्लैक बोर्ड और अलग-अलग कतारों में बैठाकर बच्चों को पढ़ाया जा रहा है.जिससे बच्चों का ध्यान भंग होता है.
एक क्लास रूम में तीन कक्षाओं का संचालन
एक क्लास रूम में कई कक्षाएं संचालित : स्कूल के प्राचार्य ने भी माना कि स्कूल की स्थिति के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है. स्कूल भवन काफी जर्जर स्थिति में है. छतों से पानी टपकता है. तीन कक्षाओं के बच्चों को एक ही क्लास रूम में बैठाया जाता है. जिससे पठन-पाठन में काफी दिक्कतें होती हैं. काफी शोर शराबा होता है. अलग-अलग कक्षाओं के टीचर एक ही क्लास रूम में अपने-अपने क्लास के बच्चों को अध्ययन करवाते हैं.
पिछले 5 साल से ये समस्या बनी हुई है. पंचायत से लेकर कलेक्टोरेट तक इस समस्या को लेकर आवेदन दिया गया है. स्कूल में कक्षा पहली से पांचवी तक 81 दर्ज संख्या है. इस स्कूल में शिक्षक की व्यवस्था तो ठीक है, लेकिन स्कूल ही जर्जर है. जिससे पढ़ाई पर व्यवधान हो रहा है- दिनेश कुमार कोशरिया, प्राचार्य
शिक्षिका उपासना शर्मा ने बताया कि दूसरी क्लास से लेकर चौथी तक के बच्चों को एक ही क्लास रूम पर बैठाया जाता है,लेकिन पहली और पांचवी क्लास के बच्चों को ऑफिस रूम में बैठाया जाता है.
एक ही क्लास रूम में तीन-तीन कक्षाओं का संचालन हो रहा है.जिसके कारण बच्चों को पढ़ाने में परेशानी हो रही है. क्योंकि एक साथ जब तीन टीचर पढ़ाई कराते हैं तो शोर ज्यादा होता है.इससे डिस्टर्ब होता है.हमने इस बारे में जनदर्शन से लेकर कलेक्टर तक से गुहार लगाई है कि जल्द से जल्द हमें शाला भवन मिले.बच्चों के भविष्य का सवाल है इसलिए पढ़ाई को रोका नहीं जा रहा है.हम सरकार से मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द स्कूल भवन का इंतजाम करें- उपासना शर्मा, शिक्षिका
वहीं इस बारे में जब जिला शिक्षाधिकारी से सवाल पूछा गया तो उन्होंने भी माना कि जिले में कई स्कूल भवन जर्जर हालत में है. लेकिन किसी भी स्कूल में पढ़ाई प्रभावित नहीं हो रही है.
हमने जिले में ऐसे 60 भवनों को चिन्हांकित किया है.जिन्हें डिसमेंटल किया जाएगा.ये बात सत्य नहीं है कि भवन के कारण पढ़ाई प्रभावित हो रही है. जिले में 60 स्कूल भवन जर्जर हैं. शासन स्तर पर इस समस्या को भेज दिया गया है.आने वाले दिनों में इन्हें डिसमेंटल करने के बाद नया भवन बनाया जाएगा – टीआर जगदल्ले, जिला शिक्षा अधिकारी
जिला शिक्षाधिकारी ने अब इस मामले में जल्द ही भवनों को दुरुस्त करने की बात कही है.लेकिन सवाल ये है कि जो स्कूल भवन पिछले 5 साल में दुरुस्त नहीं हो पाया वो क्या अबकी बार ठीक हो जाएगा.फिलहाल जब तक छाती विद्यालय को नया भवन नहीं मिलता तब तक एक क्लास तीन कक्षा वाली व्यवस्था पर ही शिक्षकों को काम चलाना होगा.
