जांजगीर-चांपा। जांजगीर-चांपा जिले में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। खोखसा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव में अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से जिस हितग्राही के नाम पर पीएम आवास स्वीकृत हुआ था, उसकी राशि उसी नाम के दूसरे व्यक्ति के खाते में ट्रांसफर कर दी गई। असली लाभार्थी अब पक्के मकान की स्वीकृत राशि के लिए जिला पंचायत कार्यालय के चक्कर काट रहा है। विभागीय अधिकारियों से शिकायत के बाद अब उसने कलेक्टर से गुहार लगाई है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

वैसे तो शासकीय रिकॉर्ड में खोखसा ग्राम पंचायत के आश्रित गांव खैरा निवासी इतवारी दास को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तीन किस्तें जारी हो चुकी हैं, लेकिन उसका मकान आज भी कच्चा ही है। कारण जानकर आप हैरान हो जाएंगे। जी हां, इतवारी दास का नाम एक साल पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए चयनित हुआ था, लेकिन उसकी राशि खोखसा गांव के ही ‘इतवारी’ नाम के एक अन्य व्यक्ति के खाते में भेज दी गई।
पहली किस्त जारी होने के बाद, उसी इतवारी दास के नाम पर निर्माणाधीन आवास की तीन बार जियो टैगिंग भी कर दी गई। इसमें पहली किस्त 12 सितंबर 2024 को 40,000 रुपये, दूसरी किस्त 1 जून 2025 को और तीसरी किस्त 2 जुलाई 2025 को जारी कर दी गई और पूरी राशि भी निकाल ली गई। अपने नाम से स्वीकृत आवास की जानकारी लेने जब वास्तविक हितग्राही जनपद पंचायत नवागढ़ जाकर पूछताछ की, तब इस भ्रष्टाचार का खुलासा हुआ। अब इतवारी दास सरकार की योजना से वंचित करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर से गुहार लगा रहा है।
