रायपुर : छत्तीसगढ़ अपने स्थापना की 25वीं सालगिरह मना रहा है. इसे लेकर तैयारियां जोरों पर है. इस बार 1 नवंबर को आयोजित होने वाले कार्यक्रम में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आने वाले हैं. देश के जंगल आच्छादित क्षेत्र में छत्तीसगढ़ प्रमुख स्थान रखता है. हरियाली प्रदेश की बड़ी पहचान है. छत्तीसगढ़ में आने वाले समय में विकास के क्या मायने हरियाली वाले प्रदेश से निकलेगा, इसे लेकर छत्तीसगढ़ के छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने ईटीवी से खास बात की. केदार कश्यप ने कहा कि जिस उद्देश्य से छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना अटल बिहारी वाजपेयी ने की थी और जिस विकास को उन्होंने सोचा था छत्तीसगढ़ अब विकास के इस सफर पर चल पड़ा है.

25 साल का छत्तीसगढ़ अपने पैरों पर खड़ा होता छत्तीसगढ़. छत्तीसगढ़ को आप कहां देख रहे हैं?
जिन उद्देश्यों को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना की थी. उसमें अशिक्षा, स्वास्थ्य और बीमारू राज्य के रूप में छत्तीसगढ़ को जाना जाता था. लेकिन उनके सपनों के अनुरूप अब राज्य लगातार आगे बढ़ रहा है और ऊंचाइयों को प्राप्त कर रहा है. छत्तीसगढ़ के राज्य बनने के साथ जितने राज्य बने उनकी तुलना छत्तीसगढ़ से किया जाए तो चाहे स्वास्थ्य का क्षेत्र हो, सड़क का क्षेत्र हो, कृषि का क्षेत्र हो, अधोसंरचना का क्षेत्र हो, सब कुछ यहां तेजी से हो रहा है.जो लोग आज से 25 साल पहले छत्तीसगढ़ आए थे और आज छत्तीसगढ़ के उन क्षेत्रों में जा रहे हैं वो देखकर आश्चर्यचकित हो जाते हैं. जितना निर्माण हुआ है जितना इसको व्यवस्थित किया गया है वह मन को प्रसन्नता देने वाला है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ जो नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता था उससे हमें मुक्ति मिल रही है. हमारे गृहमंत्री अमित शाह ने जो भीष्म प्रतिज्ञा ली थी उसके अनुसार अब यहां बदलाव हो रहा है.
छत्तीसगढ़ में जंगल बहुत है लेकिन जंगल विवादों में भी बहुत है इसे लेकर क्या कहेंगे ?
छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री ने कहा कि हमारे पास जो फॉरेस्ट एरिया है वह देश का तीसरा बड़ा एरिया है. करीब 44.10 फीसदी हमारे पास जंगल हैं. 60 हजार स्क्वॉयर किलोमीटर हमारा एरिया है. स्वाभाविक है हमारा छत्तीसगढ़ वनाच्छादित है, कृषि की दृष्टि से खनिज संपदा को लेकर हम एक अलग स्थान रखते हैं. प्रचुर मात्रा में हमारे पास अलग-अलग प्रकार के खनिज हैं. यदि हम उन खनिज को सही तरीके से राज्यहित में दोहन करेंगे तो निश्चित मानिए छत्तीसगढ़ राज्य हर दृष्टि से आगे बढ़ेगा. मान लीजिए उन क्षेत्रों में भी हम खनिज का उत्खनन करते हैं तो वहां पर भी हम लोग पेड़ लगाएंगे और पेड़ लगा रहे हैं.
कुछ पर्यावरणविद का कहना है कि जितना हरा भरा छत्तीसगढ़ मिला था अब उतना छत्तीसगढ़ नहीं रह गया है.
हम लोग लगातार इस पर काम कर रहे हैं. जो हमारा वन क्षेत्र है उसमें लगातार हम लोग पेड़ लगा रहे हैं. हम लोग फॉरेस्ट के साथ किसी तरह का कोई कंप्रोमाइज नहीं कर रहे हैं. छत्तीसगढ़ देश का ऑक्सीजन जोन है. इस क्षेत्र के वनों का ज्यादा से ज्यादा हरा भरा रखें और उसका बचाव कर सके उसका संरक्षण संवर्धन कर सकें जो भी कार्य कर रहे हैं उसे किया जा रहा है.
बस्तर बहुत बड़ी चुनौती है. नक्सलवाद को खत्म करने का जो समय आपने रखा है वह धीरे-धीरे नजदीक पहुंच रहा है. विकास को जिस तरीके से आप लोगों ने रखा है वह अब कितनी चुनौती भरा है. यह कितने सहज तरीके से हो पाएगा ?
छत्तीसगढ़ के वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि बस्तर को हम लोगों ने काफी करीब से देखा है. मेरा यदि व्यक्तिगत तौर पर देखा जाए तो मेरा घर ही बस्तर है. एक समय तो ऐसा था कि बहुत सारे ऐसे क्षेत्र थे जो पहले छत्तीसगढ़ या हमारे राज्य का जुड़ना पसंद नहीं करते थे. उनकी मांग होती थी कि उन्हें महाराष्ट्र के आंध्र से जोड़ा जाए. ऐसी आवाज उठाती थी. लेकिन सरकार की योजना की पहुंच, स्वास्थ्य की दृष्टि से, शिक्षा की दृष्टि से, रोड कनेक्टिविटी की दृष्टि से, नेट कनेक्टिविटी की दृष्टि से, एयर कनेक्टिविटी की दृष्टि से हर क्षेत्र में बस्तर आगे आ रहा है.
बस्तर में अपार संभावनाएं हैं. लोग बस्तर को जिस परिपेक्ष्य में देखा करते थे उनका भी दृष्टिकोण परिवर्तित हुआ है.आने वाले समय में पूरा बस्तर पूरा छत्तीसगढ़ नक्सलवाद से मुक्ति की ओर बढ़ रहा है. उन क्षेत्रों में जहां कभी सड़कें नहीं बनी थी वह क्षेत्र जो हमारे राज्य के साथ कनेक्ट नहीं हुआ था वह क्षेत्र भी जुड़ते जा रहे हैं. उन क्षेत्रों में बहुत सारी सुविधाएं भी पहुंच रही हैं.लोगों को देखकर के भी अच्छा लग रहा है.
बस्तर के विकास के लिए अभी कितना काम करना बाकी रह गया है. आपको क्या लगता है कि बस्तर के विकास को आगे जाने में कौन-कौन सी चुनौतियां हैं, क्योंकि बस्तर आपका घर है बस्तर के आप रहने वाले हैं ?
बस्तर मेरा घर है और माटी के प्रति जो कर्ज है उसको चुकाने का लगातार हम काम कर रहे हैं. लगातार वहां के हितों के लिए लड़ाई लड़ी है. चाहे वह जंगल जमीन का मामला हो पट्टे का मामला हो, सुविधा विस्तार का मामला हो या फिर शिक्षा के लिए हो. केदार कश्यप ने कहा कि आज बड़ी खुशी होती है कि पहले जहां पर सड़क नहीं होती थी वहां सड़कें बन रही हैं. पहली बार हमारी सरकार में ही जगदलपुर में मेडिकल कॉलेज बना. कांकेर में मेडिकल कॉलेज बना. अब नए मेडिकल कॉलेज भी बना रहे हैं. कॉलेज की दृष्टि से, स्वास्थ्य की दृष्टि से, सड़कों की दृष्टि से लगातार हम आगे बढ़ रहे हैं.
जिन चीजों के लिए हम लड़ाई लड़ते थे वह सारी चीज अब लोगों तक पहुंच रही है. पहले बस्तर में हमारे जो वनवासी बंधु हैं वह गरीबों की हालत में थे उनके पास चावल नहीं होता था. हम भोजन के लिए चावल देने का काम किए हैं. नमक के लिए वनोपज को दे दिया करते थे हम लोग लगातार उस पर काम कर रहे हैं. पूरी दुनिया बस्तर को देखना चाहती है. जानना चाहती है कि बस्तर के लोग कैसे हैं. बस्तर में ऐसा प्राकृतिक क्या संसाधन मौजूद है जहां पर जाकर प्राकृतिक छटा को निहार सके. उन सब चीजों को बाहर लाने का काम उन सब चीजों तक एप्रोचेबल बनाने का काम हमारी सरकार कर रही है. हमें उम्मीद है कि नक्सलवाद के खात्मे के बाद बस्तर एक नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा.
25 साल का युवा बस्तर अपने पैरों पर खड़ा होने के लिए तैयार है बस्तर को मुख्यधारा से जुड़ने में कितना समय लग जाएगा ?
पहले नक्सलवाद के कारण हम जिस क्षेत्र में काम करते थे वहां दिक्कत आती थी. अगर हम स्कूल बनाते थे वहां दिक्कत आती थी. हम सड़क बनाने का काम करते थे लेकिन नक्सली के नाते नहीं हो पता था. कई ऐसी सड़कें हैं जिन्हें बनाने में हमारे बहुत जवान शहीद हुए हैं.जगदलपुर से दंतेवाड़ा की सड़क हो दंतेवाड़ा से लेकर भोपालपट्टनम तक की सड़क हो या फिर अबूझमाड़ की सड़क हो तो यह सड़क हमारे जवानों के शहादत के बाद मिली है और उन क्षेत्रों में जो डेवलपमेंट होना था नहीं हो पाया अब उन क्षेत्रों में भी हमारे लोग काम कर रहे हैं .शिक्षा के क्षेत्र के साथ ही हर क्षेत्र की दृष्टि से लोग काम कर रहे हैं. सरकार की योजना हम समय के साथ उन क्षेत्रों में लेकर जा रहे हैं. मैं समय सीमा की बात नहीं कर रहा हूं लेकिन जिस तरीके से उन क्षेत्रों में सरकार की पहुंच बढ़ रही है वह मनोबल को दर्शाता है. जिन क्षेत्रों में लोगों को जाने से डर लगता था आज माहौल बदला है.
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कांग्रेस का कहना है कि आदिवासी मुख्यमंत्री, आदिवासी राज्य आदिवासियों की राजनीति लेकिन आप आदिवासी दिवस नहीं मानते ?
जिन लोगों ने आदिवासियों को उपयोग की वस्तु बना रखा था उन लोगों को आदिवासियों के बारे में कुछ भी कहने का कोई हक नहीं है. आज देश में उपराष्ट्रपति आदिवासी से आते हैं और यह काम बीजेपी ने किया है. यही कांग्रेस के लोग हैं जिन लोगों ने आदिवासियों के चेहरे पर कालिख लगाने काम किया. हमारे राज्य ने आदिवासी मुख्यमंत्री दिया,ओडिशा को भी आदिवासी मुख्यमंत्री दिया. लेकिन कांग्रेस ने क्या किया,आदिवासी के नाम पर छल किया. हम आदिवासियों का मान सम्मान गौरव हर तरीके से सहेजने के लिए तत्पर हैं. पिछली सरकार में जिस तरीके से आदिवासी समाज का अवैध धर्मांतरण, जिस तरह की घटनाएं सामने आई और उसके बीच में कांग्रेस के लोगों ने उनके मुखिया ने आदिवासी समाज के लोगों को सरेआम पीटने का काम किया. फिर उनके प्रशासन तंत्र के लोगों द्वारा परेशान करने का काम किया गया ये सभी को पता है.
आप पर आरोप है कि सब कुछ आपको मिला, गौरव दिवस की बात करते हैं, सांस्कृतिक विरासत की बात करते हैं, आदिवासी धरोहर की बात करते हैं लेकिन आदिवासी दिवस नहीं मानते ऐसा क्या हो गया?
जिस दिन विश्व आदिवासी दिवस था उसी दिन रक्षाबंधन था. रक्षाबंधन के चलते सभी हमारे मुख्यमंत्री सहित तमाम लोग व्यस्त थे .क्योंकि मेरे घर घटना घटी थी तो मैं अलग था . लेकिन बाकी सभी लोग अपने काम में थे. लेकिन आदिवासियों की चिंता करना और यह सबसे बड़ी बात है जहां तक यदि मैं कहूं विश्व आदिवासी दिवस की अवधारणा कब बनी और कौन लोग थे, जो आदिवासी समाज को प्रताड़ित करने का काम किया. आज यदि 500 साल के बाद उन्हें याद आता है कि आदिवासी दिवस मनाना है.
25 साल का छत्तीसगढ़ – अब रोड मैप की बात करें तो आपके सामने एक तारीख 2031 रख दिया गया है. केदार कश्यप कैसे देखते हैं इसे जो अमित शाह के सपनों का छत्तीसगढ़ बन सकता है ?
जो पैरामीटर हमारे यहां पर देश के माननीय प्रधानमंत्री और गृहमंत्री अमित शाह जी ने रखा है और लगातार इस पर छत्तीसगढ़ में काम हो रहा है. छत्तीसगढ़ मापदंडों पर खरा उतर रहा है ,लक्ष्य को प्राप्त भी कर रहा है. हमें पूर्ण विश्वास है कि हर क्षेत्र में हम आगे आएंगे. सर्विस सेक्टर में भी हम आगे आएंगे, शिक्षा हो, चाहे स्वस्थ हो, सड़कों की दृष्टि से आगे आ रहा है. वन उपज की दृष्टि से हमरा छत्तीसगढ़ बहुत आगे है. जो हमारे यहां के लोगों की संस्कृति है और संस्कृति को आगे ले जाने का काम भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने किया है . आज हमारा राज्य उन ऊंचाइयों को प्राप्त किया है. 2047 तक हमारा जीएसडीपी बढ़ाना चाहिए और उन उद्देश्यों को लेकर हमारी सरकार काम कर रही है.जल्द ही हम उसे लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे. 2047 तक 10 लाख तक हमारा जीएसडीपी पहुंचेगी. यहां का युवा, यहां की महिला हर क्षेत्र में अपना स्थान रखें यह सरकार की कोशिश है और इस क्षेत्र में लगातार काम भी हो रहा है.
