बालोद: गुण्डरदेही विधानसभा क्षेत्र के ग्राम परसाडीह के किसान बेमौसम बारिश और फसलों में लगी बीमारी की वजह से काफी परेशान हैं. ग्राम परसाडीह के किसानों का कहना है कि बेमौसम बारिश और फसलों में लगी बीमारी ने इस साल उनकी कमर तोड़ दी है. फसल में डाली गई दवा का कोई असर उनके खेतों में नहीं हुआ. नतीजा ये हुआ कि उनकी फसल पूरी तरह से चौपट हो गई. लोग बताते हैं कि गांव के ज्यादातर किसानों की फसल खराब हो चुकी है. गांव वालों की मानें तो करीब 500 एकड़ में लगी धान की फसल बर्बादी की भेंट चढ़ गई है. किसानों को लाखों का नुकसान हुआ है.

500 एकड़ में लगी फसल खराब: किसानों का कहना है कि लगातार हो रही बारिश फसलों में लगी बीमारी की वजह से उनकी फसल खेतों में खराब हो गई है. सबसे ज्यादा नुकसान छोटे किसानों का हुआ है. 15 नवंबर से शासन पूरे प्रदेश में धान खरीदी की शुरुआत कर रही है. धान खरीदी की शुरुआत से पहले ही किसानों को भारी नुकसान बालोद में झेलना पड़ा है.
इलाके के किसानों ने इस बार करीब 1 हजार एकड़ में धान की फसल बोई है. बैमौसम हुई बारिश फसलों में लगी बीमारी की वजह से करीब 500 एकड़ में खड़ी बर्बाद गई है. हम किसान चाहते हैं कि किसानों को उचित मुआवजा बर्बाद हुए फसल की दी जाए. सबसे ज्यादा नुकसान छोटे किसानों का हुआ है. छोटे किसानों को अगर उचित समय पर मदद नहीं मिली तो वो कर्ज के दलदल में फंस जाएंगे: गोपाल साहू, किसान, ग्राम परसाडीह
कर्ज लेकर कई किसानों ने लगाई है फसल: किसान गोपाल साहू ने रोते हुए बताया कि उन्होंने कर्ज लेकर फसल तैयार की, लेकिन बीमारी और मौसम ने सारी मेहनत चौपट कर दी. गांव के कई और किसान दुखी मन से बताते हैं कि साल भर की मेहनत और पैसे दोनों इस बार बर्बाद हो गए.
मेरा कुल 25 एकड़ का रकबा है, जिसमें 15 एकड़ पूरी तरह से बर्बाद हो चुका है. करीब एक लाख रुपये की दवा फसलों में छिड़की, लेकिन कोई असर नहीं हुआ. खेत सूने पड़ चुके हैं और फसलें जवाब दे चुकी हैं: पीड़ित किसान, परसाडीह
जिला प्रशासन से मुआवजे की मांग: अब ग्रामीण किसान सामूहिक रूप से जिला प्रशासन के पास आवेदन देकर मुआवजे की मांग कर रहे हैं. किसानों ने बताया कि बीज और खाद खरीदते समय सरकार द्वारा फसल बीमा की राशि पहले ही काटी जाती है, और अब वही राशि वापस पाने की उम्मीद उन्हें प्रशासन से है.
गांव के कई युवा किसान, जिन्होंने पहली बार कृषि कार्य शुरू किया था, भी इस आपदा से हताश हो चुके हैं. बीमारी की चपेट और प्राकृतिक विपदा ने पूरे गांव की कृषि स्थिति को संकटग्रस्त बना दिया है.
