- देश के गेहूं उत्पादन की वैश्विक हिस्सेदारी लगभग 14% है. निर्यात पर लगी रोक को अब मोदी सरकार ने हटा लिया है.
किसानों का देश कहा जाने वाला भारत देश जहां धान उत्पादन में नंबर वन है वहीं गेहूं उत्पादन में दूसरे पायदान पर है. गेहूं उत्पादन में चीन का नंबर पहले स्थान पर आता है. लेकिन, खास बात ये है कि दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला भारत देश 4 साल से एक भी दाना गेहूं निर्यात (Export) नहीं कर रहा था. जबकि, उसका प्रोडक्शन वैश्विक गेहूं उत्पादन का लगभग 12-14% रहता है. हालांकि, अब मोदी सरकार ने गेहूं निर्यात की अनुमति दे दी है. आईए ETV Bharat के Explainer में जानते हैं कि आखिर गेहूं का निर्यात क्यों नहीं हो रहा था.

भारत में गेहूं की खेती का क्षेत्र और उत्पादन कितना: भारत में गेहूं की खेती का क्षेत्र 2022–2025 की अवधि के दौरान 30 मिलियन हेक्टेयर से अधिक बना रहा, जबकि 2024–25 तक गेहूं का उत्पादन एक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. इस पूरी अवधि के दौरान, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक बना रहा. 2024-25 में गेहूं उत्पादन लगभग 11.5 से 11.8 करोड़ (115 से 118 मिलियन) टन तक पहुंच गया, जो अपने आप में रिकॉर्ड है. इसके पहले साल 2023-24 में उत्पादन 113.3 मिलियन टन से अधिक था. देश में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है. अन्य प्रमुख राज्यों में मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, बिहार और गुजरात शामिल हैं.
कौन सा देश गेहूं का सबसे ज्यादा उत्पादन करता है.
कौन सा देश गेहूं का सबसे ज्यादा उत्पादन करता है. (Photo Credit; ETV Bharat)
भारत से गेहूं का कितना निर्यात होता था, एक्पोर्ट पर बैन कब लगा: वित्तीय वर्ष 2021-22 में भारत का गेहूं निर्यात सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था, जिसमें कुल 70 लाख टन (7 मिलियन टन) से अधिक का निर्यात हुआ था. इसका मूल्य लगभग 2.05 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 15,428 करोड़ रुपए) था. यह आँकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में बहुत अधिक था, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय गेहूं की भारी मांग के कारण था. इसके अगले साल यानी 2022 में सरकार ने गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया.
गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध क्यों लगा: भारत सरकार ने मई 2022 में गेहूं के निर्यात पर प्रतिबंध मुख्य रूप से घरेलू खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने, गेहूं की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने और उत्पादन में कमी के कारण लगाया था. इसका उद्देश्य देश में पर्याप्त स्टॉक बनाए रखना था. दरअसल, भीषण गर्मी और हीट वेव के कारण 2022 में गेहूं की फसल प्रभावित हुई थी. उत्पादन कम हो गया था.
वैश्विक बाजार में गेहूं की ऊंची कीमतों के कारण घरेलू बाजार में भी कीमतें बढ़ गई थीं, जिन्हें नियंत्रित करने के लिए ये कदम सरकार को उठाना पड़ा. सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के नागरिकों के लिए पर्याप्त मात्रा में गेहूं की उपलब्धता सुनिश्चित करना था. उत्पादन घटने के कारण भारतीय खाद्य निगम (FCI) ने बफर स्टॉक के लिए आवश्यक गेहूं की खरीद भी कम कर दी थी. हालांकि, साल 2026 में बेहतर उत्पादन की उम्मीद के साथ, सरकार ने सीमित मात्रा में गेहूं के निर्यात को फिर से मंजूरी दे दी है.
निर्यात पर बैन लगने से क्या भारत को गेहूं आयात करना पड़ा: 2022 में भीषण गर्मी के कारण गेहूं के उत्पादन में गिरावट आई. फसलों को हुए नुकसान के चलते घरेलू आपूर्ति में कमी आ गई और कीमतें काफी बढ़ गईं. विशेष गुणवत्ता वाले गेहूं की एक विशिष्ट आवश्यकता थी. इसके अलावा, छोटे पैमाने के निजी व्यापारियों की मांग में भी काफी वृद्धि हुई थी. इन्हीं कारणों से देश को गेहूं आयात करना पड़ा लेकिन, बेहद सीमित रहा.
गेहूं आयात का सबसे अहम कारण क्या रहा: फसल उत्पादन में लगातार गिरावट के कारण गेहूं की कमी हो गई. फसल में इस कमी की वजह से, सरकारी गेहूं के भंडार में भारी गिरावट देखी गई, जिससे बफर स्टॉक को फिर से भरने की जरूरत पड़ी. घरेलू गेहूं की कीमतों में बढ़ोतरी हुई, जिससे बाजारों में गेहूं और आटे की कीमतें बढ़ गईं.
नतीजतन, 2024 में कीमतों को स्थिर करने के उपाय के तौर पर आयात का सहारा लिया गया. इसके साथ ही सरकार ने 40 प्रतिशत आयात शुल्क हटाने पर विचार किया. इसके बाद, निजी व्यापारियों को गेहूं आयात करने की अनुमति दी गई. इस कदम का मकसद खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, महंगाई को काबू में रखना और जरूरी चीजों की कमी को रोकना रहा.
भारत में आयातित गेहूं का उपयोग कहां-कहां होता: गेहूं की एक प्रजाति है डुरम, इसको आमतौर पर बारीक आटे के बजाय सूजी के रूप में पीसा जाता है. यह मोटा, दानेदार उत्पाद पास्ता, स्पेगेटी, मैकरोनी और वर्मिसेली बनाने में प्रयोग किया जाता है. भारतीय खान-पान में, डुरम गेहूं से बनी सूजी का इस्तेमाल उपमा, हलवा और रवा डोसा बनाने में किया जाता है. ‘व्हीट फूड्स काउंसिल’ का कहना है कि डुरम, गेहूं की सभी छह किस्मों में सबसे कठोर होता है और इसमें प्रोटीन की मात्रा सबसे ज्यादा होती है, जो इसे बेहतरीन क्वालिटी का पास्ता बनाने के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है.
भारत किन-किन देशों को गेहूं का करता है निर्यात: भारत से गेहूं का निर्यात खाड़ी राष्ट्रों और दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों को किया जाता था. बांग्लादेश, भारत का सबसे बड़ा खरीदार देश रहा है. इसके अलावा, नेपाल, श्रीलंका, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), यमन, इंडोनेशिया, ओमान, कतर, अफगानिस्तान, मलेशिया, फिलीपींस और दक्षिण कोरिया को भी भारत से भारी मात्रा में गेहूं निर्यात किया जाता रहा है. निर्यात पर प्रतिबंध के बाद गेहूं को सिर्फ पड़ोसी और जरूरतमंद देशों को आपूर्ति जारी रखी गई. वह भी विशेष अनुमति के साथ.
किस राज्य में गेहूं का उत्पादन सबसे ज्यादा: देश में सबसे ज्यादा गेहूं का उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है, जो देश के कुल उत्पादन का 30.23% हिस्सा है. वहीं, दक्षिण भारतीय राज्य जैसे तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में गेहूं का उत्पादन सबसे कम या न के बराबर होता है. इसके अलावा पूर्वी राज्यों सिक्किम और मेघालय में भी न के बराबर गेहूं का उत्पादन होता है. क्योंकि इन राज्यों की जलवायु गेहूं उत्पादन के लिए अनुकूल नहीं है.
वैश्विक गेहूं उत्पादन में भारत का स्थान क्या? पाकिस्तान का कौन नंबर: गेहूं उत्पादन में भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. पहले पायदान पर चीन आता है. भारत वैश्विक गेहूं प्रोडक्शन का 14% हिस्सा उत्पादित करता है. तीसरे नंबर पर रूस का नाम आता है जो वैश्विक गेहूं उत्पादन का 11% पैदा करता है. इसके बाद अमेरिका, कनाडा, आस्ट्रेलिया का नंबर आता है जिनका वैश्विक गेहूं उत्पादन में 6%, 5%, 4% सहयोग रहता है. पाकिस्तान का वैश्विक गेहूं उत्पादन में मात्र 3% का ही सहयोग है.
कितने किसान करते हैं गेहूं की खेती: कृषि सर्वेक्षणों और सरकारी खरीद के आंकड़ों से मिले अनुमानों के अनुसार, देश में लगभग 35 से 45 मिलियन किसान प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गेहूं की खेती में शामिल हैं. देश में गेहूं की खेती का अधिकांश क्षेत्र और खरीद का बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान और बिहार राज्यों से आता है. अकेले पंजाब और हरियाणा में ही, हर साल लाखों किसान सरकारी खरीद प्रक्रियाओं में हिस्सा लेते हैं.
पाकिस्तान-बांग्लादेश, चीन-नेपाल में गेहूं उत्पादन कितना: अमेरिकी कृषि विभाग की ‘फॉरेन एग्रीकल्चरल सर्विस’ के आंकड़ों के अनुसार, चीन दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक देश है. चीन के मुख्य गेहूं उत्पादक प्रांत हेनान, शैंडोंग, हेबेई, अनहुई और जियांग्सू हैं. चीन मुख्य रूप से गेहूं का उपयोग भोजन, आटा उद्योगों, पशु आहार और रणनीतिक अनाज भंडार के लिए करता है. वहीं, पाकिस्तान की मुख्य गेहूं फसल है.
यहां गेहूं उत्पादन के मुख्य क्षेत्र पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा हैं. बांग्लादेश में गेहूं का उत्पादन काफी कम है, क्योंकि देश में चावल मुख्य अनाज की फसल है. देश अपनी गेहूं की जरूरतों के लिए भारत, रूस, यूक्रेन और कनाडा पर निर्भर रहता है. गेहूं की खेती के लिए जलवायु परिस्थितियां और जमीन की सीमित उपलब्धता उत्पादन बढ़ाने में रुकावट डालती है. नेपाल में चावल के बाद गेहूं की खेती दूसरी सबसे बड़ी फसल है. इसका सालाना उत्पादन लगभग 20 लाख टन के आसपास रहता है. नेपाल में गेहूं की खेती मुख्य रूप से तराई के मैदानी और मध्य पहाड़ियों की घाटियों में की जाती है.
