कुरुद। दुनिया के नक्शे पर छिड़ा महायुद्ध अब सीधे आपकी थाली और खेत तक पहुंचने वाला है. अमेरिका, इज़राइल, ईरान और रूस-यूक्रेन के बीच चल रहे भयंकर तनाव का सीधा असर भारतीय किसानों के सबसे बड़े हथियार- यानी खाद पर पड़ने की बड़ी आशंका है। इस अंतरराष्ट्रीय बारूद की तपिश को भांपते हुए भाजपा के नेता और पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर ने किसानों के नाम एक जरूरी संदेश दिया है।

मंगलवार को कुरुद क्षेत्र के ग्राम सिलौटी, पचपेड़ी और नगर पंचायत भखारा के मंच से बीजेपी विधायक चंद्राकर ने कहा कि खरीफ सीजन सिर पर है, लेकिन वैश्विक तनाव के कारण रासायनिक खाद (डीएपी और यूरिया) का संकट गहरा सकता है। उन्होंने किसानों से बड़ी अपील की कि वे सिर्फ रासायनिक खादों के भरोसे न बैठें, बल्कि समय रहते जैविक खाद, नैनो उर्वरकों और प्राकृतिक खेती जैसी वैकल्पिक व्यवस्था को अपना हथियार बना लें।
विपक्ष पर कसा तीखा तंज
मंच से चंद्राकर ने खाद और पेट्रोल-डीजल के मुद्दे पर घेरने वाले विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, विपक्षियों को भी बखूबी पता है कि दुनिया में क्या परिस्थितियां बनी हुई हैं, लेकिन इसके बावजूद उनका प्रदर्शन बेहद हास्यास्पद और सिर्फ एक नौटंकी है।
समझिए, क्यों मंडरा रहा है खाद का संकट?
भारत अपनी जरूरत का लगभग 60-70% यूरिया और नाइट्रोजन आधारित उर्वरक खाड़ी देशों (सऊदी अरब, ओमान, कतर, यूएई) से मंगाता है। ईरान-इज़राइल युद्ध के कारण इस मुख्य समुद्री रास्ते (होर्मुज जलडमरूमध्य) में भारी बाधा आ गई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें आसमान छू रही हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अमोनिया, सल्फर और पोटाश जैसे कच्चे माल की सप्लाई चेन पहले से ही ध्वस्त पड़ी है।
केंद्र सरकार महंगे दामों पर कर रही डीएपी आयात
हालांकि, राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार $930-935 प्रति टन के रिकॉर्ड महंगे दामों पर भी डीएपी आयात कर रही है, ताकि किसानों को कमी न हो। कृषि मंत्रालय के अनुसार, खरीफ सीजन के लिए फिलहाल पर्याप्त घरेलू स्टॉक मौजूद है और सरकार वैकल्पिक देशों से भी रास्ते तलाश रही है। लेकिन वैश्विक हालात को देखते हुए अजय चंद्राकर की यह अपील आने वाले संकट से बचने के लिए किसानों के लिए एक बड़ा ‘अलर्ट’ है।
