रायपुर। आदिवासी समाज से धर्मपरिवर्तन कर चुके लोगों को अनुसूचित जनजाति की सूची बाहर करने की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज और जनजाति सुरक्षा मंच ने रविवार को राजधानी में महारैली निकाल कर प्रदर्शन किया। मरीन ड्राइव तक निकाली जाने वाली रैली को पुलिस प्रशासन ने वीआईपी रोड चौक के पहले ही रोक दिया गया। इसके बाद रैली वापस वीआईपी रोड स्थित श्रीराम मंदिर के पास आई। जहां सभा हुई। सभा में आरक्षण और धर्मांतरण का मुद्दा जोर-शोर से गूंजा। रैली में बड़ी संख्या में जनजाति समाज के लोग शामिल हुए। इस प्रदर्शन में जशपुर से लेकर बस्तर तक के आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
सभा को भाजपा आदिवासी नेता नंदकुमार साय, जनजाति सुरक्षा मंच के राष्ट्रीय संयोजक गणेश राम भगत, भोजराज नाग संयोजक छत्तीसगढ़ सहित अन्य नेताओं ने संबोधित किया। सभा के दौरान आदिवासियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम भी पेश किए।
अनुसूचित जनजाति की श्रेणी से बाहर किया जाए : रैली से पहले सभा के जरिए डीलिस्टिंग की मांग उठाने की जरूरत पर वक्ताओं द्वारा प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा, जिन नागरिकों ने अपने मूल संस्कृति और अपने मूल धर्म को छोडक़र विदेशी धर्म अपनाया है, उन्हें अनुसूचित जनजाति की श्रेणी से तत्काल बाहर किया जाए। इसके लिए आवश्यक संवैधानिक संशोधन किया जाए।
ये है प्रमुख मांगे
पुरखों की संस्कृति ही संविधान का हक का आधार ।
जिन्होंने संस्कृति छोड़ दी, जनजाति पहचान छोड़ दी है, अब वे हमारा हक भी छोड़ दें।
अनुसूचित जाति की तरह अनुसूचित जनजाति में भी ईसाइयों और इस्लाम धर्मांतरित सदस्यों की डी-लिस्टिंग हो।
1970 से उक्त डी-लिस्टिंग बिल संसद में लंबित है, जिसे अब पारित किया जाए।
धर्मांरित लोग मूल जनजातियों की 70त्न नौकरियां, छात्रवृत्ति और विकास फंड हड़प रहे हैं। यानी 95% को मात्र 30% ही लाभ मिल रहा है।