- शिक्षा से वंचित बालिकाओं को मिला न्याय
- आयोग की पहल से स्कूल लौटेंगी दो बहनें
- फीस माफ, TC मिली और आर्थिक सहायता भी
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के त्वरित और संवेदनशील हस्तक्षेप से पिछले दो वर्षों से शिक्षा के अधिकार से वंचित दो बालिकाओं को आखिरकार न्याय मिल गया। स्थानांतरण प्रमाण-पत्र (टीसी) और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों के अभाव में दोनों छात्राओं का दूसरे विद्यालय में प्रवेश नहीं हो पा रहा था, जिसके कारण उनकी पढ़ाई पूरी तरह बाधित हो गई थी। आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष खंडपीठ (फास्ट ट्रैक कोर्ट) गठित कर मात्र एक सप्ताह के भीतर प्रकरण का समाधान कर दिया।

दस्तावेजों के अभाव में बाधित हुई बालिकाओं की शिक्षा
आयोग के समक्ष प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, बालिकाओं के पिता ने आर्थिक तंगी के चलते आत्महत्या कर ली थी, जबकि उनकी माता गंभीर बीमारी से जूझ रही हैं। विषम पारिवारिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण माता अपनी दोनों पुत्रियों की पढ़ाई दूसरे स्थान पर जारी रखना चाहती थीं, लेकिन आवश्यक दस्तावेज नहीं मिलने से यह संभव नहीं हो पा रहा था। परिणामस्वरूप दोनों बालिकाएं लगभग दो वर्षों से शिक्षा से वंचित थीं।
आयोग की त्वरित पहल से शुरू हुई संवेदनशील सुनवाई
मामले की जानकारी समाचार पत्रों और आवेदन के माध्यम से आयोग तक पहुंची। आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा के निर्देश पर 18 जून को प्रकरण दर्ज कर विशेष खंडपीठ के माध्यम से त्वरित सुनवाई शुरू की गई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की बात गंभीरता और संवेदनशीलता से सुनी गई तथा बच्चों के सर्वोत्तम हित को प्राथमिकता देते हुए समाधान का प्रयास किया गया।
बालिकाओं के उज्ज्वल भविष्य के लिए आगे आया विद्यालय प्रबंधन
आयोग की पहल पर संबंधित विद्यालय प्रबंधन ने दोनों छात्राओं का बकाया शुल्क पूरी तरह माफ करने, परीक्षा परिणाम और स्थानांतरण प्रमाण-पत्र शीघ्र उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। इसके साथ ही नई जगह पर उनकी शिक्षा निर्बाध रूप से जारी रह सके, इसके लिए दोनों बालिकाओं को 21-21 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वेच्छा से देने का भी निर्णय लिया गया।
आवेदिका ने आयोग के समक्ष इस समाधान पर संतोष व्यक्त करते हुए सहमति दी, जिसके बाद आयोग ने प्रकरण का निराकरण कर उसे नस्तीबद्ध करने के निर्देश जारी किए। उल्लेखनीय है कि, 18 जून को दर्ज यह मामला 24 जून को, यानी महज एक सप्ताह के भीतर सुलझा लिया गया।
बाल हितों के संरक्षण के लिए हर संभव प्रयास करेगा आयोग
आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने कहा कि, बच्चों के शिक्षा के अधिकार की रक्षा और उनके सर्वोत्तम हितों का संरक्षण आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि, आयोग संवेदनशीलता, संवाद और त्वरित हस्तक्षेप के माध्यम से ऐसे मामलों का मानवीय एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है। आवेदिका ने आयोग की त्वरित कार्रवाई और संवेदनशील पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, आयोग के प्रयासों से उनकी दोनों पुत्रियों की पढ़ाई दोबारा शुरू हो सकेगी और उनका भविष्य सुरक्षित हो पाएगा।
