
रायपुर। वृद्धजन दिवस के अवसर पर लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ में एक विशेष एवं भावनात्मक सामाजिक पहल के अंतर्गत ऐसे संयुक्त परिवारों का सम्मान एवं अभिनंदन किया गया, जिनमें चार पीढ़ियाँ एक साथ प्रेम, संस्कार, आपसी सम्मान और खुशहाली के साथ जीवन व्यतीत कर रही हैं।

इस विशेष अभियान के अंतर्गत रायपुर एवं आसपास के क्षेत्रों में शिवानन्द नगर खमतराई, श्री नगर, गोविन्द नगर गोंदवारा, भनपुरी, पंडरी, सरोरा एवं बीरगांव सहित विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित कर ऐसे परिवारों एवं वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया।
लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन का मानना है कि परिवार हमारी पहली पहचान है और संस्कारों की सबसे मजबूत नींव भी। वर्तमान समय में संयुक्त परिवारों की परंपरा धीरे-धीरे कम होती जा रही है। ऐसे में चार पीढ़ियों का एक साथ रहना हमारी संस्कृति, पारिवारिक एकता और संस्कारों की जीवंत मिसाल है।
कार्यक्रम के माध्यम से समाज को यह संदेश दिया गया कि वरिष्ठजन परिवार की धरोहर हैं। उनका अनुभव, स्नेह, मार्गदर्शन और आशीर्वाद आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी पूंजी है। संस्था का उद्देश्य केवल वरिष्ठजनों का सम्मान करना नहीं, बल्कि परिवारों में आपसी प्रेम, सम्मान और संस्कारों की परंपरा को मजबूत करना भी है।

इस अवसर पर संस्था से जुड़े पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने कहा कि वरिष्ठजनों के चरणों में बैठकर मिलने वाला स्नेह और उनके आशीर्वाद से मिलने वाली सकारात्मक ऊर्जा किसी भी सम्मान से कहीं अधिक मूल्यवान है। वरिष्ठजनों से मिला आशीर्वाद ही संस्था के लिए सबसे बड़ी कमाई है।
इस अभियान को सफल बनाने में तन, मन और धन से सहयोग करने वाली सभी बहनों एवं सहयोगियों के प्रति लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन परिवार ने हृदय से आभार व्यक्त किया।
अभियान में विशेष रूप से श्रीमती सरस्वती पाण्डेय, श्रीमती सरीता चंद्राकर, डॉ. दामिनी देशमुख, श्रीमती नीरजा भोसले, सुश्री पूजा निहाल, श्रीमती मधु दुबे, श्रीमती तृष्णा मंडल, श्रीमती मनीषा कुंडे,श्रीमती माया ठाकुर एवं श्रीमती लक्ष्मी ध्रुव का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।

इस अवसर पर श्रीमती वंदना मुखर्जी — अध्यक्ष, रायपुर संभाग सहित संस्था के पदाधिकारीगण, कार्यकर्ता एवं सहयोगी उपस्थित रहे।
लक्ष्य वेलफेयर फाउंडेशन के संस्थापक/संचालक श्री संजीव यादव ने अभियान से जुड़े सभी पदाधिकारियों, बहनों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि समाज में वरिष्ठजनों के सम्मान और संयुक्त परिवारों की परंपरा को मजबूत करने के लिए ऐसे प्रयास निरंतर किए जाने चाहिए।
उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को अपने बुजुर्गों के अनुभव और संस्कारों से जोड़ना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। जहाँ बुजुर्गों का सम्मान होता है, वहीं परिवार में संस्कार और समाज में संवेदनशीलता मजबूत होती है।








