रायपुर । सिस्टम की नाकामी से छत्तीसगढ़ में अंग प्रत्यारोपण नहीं हो पा रहा है। प्रदेश में स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (सोटो) बनने के बाद सिर्फ तीन ब्रेन डेड प्रत्यारोपण हो पाए हैं, जबकि 104 मरीजों का अंग प्रत्यारोपण सिस्टम की नाकामी से रुका है। स्थिति यह है कि गंभीर अवस्था में पहुंच चुके कई मरीज जिंदगी की आस में चक्कर काट रहे हैं।
बता दें कि सोटो में प्रदेश के 104 मरीजों ने अंग प्रत्यारोपण के लिए पंजीयन कराया है। इसमें 80 मरीजों का किडनी और 24 का लिवर प्रत्यारोपण किया जाना है। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने ऐसा कोई सिस्टम तैयार नहीं किया है, जिससे ब्रेन डेड वाले मृतकों की जानकारी उसे समय पर अस्पतालों से मिल जाए और उनके अंगों से जरूरतमंदों की जिंदगी बचाई जा सके।
वहीं, ऐसे मरीजों के परिवार से अंगदान कराने, उनकी काउंसिलिंग कराने के साथ ही समय पर प्रक्रिया कराने के लिए कोई जिम्मेदारी तय नहीं की जा सकी है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मानव संसाधन की कमी भी इसमें आड़े आ रही है। हाल ही में हुए स्वास्थ्य सचिव की बैठक में इन समस्याओं पर विशेषज्ञों ने अपनी बात भी रखी। बावजूद इसके आला अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई।
लोगों को नहीं कर पा रहे जागरूक
चिकित्सकों ने बताया कि आंबेडकर अस्पताल, डीकेएस समेत अन्य अस्पतालों में इलाज के दौरान हर माह होने वाली मौतों में कई ब्रेन डेड वाले होते हैं। यदि इन मरीजों के स्वजन की काउंसिलिंग कर अंगदान के लिए प्रेरित किया जाए तो वेटिंग रहेगी ही नहीं और किसी को लाइव डोनेशन की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। लेकिन विभागीय उदासीनता के चलते काम हो नहीं पा रहा है। पंजीयन कराने वाले मरीजों की सिर्फ संख्या बढ़ रही है।
डीकेएस अस्पताल में अंग प्रत्यारोण सुविधा अटकी
गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत देने के लिए राज्य शासन ने डीकेएस सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में अंग प्रत्यारोपण की सुविधा शुरू करने की अनुमति दी थी। पूर्व में स्वास्थ्य मंत्री, स्वास्थ्य सचिव ने बैठक कर मार्च तक सुविधा हर हाल में शुरू करने के निर्देश दिए थे, लेकिन यह सेवा ठंडे बस्ते में चली गई है। अस्पताल प्रबंधन ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण के लिए वार्ड और आपरेशन थिएटर तो तैयार हैं, लेकिन जरूरी चिकित्सकीय उपकरण और मानव संसाधन की कमी के चलते यह शुरू नहीं हो पाया है।
दो तरह के होते हैं अंग प्रत्यारोपण
1. ब्रेन डेड : ब्रेन डेड हो चुके मरीजों के कुछ जरूरी अंग उनके स्वजन की अनुमति से निकालकार जरूरतमंद मरीजों को दिया जाता है। इसके कैडेवर अंग प्रत्यारोपण भी कहा जाता है।
2. लाइव डोनेशन : किडनी और लिवर खराब हो चुके मरीजों को उनके परिवार के सदस्य अंगदान करते हैं। प्रत्यारोपण के लिए पंजीयन के बाद काउंसिलिंग और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है।
छत्तीसगढ़ में अंग प्रत्यारोपण की स्थिति
200 से अधिक अंग प्रत्यारोपण वर्ष-2014 से अब तक
03 मरीजों का प्रत्यारोपण, ब्रेन डेड अंगदान से
80 किडनी रोगियों ने कराया है प्रत्यारोपण के लिए पंजीयन
24 पंजीकृत लिवर रोगियों का होना है अंग प्रत्यारोपण
