स्लग- मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से विश्व मंच पर बढ़ा भारत का दबदबा
दिल्ली। एक वो दौर था, जब भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिका में प्रवेश देने से मना किया जा रहा था, अब एक वो दौर आ गया है, जब अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन मोदी की तारी$फ करते अघा नहीं रहे हैं. मोदी ने विश्व मंच पर भारत को जिस तरह से प्रेजेन्ट किया है, मोदी के व्यक्तित्व और लीडरशिप के सामने बड़े-छोटे कई राष्ट्रों के राष्ट्राध्यक्ष और बड़े नेता अपने आप को बौना महसूस करने लगे हैं. मोदी के हालिया आस्ट्रेलिया यात्रा के दौरान आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज, मोदी की तारी$फ में कशीदे गढ़ते हुए कहा कि, मोदी बॉस हैं, उनका स्वागत सौभाग्य की बात है. इधर, विश्व के सबसे पॉवरफुल अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन $खुद मोदी की बढ़ती लोकप्रियता के कायल हैं. वे कहते हैं, कि मोदी से मिलने अमेरिका में हमें जो आवेदन मिल रहे हैं, उनको कंट्रोल करना वश की बात नहीं है. पॉवरफुल राष्ट्रपति बाइडन द्वारा मोदी से ऑटोग्रा$फ मांगना, सचमुच सीने को ५६ इंच चौड़ा करने वाली बात है. यहां यह बताना लाजिमी है, कि हम न तो मोदी भक्त हैं, न उनके पैरोकार. लेकिन, विश्व मंच पर वर्तमान में जो स्थिति भारत की है, वह गुमान पालने लाय$क नहीं, बल्कि गर्व करने लाय$क तो है ही.
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विश्व मंच पर भारत का डंका बज रहा है. पिछले दिनों विश्व परिदृश्य में दो चौंकाने वाले वाकए सामने आए, तो वहीं अपनी ही धरती जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में जी-२० की बैठक में जो समां बंधा, वह न केवल भारत, बल्कि समूची दुनिया के लिए किसी आश्चर्य से कम नहीं था. अव्वल तो हम बता दें, विश्व मंच पर भारत के प्रधानमंत्री की तारी$फ में अमेरिका के राष्ट्रपति ने कशीदे गढ़े. दूसरा एफआईपीआईसी शिखर बैठक जो कि भारत और पापुआ न्यू गिनी के संयुक्त तत्वावधान में पोर्ट मोरेस्बी में आयोजित था, में मोदी के ग्लोबल साउथ कैंपेन को उम्मीद से ज्य़ादा रिस्पांस मिला. सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर प्रशांत महासागर को एक मुक्त खुले और समावेशी क्षेत्र बनाने की दिशा में सभी $कदम उठाने पर सहमति बनी. इतना ही नहीं, यहां नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में ग्लोबल साउथ की आवा•ा को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद तक पहुंचाने में सभी भागीदार देशों को समर्थन मांगते हुए कहा, कि इसके लिए हमें इस अंतरराष्ट्रीय संस्था में सुधार लाने की •ारूरत है. मोदी ने क्वाड की चर्चा करते हुए कहा कि , क्वाड का फोकस भी हिंद प्रशांत महासागर ही है. $गौर करने की बात यह है कि क्वाड का उद्देश्य ही प्रशांत महासागर में चीन के विस्तारवादी रवैए पर लगाम लगाना है. मोदी ने निर्भीकता के साथ यह भी कहा कि यह विशाल महासागर ही भारत को आप सभी से जोड़ता है. आप छोटे द्वीप देश नहीं हैं. बल्कि बड़े महासागरी देश हैं.
नरेंद्र मोदी ने भारत की अध्यक्षता वाले जी-२० की एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य…थीम का भा •िाक्र किया. भारत के अलावा १४ प्रशांत द्वीप देशों फि•ाी, कुक, आईलैंड्स, किरीबाती, मार्शल, आईलैंड्स माइक्रोनेशिया, नाउरू, नींयू, पलाऊ पापुआ, न्यू गिनी, समोआ, सोलोमन, आईलैंड्स टोंगा, तुवालु और वानुआतु ने मोदी के कैंपेन का समर्थन किया. पापुआ न्यू गिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मरापे ने भी मोदी की आवा•ा को बल देते हुए कहा कि हम ग्लोबल पॉवर प्ले के शिकार हैं. आप ग्लोबल साउथ के लीडर (मोदी) हैं. न्यू गिनी ने मोदी को कैंपेनियन ऑ$फ द अवार्ड ऑ$फ लोगोहू ….से सम्मानित किया. फि•ाी के प्रधानमंत्री सित्विनी राबुका ने द कंपेनियन ऑ$फ द अवार्ड ऑ$फ द फि•ाी से सम्मानित किया. पलाऊ के राष्ट्रपति सुरगेन व्हिप्स जूनियर ने मोदी को एबॉक्ल अवार्ड से सम्मानित किया.
आस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारी$फ में कशीदे गढ़ते हुए कहा- मोदी बॉस हैं, उनका स्वागत सौभाग्य की बात है. विश्व मंच पर जिस तरह भारत अपना दबदबा बना कर चल रहा है, विश्व की पांच महाशक्तियों की बराबरी में बैठने की बखत रखता है. यह भारत के लिए किसी गर्व से कम नहीं है.
वहीं दूसरी ओर कश्मीर घाटी में अब बारूद की गंध नहीं, बल्कि अमन और $खुशहाली की बयार बह रही है. जी-२० की महत्वपूर्ण बैठक श्रीनगर में हुई. यह पर्यटन पर केंद्रित कार्यसमूह है. जिसमें त$करीबन ६० विदेशी डेली गेट्स शामिल हुए. तीन दिनी इस इवेंट शेर-ए- कश्मीर कन्वेशन सेंटर में हुआ. २०१९ में अनुच्छेद ३७० के उन्मूलन के बाद घाटी में पहली बार इस तरह का कोई बड़ा आयोजन हुआ है. ३७ साल बाद यह सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन था. विभिन्न देशों के बीच मेलमिलाप, बि•ानेस आदि पर $करार हुए. इइस तरह के आयोजन को इन चार सालों में हुई प्रगति के प्रभाव के रूप में हम परिभाषित कर सकते हैं. यह आयोजन भले ही सरकारी तौर पर हुआ हो, किंतु यहां की अवाम की दुआ भी शांति के साथ है. श्रीनगर को दुल्हन की तरह सजाया गया था. कभी बारूद की गंध से लोग परेशान थे, अब जन्नत में माहौल बदल चुका है. मोहब्बत की $खुश्बू से कोना-कोना महक रहा है. रो•ागार, व्यापार अब चरम पर है. इस साल दो करोड़ से भी ज्यादा पर्यटकों के आने की उम्मीद है. आतंकवाद की कमर टूट रही है. उनके पैरोकारों की स्थिति अत्यंत $खराब है. साल २०१८ में ४०० आतंकी वारदातें हुई थीं, जो साल २०२१ में घटकर २५० हो गई, कश्मीर सचमुच जी-२० इवेंट वेन्यू और इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन बन गया है. वर्षो पहले $$खैरात में मलाई खाने वालों को धारा-३७० के उन्मूलन ने आइना दिखा दिया है. अब तरक्की के रास्ते खुल रहे हैं. पर्यटकों के साथ इन्वेस्टर भी बढ़ रहे हैं. दुबई का एमार ग्रुप श्रीनगर में छह करोड़़ डॉलर का इन्वेस्टमेंट कर एक काम्पलेक्स का निर्माण करवा रहा है. नि:संदेह जम्मू-कश्मीर की बदलती $िफ•ाा भारत के लिए एक शुभ संकेत है.

