स्लग- मामला फूड इंस्पेक्टर द्वारा लाखों लीटर पानी बहाने का, विभाग खानापूर्ति कर रहा है, तो प्रशासन का$ग•ाी कार्रवाई में उलझा…

इंट्रो- पखांजूर के खाद्य निरीक्षक राजेश विश्वास का परलकोट जलाशय में मोबाइल गिरना और जलाशय से २१ मई २०२३ से लगातार चार दिनों तक डी•ाल पंप के माध्यम से लगभग २१ लाख लीटर पानी को बहाया जाना, कोई पहला उदाहरण नहीं है. सरकारी मुलाजिम राष्ट्रीय संपत्ति को किस तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं, किसी से छुपा नहीं है. क्या फूड इंस्पेक्टर के सस्पेंशन मात्र से •ा$ख्म भर जाएंगे. ऐसे अ$फसर को तो सीधा टर्मीनेट किया जाना चाहिए. ताकि, भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति किसी पेड़ के एक पत्ते (कोई भी राष्ट्रीय संपत्ति) को भी नुकसान पहुंचाने के पहले कांप जाए. ऐसे गुनाहगारों को ढील देने का मतलब तंत्र का अत्यंत ही कम•ाोर होना है. जो लोकतंत्र के लिए अच्छा सूचक नहीं है. भले ही जलसंसाधन विभाग की ओर से दलील दी जा रही है कि पानी निकासी के लिए विभाग द्वारा कोई अनुमति नही दी गई थी । लेकिन यह बात भी गले के नीचे नहीं उतर रही है। जलसंसाधन विभाग के एसडीओ एैसा बयान देकर अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए है. जल संसाधन विभाग फूडइंस्पेक्टर से जुर्माना वसूलने का मन बना चुका है। कांकेर कलेक्टर ने अपनी ओर से एसडीओ के खिलाफ कार्रवाई करने अनुशंसा कर दी है । किन्तु जन मानस में ये भी चर्चा है कि मामला कुछ दिनों बाद ठण्डा हो जायेगा और लोग भूल भी जायेंगे, लेकिन अराजकता का अंतहीन सिलसिला कब तक चलेगा, छत्तीसगढ़ की जनता के साथ नाइंसाफी कब तक होती रहेगी? यह एक यक्ष प्रश्न है।
नकेल कसने की •जरूरत
निलंबित फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास १५-२० दिनों में बहाल हो जाएंगे. सरकारी दफ़्तरों में ऐसा सिलसिला अक्सर चलते रहता है. इसलिए जनता का विश्वास सरकारी तंत्र से उठता ही जा रहा है. समय रहते सरकारी तंत्र में बैठे निरंकुश अ$फसरों पर नकेल कसने की स$ख्त •ारूरत है. नहीं तो छत्तीसगढिय़ों के सपने तार-तार होते रहेंगे.
२१ लाख लीटर पानी बहा दिया, स• सि$र्फ सस्पेंशन!
कांकेर •जिले की पखांजूर तहसील के परलकोट जलाशय में गिरे मोबाइल को ढूंढऩे के लिए २१ लाख लीटर पानी बहाया गया. आरोपी पखांजूर के फूड इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया गया. बात आई गई, $खत्म भी हो गई. मीडिया में सियासत हुई. सस्पेंशन के बाद जैसे पेट का मरोड़ ठीक हो गया. ये है छत्तीसगढ़ में सरकारी तंत्र की वास्तविक तस्वीर. एक अदना सा फूड इंस्पेक्टर ऐसी हिमाकत कर सकता है, तो बड़े नौकरशाह क्या कर सकते होंगे, सोचकर ही मन आक्रोश से भर जाता है. आज से २३ साल पहले जब राज्य का निर्माण हुआ था, तो किसी ने सपने में नहीं सोचा था, कि प्रदेश के लोगों को ऐसे भी दिन देखने पड़ेंगे. किसी भी प्रकार की प्राकृत आपदा से दूर शांत और भोलेभाले लोगों का राज्य है छत्तीसगढ़. शांति और विकास के पक्षधर छत्तीसगढिय़ों के मन में कभी कोई छल-कपट नहीं देखा गया. छत्तीसगढ़ के लोगों ने हर बाहरी लोगों को अपने हृदय में स्थान दिया है. छत्तीसगढ़ महतारी ने अपने आंचल में हर किसी को फलने-फूलने का अवसर दिया. किंतु, छत्तीसगढ़ के लोगों की भावनाओं से खेलने का क्रम राज्य निर्माण के बाद से लगातार जारी है. वनों की विनाश लीला, भ्रष्टाचार, अवैध कब्•ो, रेतों और दीगर खनिज संसाधनों का अवैध दोहन व परिवहन, सडक़ों, भवनों का निम्न स्तरीय निर्माण, जल एवं खाद्य संसाधनों का दुरुपयोग तथा बढ़ते क्राइम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. विकास हो या विनाश हो, हर बात में अवरोध पैदा करना, नेताओं का सियासी शगल हो गया है. हर बात को सियासी चश्मे से देखने की वजह से अच्छी नीति, अच्छे कार्यक्रम •ामींदो•ा हो जाते हैं. सत्ता पर कोई भी पार्टी हो, अपनी पीठ थपथपाने के अलावा कोई दूसरा काम नहीं रह जाता है. क्या यही सपने देखे थे, राज्य के लोगों ने? यह प्रश्न हर पल सालता है.
पखांजूर के खाद्य निरीक्षक राजेश विश्वास का परलकोट जलाशय में मोबाइल गिरना और जलाशय से २१ मई २०२३ से लगातार चार दिनों तक डी•ाल पंप के माध्यम से लगभग २१ लाख लीटर पानी को बहाया जाना, कोई पहला उदाहरण नहीं है. सरकारी मुलाजिम आए दिन राष्ट्रीय संपत्ति को किस तरह नुकसान पहुंचा रहे हैं, किसी से छुपा नहीं है. क्या फूड इंस्पेक्टर के सस्पेंशन मात्र से •ा$ख्म भर जाएंगे. ऐसे अ$फसर को तो सीधा टर्मीनेट किया जाना चाहिए. ताकि, भविष्य में कोई दूसरा व्यक्ति किसी पेड़ के एक पत्ते (कोई भी राष्ट्रीय संपत्ति) को भी नुकसान पहुंचाने के पहले कांप जाए. ऐसे गुनाहगारों को ढील देने का मतलब तंत्र का अत्यंत ही कम•ाोर होना है. जो लोकतंत्र के लिए अच्छा सूचक नहीं है. शासकीय सेवकों की अपनी एक आचार संहिता होती है. शासकीय सेवक नियमों से बंधे होते हैं. लेकिन, कालांतर में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं. ऐसे में बहुत •यादा शुचिता की उम्मीद नहीं की जा सकती. जल संसाधन विभाग के •िाम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई. अनुमति देने वाला अधिकारी भी बराबर का •िाम्मेदार और दोषी है. निलंबित फूड इंस्पेक्टर राजेश विश्वास १५-२० दिनों में बहाल हो जाएगा. सरकारी दफ़्तरों में ऐसा सिलसिला अक्सर चलते रहता है. इसलिए जनता का विश्वास सरकारी तंत्र से उठता ही जा रहा है. समय रहते सरकारी तंत्र में बैठे निरंकुश अ$फसरों पर नकेल कसने की स$ख्त •ारूरत है. नहीं तो ऐसा सिलसिला चलता ही रहेगा और छत्तीसगढिय़ों के सपने तार-तार होते रहेंगे.
