गृहमंत्री अमित शाह के दुर्ग प्रवास का कारण 9 साल की मोदी सरकार की उपलब्धियों का प्रचार बताया जा रहा है। लेकिन उनका भाषण जाहिर करता है कि यह भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सभाओं की शुरुआत है। जनसभा का उनका संबोधन सिर्फ इस साल दिसंबर में छत्तीसगढ़ के विधानसभा चुनावों के लिए ही नहीं था, बल्कि स्पष्ट आग्रह था कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भी फिर मोदी सरकार चुनें। शाह ने 21 मिनट के भाषण में 54 बार मोदी जी कहा। मतलब औसतन हर 24 सेकेंड में मोदी को याद किया।
भाजपा लीडरशिप के दूसरे नंबर के नेता अमित शाह तीन माह में दूसरी बार छत्तीसगढ़ आ गए। इससे पहले वे 24 और 25 मार्च को बस्तर आए थे। उन्होंने तब CRPF के स्थापना दिवस कार्यक्रम में भाग लिया था। इस बार वे दुर्ग में जनता को संबोधित करने आए। इस बार का दौरा कई मायनों में खास था। इसके जरिए भारतीय जनता पार्टी ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं।
जनसभा में पहुंचे 50 हजार से अधिक लोगों का अभिवादन स्वीकार करते अमित शाह, ओम माथुर, रमन सिंह और अरुण साव।
जनसभा में पहुंचे 50 हजार से अधिक लोगों का अभिवादन स्वीकार करते अमित शाह, ओम माथुर, रमन सिंह और अरुण साव।
दुर्ग में ही क्यों आए अमित शाह
अमित शाह की सभा के लिए दुर्ग चुना गया। इस स्थान के चयन के पीछे भी भाजपा की रणनीति है। वर्तमान कांग्रेस सरकार के लिए दुर्ग संभाग इस समय सबसे महत्वपूर्ण है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित मंत्रिमंडल के 6 बड़े मंत्री गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू, कृषि मंत्री रविंद्र चौबे, वन मंत्री मोहम्मद अकबर, महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिला भेड़िया, पीएचई मंत्री गुरु रुद्र कुमार इसी जिले और संभाग से आते हैं।
मतलब आधा मंत्रिमंडल। संभाग की 20 विधानसभा सीटों में से 18 पर इस समय कांग्रेस काबिज है। यहां अमित शाह की सभा में भीड़ जुटना मतलब कांग्रेस के गढ़ में भाजपा की ताकत दिखना होता। कार्यकर्ताओं में भी इस बात से उत्साह बढ़ता कि प्रदेश के मुखिया के इलाके में ही पार्टी ने हजारों की जनसभा की।
यहां से बना माहौल पूरे प्रदेश में जाएगा। मीडिया का भी यहां की गई सभा में फोकस रहेगा। फिर दुर्ग शहरी इलाका है जिसे भाजपा विचारधारा के मुताबिक सपोर्टिव माना जाता है,लिहाजा इस सभा के जरिए ऐसे वोटर को भी टारगेट किया गया।
पद्मश्री उषा बारले के घर नाश्ता
कांग्रेस सरकार ने कुछ माह पहले पंडवानी गायिका उषा बारले को पद्मश्री देने की अनुशंसा की थी। पद्मश्री मिलने के बाद उषा का झुकाव भाजपा की ओर दिखाई देने लगा। अब चर्चा है कि उन्हें टिकट दी जाएगी। ऐसे में अमित शाह का उनके घर जाना, परिवार वालों के साथ नाश्ता करना ये मैसेज देना है कि भाजपा 2023 विधानसभा चुनाव के मद्देनजर नये लोगों को जोड़ रही है।
उषा बारले को टिकट मिलने नहीं मिलने की बात अलग है, लेकिन महत्व जरूर मिल गया। भाजपा ने इसके जरिए अपने छत्तीसगढ़ियावाद को भी थोड़ा मजबूत कर लिया क्योंकि उषा ठेठ छत्तीसगढ़ी संस्कृति का चेहरा हैं।
भाषण में पाकिस्तानी आतंकवाद और राम मंदिर जैसे केंद्रीय मुद्दे
अमित शाह के भाषण में छत्तीसगढ़ के मुद्दों के साथ-साथ केंद्र के मुद्दे भी प्रमुखता से शामिल रहे। इसमें पाकिस्तानी आतंकवाद, मनमोहन सिंह की सरकार के समय हुए घोटाले, राम मंदिर, कश्मीर, दुनिया में नरेंद्र मोदी की बढ़ती लोकप्रियता जैसी बातें थीं। ये मुद्दे भाजपा लोकसभा चुनाव के समय उठाती है। शाह ने भाषण की तकरीबन हर लाइन में प्रधानमंत्री की तारीफ की।
बार-बार लोगों से आग्रह किया कि 2024 के आमचुनाव में फिर मोदी जी को ही पीएम बनाना है। केंद्र की योजनाएं गिनाई, कोरोना के टीकों की बात की। 2023 के विधानसभा चुनाव से ज्यादा 2024 के लोकसभा चुनाव पर वे फोकस करते दिखे। जाहिर है कि भाजपा अभी से अगले साल होने वाले इस चुनाव के लिए जुट गई है।
रविशंकर स्टेडियम में अमित शाह का संबोधन सुनने हजारों की संख्या में पहुंचे लोग।
छत्तीसगढ़ में कोई सीएम फेस नहीं
शाह के भाषण से एक बात और पूरी तरह साफ हो गई कि भारतीय जनता पार्टी इस बार छत्तीसगढ़ में किसी सीएम फेस पर चुनाव नहीं लड़ेगी। शाह ने जितनी बार भी विधानसभा के लिए वोट मांगे उन्होंने कहा कि यहां बीजेपी की, सरकार बनानी है और जितनी बार केंद्र की बात की कहा देश में मोदी जी की सरकार बनानी है।
रविशंकर स्टेडियम में बने मंच पर अरुण साव ने अमित शाह का स्वागत किया
छत्तीसगढ़ भाजपा में कोई बड़ा बदलाव नहीं
अभी कुछ दिन पहले तक भारतीय जनता पार्टी में चर्चा थी कि प्रदेश के अध्यक्ष, नेता प्रतिपक्ष में नये चेहरे लाये जा सकते हैं। यहां तक की चर्चा प्रदेश प्रभारी के भी बदले जाने की थी, लेकिन आज अमित शाह के कार्यक्रम के बाद इस तरह के बदलाव की गुंजाइश नहीं दिखाई देती।
इसका सीधा कारण शाह के वर्तमान अध्यक्ष अरूण साव, वर्तमान नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल सहित सभी पदाधिकारियों को महत्व देना है। उन्होंने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया, कोई नये चेहरे को उनके आसपास नहीं पाया गया जिससे कि किसी बदलाव के कयास लगाए जा सकें।

