

जो काम पानी टंकी बनाने के पहले हो जाना था उसकी सुध अफसरों को अब आ रही है जब 80 फीसदी गांवों में पानी टंकी या तो खड़ी हो चुकी है या गांवों में पानी सप्लाई तक शुरु हो गई है। इसके पीछे बोर खनन में भी खेल की बू आ रही है क्योंकि पहले से ही अधिकांश गांवों में पंचायतों में पुराने बोर को जोड़ा गया है लेकिन पुराने बोर होने से दाल नहीं गल पाई तो अब नया बोर खनन कराने का हवाला दिया जा रहा है। गौरतलब है कि अविभाजित जांजगीर-चांपा जिले के 880 ग्रामों में जेजेएम का काम तीन सालों से चलता आ रहा है। इस दौरान अधिकांश गांवों में यह देखने को मिल रहा है कि नए बोर खनन कराने के बजाए गांवों में जो सालों पुराने बोर हुए थे, वहां आसपास नई पानी टंकी खड़ी कर पुराने बोर से ही टंकी का कनेक्शन जोड़ दिया गया है। अधिकांश ग्रामों में जेजेएम के तहत ऐसा ही काम हुआ है लेकिन अब इसमें पेंच ये फंस गया है कि पुराने बोर की उतनी क्षमता नहीं है कि नए विशालकाय टंकी को भरा जा सके। पुराने बोर हांफ रहे हैं। उनके सहारे विशालकाल टंकी को भरना बीरबल की खिचड़ी की तरह साबित हो रहा है।
इन पंचायतों के पुराने बोर का उपयोग
बलौदा ब्लॉक के ग्राम करमंदी में जेजेएम के तहत काम हुआ है। यहां पंचायत के द्वारा पूर्व में कराए गए बोर के पास ही नई टंकी खड़ी की गई है और पुराने बोर से ही टंकी को भरने कनेक्शन जोड़ दिया गया है। मगर ग्रामीणों को अभी भी पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा। इसी तरह पामगढ़ ब्लॉक के ग्राम पंचायत कमरीद में ही जेजेएम के तहत नई पानी टंकी तो बनाई गई है लेकिन यहां भी नए बोर खनन कराने के बजाए गांव में पुराने हुए बोर में ही कनेक्शन जोड़ दिया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि इसके चलते पुराने बोर से जो पानी मिल जाता था वो भी बंद हो गया। अब भी पानी के लिए भटक रहे हैं। ऐसे ही अधिकतर पंचायतों में पुराने बोर का भी इस्तेमाल किया गया है।
