गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर के ग्राम पंचायत बोइरगांव के आश्रित गांव डूमरघाट आजादी के 75 वर्ष बाद भी विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर है। यहां के निवासी कमार आदिवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां से विकासखंड मुख्यालय की दूरी 13 किलोमीटर व ग्राम पंचायत लगभग 7 किलोमीटर है।
गरियाबंद जिले के आदिवासी विकासखंड मैनपुर के ग्राम पंचायत बोइरगांव के आश्रित गांव डूमरघाट आजादी के 75 वर्ष बाद भी विकास की मुख्य धारा से कोसों दूर है। यहां के निवासी कमार आदिवासी मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। यहां से विकासखंड मुख्यालय की दूरी 13 किलोमीटर व ग्राम पंचायत लगभग 7 किलोमीटर है। ग्राम तक पहुंचने के लिए दूसरा रास्ता लगभग 25 किलोमीटर नदी-नालों से होकर आवाजाही करना पड़ता है। गांव में सडक, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली, पेयजल जैसे बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। यहां की जनसंख्या लगभग 220 व मकान 60 है।

आदिम जनजाति आदिवासी बाहुल्य गांव तक पहुंचने के लिए अब तक पक्की सडक़ तो दूर पगडंडीनुमा सडक़ का निर्माण भी नहीं किया जा सका है। इस गांव में दो रास्तों से पहुंचा जा सकता है। एक रास्ता बरदूला से जंगल होते हुई 7 किमी में पहुंचा जा सकता है और दूसरा रास्ता तौरेंगा कोदोमाली से होते हुए मैनपुर मुख्यालय से 25 किमी के आसपास है, इन दोनो रास्तो से डूमरघाट पहुंचने के लिए 2 से 3 बड़ी नदी-नालों को पार करना पड़ता है। सडक़ का निर्माण भी नहीं किया गया है। जिससे कारण यहां आला अधिकारी और बड़े जनप्रतिनिधि नहीं पहुंचते। सडक़ नहीं होने के कारण सबसे ज्यादा परेशानी तबीयत खराब होने की स्थिति मे होती है। गांव तक संजीवनी एक्सप्रेस 108, महतारी 102 वाहन भी नही पहुंच पाती है। यहां कोई उपस्वास्थ्य केन्द्र भी नहीं है। बारिश के दिनो मे नदी-नालों में उफान होने के कारण मरीज को खाट पर लेटाकर मीलों पैदल यात्रा कर मैनपुर तक लाना पड़ता है। तौरेगा नदी गांव से होकर गुजरी है, जिसका कटाव हर वर्ष बारिश में बढ़ता जा रहा है।
ज्ञात हो कि ग्राम डुमरघाट में पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बिजली लगाने की घोषणा की थी, लेकिन अभी तक बिजली की रोशनी नहीं पहुंच पाई। गांव में सौर ऊर्जा भी लगाई गई है, लेकिन आज की स्थिति में वह बेकार पड़ा हुआ है। ग्रामीण स्कूल में लगे हुए सौर ऊर्जा से कनेक्शन खींचकर काम चला रहे हैं। जिससे जैसे-तैसे कुछ घंटे ही रोशनी मिल पाती है। गर्मी के दिनो में पानी की समस्या से जूझना पड़ता है।
भाजपा शासन से ग्रामीणों को है बड़ी उम्मीद
ग्राम डूमरघाट के ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने बोईरगांव के आश्रित ग्रामों में बिजली लगाने की घोषणा की थी, उसके बाद ठेमली पथर्री में छह माह बाद बिजली भी लगाई गई थी। लेकिन डूमरघाट में बिजली नहीं लग पाई है। इस बार फिर भाजपा शासनकाल में है। ग्रामीण डूमरघाट की समस्याओं को लेकर मुख्यमंत्री सहित आला मंत्रियों से मिलने की बात कह रहे हैं।

