
हरि अनंत हरि कथा अनंता,
कहहिं सुनहिं बहुबिधि सब संता,
रामचंद्र के चरित सुहाए,
कलप कोटि लगि जाहिं न गाए
राम चरित मानस की इस चौपाई में गोस्वामी तुलसीदास जी कह रहे हैं कि प्रभु श्रीराम अर्थात ईश्वर अनंत है न उनका कोई आदि है और न ही अंत। किसी भी मनुष्य द्वारा भगवान श्रीराम के सुंदर चरित्र को कोई व्यक्त नहीं किया जा सकता। आखिर कौन हैं राम? राम ऐसे पुरुष हैं, जो सर्वश्रेष्ठ हैं, जिनकी रीति, नीति, प्रीति और भीति से पूरी दुनिया परिचित है। राम परिपूर्ण हैं। राम आदर्श हैं। राम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं, यानी पुरुषों में श्रेष्ठ हैं। राम न्यायप्रिय हैं। राम आज्ञाकारी हैं। राम कर्तव्यनिष्ठ हैं। राम करुणा सागर हैं। राम पूज्यनीय हैं। राम भारत की आत्मा हैं। राम ही हैं, जिन्होंने भारत को उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक एक सूत्र में पिरोने का काम किया है।
गोस्वामी तुलसीदास जी ने राम चरित मानस में राम को एक अवतारी पुरुष बताया है। राम चरित मानस की सबसे बड़ी विशेषता यही है कि तुलसीदास जी ने सरल अवधी भाषा में राम के चरित्र को भारत के जन-जन तक पहुंचा दिया। आज राम के चरित्र को एक आम मानवी समझता और जानता है तो उसका बड़ा श्रेय गोस्वामी तुलसीदास जी को जाता है। हालांकि, एक ग्रंथ से बहुत ऊपर है राम का नाम, जिसे कुछ पन्नों, चौपाइयों या श्लोकों में लिख देना या सिमट देना असंभव है।
भारत की हर भाषा में राम कथाएं हैं। हालांकि, सबसे ज्यादा संस्कृत और उड़िया भाषा में राम कथा को लिखा गया है। संस्कृत में 17 तरह की छोटी-बड़ी राम कथाएं हैं, जिनमें वाल्मीकि, वशिष्ठ, अगस्त्य और कालिदास जैसे ऋषियों-कवियों की रचनाएं हैं। उड़िया में 14 तरह की राम कथाएं हैं, लेकिन गोस्वामी तुलसीदास जी की राम चरित मानस सबसे ज्यादा प्रचलित राम कथा है, जिसमें राम को अवतारी और परब्रह्म बताया गया है।
राम केवल भारत तक ही सीमित नहीं हैं। राम विश्वव्यापी हैं। नेपाल, कंबोडिया, तिब्बत, पूर्वी तुर्किस्तान, इंडोनेशिया, जावा, इंडोचायना, बर्मा (वर्तमान में म्यांमार) और थाईलैंड में राम पर ग्रंथ हैं। नेपाल में भानुमुक्तकृत रामायण, सुंदरानंद रामायण और आदर्श राघव तो कंबोडिया में रामकर, तिब्बत में तिब्बती रामायण, पूर्वी तुर्किस्तान में खोतानी रामायण, इंडोनेशिया में ककबिनरामायण, जावा में सेरतराम, सैरीराम, रामकेलिंग, पातानी रामकथा, इंडोचायना में रामकेर्ति, खमैर रामायण, बर्मा में यूतोकी रामयगन और थाईलैंड में रामकियेन नाम के ग्रंथ राम को समर्पित हैं। इसके अलावा मलेशिया, श्रीलंका, जापान, फिलिपींस, मंगोलिया, कंबोडिया, भूटान, बाली, सुमात्रा, लाओस, की भी लोक संस्कृति में राम जिंदा हैं।
राम पर तीन सौ से ज्यादा राम कथाएं दुनिया के अलग-अलग भागों में प्रचलित हैं, जो आज भी चल रही हैं। तीन हजार लोककथाएं राम की कथा से जुड़ी हैं और किसी न किसी रूप में सुनी अथवा गाई जाती हैं। हालांकि, राम की सभी कथाएं महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित महाकाव्य रामायण से ही प्रेषित हैं। सिखों के दसवें और अंतिम गुरु गुरु गोविंद सिंह जी ने भी राम अवतार कथानम में 71 प्रकार के छंदों का प्रयोग करते हुए राम के चरित्र की सुंदर व्याख्या की है।
महान समाजवादी नेता राममनोहर लोहिया ने लिखा था कि आज जब दुनिया भर में हड़पने और विस्तार की महत्वाकांक्षा सिर उठाए खड़ी है तो राम की मर्यादा को याद करना जरूरी हो जाता है। राम का जीवन बिना हड़पे हुए फैलने की एक कहानी है। उनका निर्वासन देश को एक शक्ति केंद्र के अंदर बांधने का मौका था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी रामराज्य स्थापित करने की बात कही।
आज केवल राम का नाम लेने की नहीं, बल्कि राम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करने की आवश्यकता है।

