

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पहले आए आवेदनों का निराकरण किया जाएगा। फिलहाल अभी कोई नई डीपीआर नहीं बनाई जाएगी। पहले भेजी गई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) में जिन लोगों के आवेदन हैं, उसे पहले पूरा किया जाएगा। इसके बाद अगले वित्तीय वर्ष में नए आवेदनों को निकाय स्तर पर सर्वे कर लिस्ट भेजी जाएगी। इसके बाद ही शासन की अनुमति के बाद केंद्रीय मंत्रालय में नई डीपीआर भेजी जाएगी।
सूत्र बताते हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के जिन 18 लाख हितग्राहियों के मकान बनाने के लिए साय सरकार ने कैबिनेट में फैसला लिया है, उस पर जोरों पर काम चल रहा है। बता दें कि अनुपूरक बजट में भी 3799 करोड़ रुपए का इसका प्रावधान किया गया है। जानकारी के अनुसार पहले चरण में करीब 10 लाख आवेदनों का निराकरण करने किया जा रहा है, जिनके आवेदन पहले आ चुके थे। बाद में आए आवेदनों की जांच के बाद निराकरण किया जाएगा। बता दें कि भाजपा ने विधानसभा चुनाव में पीएम आवास को सबसे बड़ा मुद्दा बनाया था। इसके लिए भाजपा ने अपने स्तर पर लोगों से फार्म भी भरवाए थे। जिसमें करीब 9 लाख आवेदन आए थे।
राज्यांश नहीं मिलने से केंद्र ने की थी कटौती
बता दें कि प्रदेश में वर्तमान में प्रधानमंत्री आवास के तहत कुल 18 लाख 75 हजार 585 हितग्राही केंद्र की सामाजिक- आर्थिक जाति जनगणना-2011 की स्थायी प्रतीक्षा सूची ग्रामीण में दर्ज है। इस सूची से वर्ष 2016-2023 तक कुल 11,76,146 हितग्राहियों को आवास की स्वीकृति मिली है। इस प्रकार स्थाई प्रतीक्षा सूची 6,99,439 लक्ष्य प्राप्ति के लिए शेष है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2021-22 के लिए आवंटित 7,81,999 आवास के लक्ष्य को राज्यांश नहीं मिलने से वापस ले लिया था। साथ ही आवास प्लस के 8 लाख 19 हजार 999 हितग्राही परिवारों के लिए भी लक्ष्य नहीं मिल पाया था। अब राज्यांश और केंद्र सरकार से सहयोग मिलने पर ही आवास कार्य पूरा हो पाएगा
