साल का पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण 8 अप्रेल को होने जा रहा है। यह सूर्य ग्रहण अपने विशेषताओं के चलते अंतरिक्ष में होने वाला यह खगोलीय घटना अन्य ग्रहण से खास होने वाला है। यह ग्रहण चंद्रमा की खास स्थिति में होने की वजह से सूर्य ग्रहण काफी लंबा होने वाला है। खगोल शास्त्रियों के मुताबिक इस दिन सूर्य पृथ्वी से लगभग 7.05 मिनट तक नहीं दिखाई देगा जो खगोलीय घटनाओं में बहुत दुर्लभ माना जा रहा है। पिछले 50 वर्षों के बाद होने वाला यह घटना अगले 100 वर्षों तक यानि 2150 तक नहीं देखे जा सकेंगे।
खगोलीय घटनाओं में ग्रहण हर छह महीनों में एक बार नजर आता है। अंतरिक्ष की घटनाओं में रूचि रखने वालों के लिए ग्रहण एक रोमांचक अनुभव होता है, लेकिन अप्रेल 2024 का पहला सूर्य ग्रहण सभी वर्गों के लिए रोमांचक होने जा रहा है। अमेरिकी स्पेस एजेंसी नासा के मुताबिक 8 अप्रेल को होने वाला पूर्ण सूर्य ग्रहण पिछले 50 वर्षों के दौरान होने वाले ग्रहण में सबसे लंबा सूर्य ग्रहण होगा।

क्यों है लंबा सूर्य ग्रहण
नासा के वैज्ञानिकों के मुताबिक पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा 8 अप्रेल को चंद्रमा धरती से सिर्फ 3,60,000 किलोमीटर की दूरी पर होगा जो उनकी कक्ष से सबसे निकटतम होगा। पृथ्वी के करीब होने की वजह से चंद्रमा का आकार सामान्य से थोड़ा बड़ा दिखाई देगा और ज्यादा देर तक सूर्य को ढंकेगा और धरती पर अंधकार की लंबी अवधि होगी। वहीं, पृथ्वी और चंद्रमा ग्रहण के दिन सूर्य से अपनी औसत दूरी 1.5 करोड़ किलोमीटर बनाए रखेंगे। इन संयोगों के चलते सूर्य 7.5 मिनट तक नहीं नजर आएगा, जो कि सामान्य से काफी लंबी है। इसके पूर्व यह घटना आखिरी बार वर्ष 1973 में देखा गया था।
कब होता है सूर्य ग्रहण
पूर्ण सूर्य ग्रहण तब होता है, जब पृथ्वी और सूर्य की सीध के बीच में चंद्रमा आ जाता है। इसके चलते सूर्य का प्रकाश पृथ्वी पर पहुंचना रुक जाता है और पृथ्वी की सतह के एक हिस्से पर छाया पड़ती है। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान, चंद्रमा संपूर्ण सौर को ढंक लेता है। इस प्रक्रिया पर दिन के दौरान कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाता है। पिछली बार ऐसा 1973 में ग्रहण के दौरान हुआ था, लेकिन 2024 का सूर्य ग्रहण पिछले कई बार से काफी अलग अनुभव लेकर आने वाला है।
एक दुर्लभ ग्रहण
ग्रहण से एक दिन पहले जैसे ही चंद्रमा अपने निकटतम बिंदु पर पृथ्वी के करीब आएगा, एक दुर्लभ ब्रह्मांडीय संरेखण केंद्र चरण में आ जाएगा, जिससे खगोलीय घटना सामने आने पर यह केवल 3,60,000 किलोमीटर दूर रह जाएगा।यह निकटता एक अद्वितीय खगोलीय प्रदर्शन का वादा करती है, जिसमें चंद्रमा आकाश में सामान्य से थोड़ा बड़ा दिखाई देता है।

