छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में हाईकोर्ट का बड़ा आया है। 2003 में हुए सामने आएं पहले राजनीतिक हत्याकांड के सभी आरोपियों को कोर्ट ने 21 साल बाद उम्र कैद की सुनाई हैं। इनमें महापौर के एजाज ढेबर के भाई याया ढेबर, अभय गोयल, चिमन सिंह समेत 28 अभियुक्तों को आजीवन कैद की सजा सुनाई है।गौरतलब हैं कि रामावतार जग्गी एनसीपी के नेता थे। वह पूर्व दिवंगत केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी नेता थे। उनकी हत्या मौदहापारा थाने के पास की गई थी। इस हत्याकांड में पूर्व दिवंगत सीएम अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी को भी आरोपी बनाया गया था लेकिन उन्हें बाद में रिहा कर दिया गया था।
पुत्र सतीश जग्गी ने सरकार से मांगी सुरक्षा
कांग्रेस नेता और स्व. रामअवतार जग्गी के पुत्र सतीश जग्गी ने कहा, मुझे और मेरे परिवार को जान का खतरा है। मैंने सरकार से सुरक्षा मांगी है। क्योंकि मुझे कोर्ट के काम से लगातार बाहर आना-जाना करना पड़ता है, और मैं जिन लोगों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा हूँ वो किस प्रभावशाली वर्ग के हैं यह सभी जानते हैं।
सतीश जग्गी ने कहा, मेरे पिता की राजनीतिक हत्या हुई थी। और हत्या के पीछे गहरी साजिश रची गई थी। इस हत्या में बड़े राजनीतिक लोग सहित कई आपराधिक प्रवत्ति के लोग शामिल रहे हैं। 2003 से लगातार इस मामले की कानूनी लड़ाई परिवार के लोग लड़ रहे हैं। 21 सालों से जारी हमारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। हाईकोर्ट ने हमारे पक्ष में फैसला दिया है, और इस मामले के जो नामजद 27 आरोपी है उनकी उम्रकैद की सजा बरकरार रखा है।
जमानत में जो आरोपी अभी बाहर उन्हें वापस जेल जाना पड़ेगा, लेकिन इस मामले में आरोपी रहे अमित जोगी कोर्ट ने दोषमुक्त कर बरी कर दिया था। उनके खिलाफ भी लड़ाई जारी है।

