

वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बावजूद भारत सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है। मजबूत वृद्धि, मूल्य स्थिरता और बाहरी क्षेत्र के स्थिर दृष्टिकोण से भारत के आशाजनक आर्थिक प्रदर्शन को समर्थन मिल रहा है। इसके साथ ही, वैश्विक आर्थिक वृद्धि परिदृश्य एक बार फिर उत्थान की राह पर है। इससे मंदी की आशंकाएं घटी हैं और प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेजी की स्थिति बन रही है। हालांकि, वैश्विक स्तर पर तनाव चिंता का विषय बना हुआ है। वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को जारी मार्च की आर्थिक समीक्षा रिपोर्ट में कहा, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और आरबीआई ने भारत के लिए चालू वित्त वर्ष का वृद्धि संबंधी नजरिया सकारात्मक रखा हुआ है। यह बताता है कि वैश्विक स्तर पर मुश्किल हालातों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की बुनियाद मजबूत बनी हुई है। अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने हाल ही में जारी विश्व आर्थिक परिदृश्य (डब्ल्यूईओ) में 2023-24 के लिए भारत की वास्तविक जीडीपी की वृद्धि दर के अनुमान को 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7.8 फीसदी कर दिया है।
चुनौतियों के बावजूद अलग दिख रहा भारत
रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में प्रगति के संकेत दिख रहे हैं, लेकिन असमानताएं बरकरार हैं। प्रमुख संकेतक जहां आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि और भू-राजनीतिक तनाव में कमी का इशारा कर रहे हैं, वहीं हाल के संघर्षों से जोखिम पैदा हो रहे हैं। वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के साथ अलग दिख रहा है। भारत सभी क्षेत्रों में व्यापक आधार वाली वृद्धि दर्शा रहा है और वैश्विक वृद्धि के समर्थन में अपनी अहम भूमिका का दावा कर रहा है।
व्यापार घाटे में आई कमी
वैश्विक सुस्ती से भारत के निर्यात और आयात में नरमी आई है। 2023-24 में वस्तु व्यापार घाटे में कमी आई है। इसकी वजह…आयात की तुलना में निर्यात में कम गिरावट है। हालांकि, गैर-पेट्रोलियम और गैर-रत्न एवं आभूषण निर्यात ने पिछले कुछ माह में निरंतर वृद्धि के साथ जुझारूपन दिखाया है।
विदेशी मुद्रा भंडार : 11 माह के आयात के लिए पर्याप्त
देश का विदेशी मुद्रा भंडार भी अप्रैल, 2024 में सार्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया। यह भंडार 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त है।
