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  • राष्ट्रीय

जून में कम बरसेंगे बादल, IMD की रिपोर्ट ने बढ़ाई किसानों की चिंता

Nkc News Desk May 30, 2026

देश में मानसून का इंतजार कर रहे लोगों और खासकर किसानों के लिए मौसम विभाग की नई भविष्यवाणी चिंता बढ़ाने वाली है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अपने ताजा अपडेट में कहा है कि इस बार मानसून की बारिश सामान्य से कम रह सकती है और कई इलाकों में इसके पहुंचने में देरी भी हो सकती है

आईएमडी के मुताबिक इस बार देश में करीब 90% ही बारिश होने का अनुमान है, जो पहले के 92% अनुमान से कम है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर खेती और फसल उत्पादन पर पड़ सकता है।कई राज्यों में कम बारिश का अनुमानमौसम विभाग के अनुसार देश के कोर कृषि क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है, जबकि पूर्वोत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सामान्य वर्षा देखने को मिल सकती है।जून में भी कम बारिश की संभावनाIMD के मुताबिक जून महीने में भी बारिश सामान्य से कम रह सकती है, जिससे खरीफ सीजन की बुवाई पर असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में सामान्य या उससे अधिक बारिश की संभावना जताई गई है।अलग-अलग राज्यों में मानसून की एंट्री

केरल: 3 से 5 जूनमहाराष्ट्र (मुंबई सहित): 10 जून तकमध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़: 12 से 15 जूनउत्तर भारत: 25 जून से जुलाई के बीचकिसानों के लिए बढ़ी चिंताकम बारिश और मानसून में देरी से किसानों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर बारिश का पैटर्न ऐसा ही रहा तो खेती पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है। फिलहाल मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आने वाले दिनों में और अपडेट जारी किए जा सकते हैं।

Tags: IMD की रिपोर्ट कम बरसेंगे बादल किसानों की चिंता जून

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Next: ग्राम पंचायत विजयनगर में जनसमस्या निवारण शिविर में कृषि मंत्री हुए शामिल* जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती अपनाने किया प्रेरित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण ही सुशासन की पहचान – मंत्री श्री नेताम बलरामपुर, सुशासन को जन-जन तक पहुँचाने एवं आमजनों की समस्या का त्वरित निराकरण और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम छोर तक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत विजयनगर में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, अन्य जनप्रतिनिधिगण, वनमण्डलाधिकारी श्री आलोक बाजपेई, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए। इस दौरान शिविर में विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने स्टालों का अवलोकन कर प्राप्त आवेदनों एवं निराकरण की जानकारी ली। इस दौरान 05 बच्चों का अन्नप्राशन, 05 गर्भवती माताओं के गोदभराई की रश्म की गई। साथ विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री का वितरण किया गया। शिविर में मंत्री रामविचार नेताम ने संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है और यही सुशासन की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि शासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने एग्रीस्टेक में किसानों को पंजीयन कराने की बात कही उन्होंने कहा कि पंजीयन के अभाव में कई महत्वपूर्ण योजनाओं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, धान खरीदी, खाद-बीज प्राप्त करने में कठिनाई आ सकती है उन्होंने एग्रीस्टेक में अवश्य रूप से पंजीयन करने की बात कही। मंत्री श्री नेताम ने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक खाद एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखती है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित उत्पादन भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। मंत्री श्री नेताम ने किसानों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए टपक सिंचाई पद्धति अपनाने तथा दलहन सहित अन्य फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि आवश्यकता के अनुरूप उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लेने की बात कही। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जनता के प्रति जवाबदेही एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। शिविर में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं, मांगें और शिकायतें प्रस्तुत की। जिनका संबंधित विभागों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया गया। साथ ही शेष आवेदनों को निराकरण किया जा रहा है। सुशासन शिविर बना जल संरक्षण, जैविक खेती और स्वच्छता का जनजागरूकता मंच प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दे रहा सुशासन तिहार आम जनता की सहूलियत के लिए आयोजित किए जा रहे सुशासन शिविर अब सिर्फ समस्याओं के समाधान तक ही सीमित नहीं रह गया हैं, बल्कि ग्रामीणजनों को पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जागरूक कर रहा है। रामचन्द्रपुर विकासखंड के विजयनगर में लगे सुशासन शिविर में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण, नील हरित शैवाल, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन से जुड़े कई जीवंत मॉडल प्रदर्शित किया गया। शिविर में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर के साथ-साथ सोख्ता गड्ढा, जैविक खेती के लिए नील-हरित शैवाल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के जीवंत मॉडलों ने ग्रामीणों को आकर्षित किया। शिविर में जल संरक्षण की एक और बेहद आसान और असरदार तकनीक 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर, सोख्ता गड्ढा का सजीव मॉडल बनाकर लोगों को जागरूक किया गया। जो अतिरिक्त पानी या बारिश के जल को संरक्षण का बेहतर तरीका है। शिविर में बने इस मॉडल को देखकर कई ग्रामीणों ने इसे अपने घरों और हैंडपंपों के पास बनाने की बात कही। कृषि विभाग द्वारा नील-हरित शैवाल बनाने की जानकारी दी गई।। शिविर में एक छोटा तालाबनुमा ढांचा बनाकर इसे तैयार करने और इस्तेमाल करने की विधि दिखाई गई। साथ ही हरी खाद और संतुलित उर्वरक के सम्बंध में भी बताया गया। किसानों को बताया गया कि धान की फसल के लिए यह एक बेहतरीन प्राकृतिक नाइट्रोजन देने वाला जैव उर्वरक है। इसके इस्तेमाल से न केवल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और फसल की पैदावार सुधरती है, खेती की लागत कम करने का यह तरीका मौजूद किसानों को बेहद पसंद आया। पर्यावरण को साफ-सुथरा और सेहतमंद बनाए रखने के लिए शिविर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कचरा प्रबंधन का भी सजीव प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों को समझाया गया कि कैसे वे अपने घरों के गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। अलग-अलग रंगों के डस्टबिन के माध्यम से गीले कचरे से जैविक खाद बनाने और सूखे या खतरनाक कचरे के सही निपटान की जानकारी दी गई।

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ग्राम पंचायत विजयनगर में जनसमस्या निवारण शिविर में कृषि मंत्री हुए शामिल* जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती अपनाने किया प्रेरित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण ही सुशासन की पहचान – मंत्री श्री नेताम बलरामपुर, सुशासन को जन-जन तक पहुँचाने एवं आमजनों की समस्या का त्वरित निराकरण और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम छोर तक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत विजयनगर में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, अन्य जनप्रतिनिधिगण, वनमण्डलाधिकारी श्री आलोक बाजपेई, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए। इस दौरान शिविर में विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने स्टालों का अवलोकन कर प्राप्त आवेदनों एवं निराकरण की जानकारी ली। इस दौरान 05 बच्चों का अन्नप्राशन, 05 गर्भवती माताओं के गोदभराई की रश्म की गई। साथ विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री का वितरण किया गया। शिविर में मंत्री रामविचार नेताम ने संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है और यही सुशासन की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि शासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने एग्रीस्टेक में किसानों को पंजीयन कराने की बात कही उन्होंने कहा कि पंजीयन के अभाव में कई महत्वपूर्ण योजनाओं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, धान खरीदी, खाद-बीज प्राप्त करने में कठिनाई आ सकती है उन्होंने एग्रीस्टेक में अवश्य रूप से पंजीयन करने की बात कही। मंत्री श्री नेताम ने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक खाद एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखती है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित उत्पादन भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। मंत्री श्री नेताम ने किसानों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए टपक सिंचाई पद्धति अपनाने तथा दलहन सहित अन्य फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि आवश्यकता के अनुरूप उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लेने की बात कही। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जनता के प्रति जवाबदेही एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। शिविर में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं, मांगें और शिकायतें प्रस्तुत की। जिनका संबंधित विभागों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया गया। साथ ही शेष आवेदनों को निराकरण किया जा रहा है। सुशासन शिविर बना जल संरक्षण, जैविक खेती और स्वच्छता का जनजागरूकता मंच प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दे रहा सुशासन तिहार आम जनता की सहूलियत के लिए आयोजित किए जा रहे सुशासन शिविर अब सिर्फ समस्याओं के समाधान तक ही सीमित नहीं रह गया हैं, बल्कि ग्रामीणजनों को पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जागरूक कर रहा है। रामचन्द्रपुर विकासखंड के विजयनगर में लगे सुशासन शिविर में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण, नील हरित शैवाल, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन से जुड़े कई जीवंत मॉडल प्रदर्शित किया गया। शिविर में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर के साथ-साथ सोख्ता गड्ढा, जैविक खेती के लिए नील-हरित शैवाल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के जीवंत मॉडलों ने ग्रामीणों को आकर्षित किया। शिविर में जल संरक्षण की एक और बेहद आसान और असरदार तकनीक 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर, सोख्ता गड्ढा का सजीव मॉडल बनाकर लोगों को जागरूक किया गया। जो अतिरिक्त पानी या बारिश के जल को संरक्षण का बेहतर तरीका है। शिविर में बने इस मॉडल को देखकर कई ग्रामीणों ने इसे अपने घरों और हैंडपंपों के पास बनाने की बात कही। कृषि विभाग द्वारा नील-हरित शैवाल बनाने की जानकारी दी गई।। शिविर में एक छोटा तालाबनुमा ढांचा बनाकर इसे तैयार करने और इस्तेमाल करने की विधि दिखाई गई। साथ ही हरी खाद और संतुलित उर्वरक के सम्बंध में भी बताया गया। किसानों को बताया गया कि धान की फसल के लिए यह एक बेहतरीन प्राकृतिक नाइट्रोजन देने वाला जैव उर्वरक है। इसके इस्तेमाल से न केवल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और फसल की पैदावार सुधरती है, खेती की लागत कम करने का यह तरीका मौजूद किसानों को बेहद पसंद आया। पर्यावरण को साफ-सुथरा और सेहतमंद बनाए रखने के लिए शिविर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कचरा प्रबंधन का भी सजीव प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों को समझाया गया कि कैसे वे अपने घरों के गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। अलग-अलग रंगों के डस्टबिन के माध्यम से गीले कचरे से जैविक खाद बनाने और सूखे या खतरनाक कचरे के सही निपटान की जानकारी दी गई।
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ग्राम पंचायत विजयनगर में जनसमस्या निवारण शिविर में कृषि मंत्री हुए शामिल* जल संरक्षण और प्राकृतिक खेती अपनाने किया प्रेरित जनसमस्याओं के त्वरित निराकरण ही सुशासन की पहचान – मंत्री श्री नेताम बलरामपुर, सुशासन को जन-जन तक पहुँचाने एवं आमजनों की समस्या का त्वरित निराकरण और शासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ अंतिम छोर तक सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सुशासन तिहार का आयोजन किया जा रहा है। इसी कड़ी में विकासखंड रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत विजयनगर में कृषि मंत्री रामविचार नेताम के मुख्य आतिथ्य में जनसमस्या निवारण शिविर आयोजित किया गया। इस अवसर पर जिला पंचायत उपाध्यक्ष धीरज सिंह देव, अन्य जनप्रतिनिधिगण, वनमण्डलाधिकारी श्री आलोक बाजपेई, जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर सहित शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन शामिल हुए। इस दौरान शिविर में विभागों द्वारा स्टॉल लगाकर विभागीय योजनाओं की जानकारी दी गई। उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने स्टालों का अवलोकन कर प्राप्त आवेदनों एवं निराकरण की जानकारी ली। इस दौरान 05 बच्चों का अन्नप्राशन, 05 गर्भवती माताओं के गोदभराई की रश्म की गई। साथ विभिन्न हितग्राहीमूलक योजनाओं के तहत हितग्राहियों को सामग्री का वितरण किया गया। शिविर में मंत्री रामविचार नेताम ने संबोधित करते हुए कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों के माध्यम से आमजनों की समस्याओं का त्वरित निराकरण किया जा रहा है और यही सुशासन की वास्तविक पहचान है। उन्होंने कहा कि शासन जनता की समस्याओं के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है तथा प्रत्येक पात्र व्यक्ति को योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने एग्रीस्टेक में किसानों को पंजीयन कराने की बात कही उन्होंने कहा कि पंजीयन के अभाव में कई महत्वपूर्ण योजनाओं प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, धान खरीदी, खाद-बीज प्राप्त करने में कठिनाई आ सकती है उन्होंने एग्रीस्टेक में अवश्य रूप से पंजीयन करने की बात कही। मंत्री श्री नेताम ने रासायनिक उर्वरकों के दुष्प्रभावों की जानकारी देते हुए किसानों को जैविक खाद एवं प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक खेती न केवल भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखती है, बल्कि गुणवत्तापूर्ण एवं सुरक्षित उत्पादन भी सुनिश्चित करती है। उन्होंने कहा कि जैविक खेती को बढ़ावा देकर किसान उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी आय में भी वृद्धि कर सकते हैं। मंत्री श्री नेताम ने किसानों को जल संरक्षण के महत्व से अवगत कराते हुए टपक सिंचाई पद्धति अपनाने तथा दलहन सहित अन्य फसलों के उत्पादन को बढ़ावा देने की सलाह दी। उन्होंने जल संरक्षण एवं प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर जोर देते हुए कहा कि संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि आवश्यकता के अनुरूप उपयोग किया जाना चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उनका संरक्षण सुनिश्चित हो सके। साथ ही पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रत्येक व्यक्ति को कम से कम एक पौधा लगाने का संकल्प लेने की बात कही। उन्होंने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जनता के प्रति जवाबदेही एवं संवेदनशीलता के साथ कार्य करने का आह्वान किया। शिविर में ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं, मांगें और शिकायतें प्रस्तुत की। जिनका संबंधित विभागों द्वारा प्राथमिकता के आधार पर निराकरण किया गया। साथ ही शेष आवेदनों को निराकरण किया जा रहा है। सुशासन शिविर बना जल संरक्षण, जैविक खेती और स्वच्छता का जनजागरूकता मंच प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण का संदेश दे रहा सुशासन तिहार आम जनता की सहूलियत के लिए आयोजित किए जा रहे सुशासन शिविर अब सिर्फ समस्याओं के समाधान तक ही सीमित नहीं रह गया हैं, बल्कि ग्रामीणजनों को पर्यावरण संरक्षण के लिए भी जागरूक कर रहा है। रामचन्द्रपुर विकासखंड के विजयनगर में लगे सुशासन शिविर में जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण, नील हरित शैवाल, ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन से जुड़े कई जीवंत मॉडल प्रदर्शित किया गया। शिविर में जल संरक्षण एवं भू-जल संवर्धन के लिए 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर के साथ-साथ सोख्ता गड्ढा, जैविक खेती के लिए नील-हरित शैवाल और ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के जीवंत मॉडलों ने ग्रामीणों को आकर्षित किया। शिविर में जल संरक्षण की एक और बेहद आसान और असरदार तकनीक 5 प्रतिशत मॉडल रिचार्ज स्ट्रक्चर, सोख्ता गड्ढा का सजीव मॉडल बनाकर लोगों को जागरूक किया गया। जो अतिरिक्त पानी या बारिश के जल को संरक्षण का बेहतर तरीका है। शिविर में बने इस मॉडल को देखकर कई ग्रामीणों ने इसे अपने घरों और हैंडपंपों के पास बनाने की बात कही। कृषि विभाग द्वारा नील-हरित शैवाल बनाने की जानकारी दी गई।। शिविर में एक छोटा तालाबनुमा ढांचा बनाकर इसे तैयार करने और इस्तेमाल करने की विधि दिखाई गई। साथ ही हरी खाद और संतुलित उर्वरक के सम्बंध में भी बताया गया। किसानों को बताया गया कि धान की फसल के लिए यह एक बेहतरीन प्राकृतिक नाइट्रोजन देने वाला जैव उर्वरक है। इसके इस्तेमाल से न केवल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता बढ़ती है और फसल की पैदावार सुधरती है, खेती की लागत कम करने का यह तरीका मौजूद किसानों को बेहद पसंद आया। पर्यावरण को साफ-सुथरा और सेहतमंद बनाए रखने के लिए शिविर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के तहत कचरा प्रबंधन का भी सजीव प्रदर्शन किया गया। ग्रामीणों को समझाया गया कि कैसे वे अपने घरों के गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके पर्यावरण को सुरक्षित रख सकते हैं। अलग-अलग रंगों के डस्टबिन के माध्यम से गीले कचरे से जैविक खाद बनाने और सूखे या खतरनाक कचरे के सही निपटान की जानकारी दी गई।

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May 29, 2026

ओनर: स्नेहलता पटेल
7566699181

एडिटर: ललित यादव
7693947100

Address: K-13, Moti Nagar, In front of Sharda petrol pump, beside Neha medical, Raipur, Chhattisgarh 492001.
Mobile No.: 7693947100
Email: nkcnewscg@gmail.com

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