Skip to content
September 6, 2026
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
NKC NEWS

NKC NEWS

News Portal Of Chhattisgarh

Connect with Us

  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram

Tags

adhytma education Feature health krishi lekh life style loksabha chunaw mousam odisha popular sampadikiy science Trending Uncategorized vastu weather अन्तर्राष्ट्रीय अपराध कृषि खेल छत्तीसगढ़ धर्म मनोरंजन राजनीति राष्ट्रीय विश्व व्यापार

Categories

  • adhytma
  • education
  • Feature
  • health
  • krishi
  • lekh
  • life style
  • loksabha chunaw
  • mousam
  • odisha
  • popular
  • sampadikiy
  • science
  • Trending
  • Uncategorized
  • vastu
  • weather
  • अन्तर्राष्ट्रीय
  • अपराध
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • व्यापार
  • Home
  • छत्तीसगढ़
  • राष्ट्रीय
  • अन्तर्राष्ट्रीय
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • व्यापार
  • Home
  • बुराई पर अच्छाई की विजय का ही प्रतीक है विजयादशमी
  • adhytma
  • Feature
  • lekh

बुराई पर अच्छाई की विजय का ही प्रतीक है विजयादशमी

Nkc News Desk October 11, 2024

बुराई पर अच्छाई की विजय का ही प्रतीक है विजयादशमी – हर युग में भगवान ने अवतार लेकर पृथ्वी से पाप और पापियों का संहार किया है! त्रेता युग में भी ईश्वर ने राम के रूप में अवतार लेकर उस समय के घोर अत्याचारी लंकापति रावण का नाश किया या! बुराई पर अच्छाई की विजय का ही प्रतीक है विजयादशमी! रामरुपी सत्य की रावण रूपी असत्य प्रवृत्तियों पर यह विजय हर युगों में होती रहेगी! बुराई पर अच्छाई की यह विजय आने वाले भविष्य के युगों में भी तबतक होती रहेगी, जबतक थोड़े बहुत लोग धार्मिक-आध्यात्मिक प्रेरणा से भगवान राम के जीवन- आचरण को अपने जीवन में मर्यादित ढंग से लागू करते रहेंगे। जैसे रावण असूरों का राजा होते हुए भी स्वयं असुर नहीं था। उसकी प्रवृत्तिर्वा दैत्यों जैसी असुर प्रकृति की थी तभी उसे असुराधिपति का संबोधन दिया गया। हालांकि रावण ब्राम्हण कुल में पैदा हुआ था। वह विश्रवा ऋषि का पुत्र था, उसकी माता का नाम कैकसी था। धनपति कुबेर उसका सौतेला भाई था, वही कुबेर देवताओं की श्रेणी में गिने जाते हैं। धन के देवता कुबेर कहलाते हैं। रावण अपनी अपरिमित शक्ति के कारण मदान्ह हो गया था। उसने अपने भाई को अर्थात कुबेर को भी नहीं छोड़ा था, उसने कुबेर से युद्ध करके उसका पुष्पक विमान छीन लिया। बाद में रावण ने इन्द्र, वरुण, यक्ष और यम आदि अनेक देवताओं को पराजित किया था। रावण कपिराज बाली को देखकर दुम दबाकर भागता था, बाली से वह कभी नहीं जीत पाया।

सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”
देवताओं से अमरत्व छीनकर रावण ने लंका को अपनी राजधानी बनाया। ग्रंथों में उल्लेखित है कि रावण की लंका में समस्त प्रकार की विलासिता, एश्वर्य और आमोद-प्रमोद के अप्रतिम साधन थे। ऐसी एश्वर्य’ शाली लंका में राज कर रहा था रावण! ऐसा सुख तो देवताओं के लिये भी दुर्लभ था। बाल्मिकी रामायण के अनुसार पर्वत शिखर पर स्थित हजारों बलशाली राक्षसों के पहरे में रावण का राजभवन स्वर्ण का बना हुआ था। राजभवन के चारो ओर जल से भरी तथा कमल पुष्पों से सुशोभित खाई थी इस भवन में सिर्फ स्वर्ण ही नहीं था, बल्कि उसमें जगह जगह मोती माणिक्य भी जड़े हुये थे। रावण का अंतःपुर चंदन, गुग्गल आदि सुगंधित द्रव्यों से सुवासित था। वहां बैठक के लिये अनेक रत्न जडित आसन सहित स्थान-स्थान पर रत्नों के ढेर तो कहीं-कहीं विविध प्रकार के द्रव्य एकत्रित थे। एक विशाल रमणीय शाला भी थी जो अत्यंत स्वच्छ गणियों की सीढ़ियों से सुशोभित था। इतने वैभवशाली जीवन का अधिष्ठाता होने के बाद भी रावण अहंकार, लोभ के वश में होकर अपने सर्वनाश को आमंत्रित कर बैठा था। प्रकांड पांडित्य एवं विद्वान होने के बाद भी रावण की मति भ्रष्ट हो गई।

दशरथपुत्र मर्यादा पुरुषोत्तम राम भारतीय संस्कृति के प्रतिनिधि पुरुष हैं। वह मात्र हिंदुओं के ही आराध्य नहीं, बल्कि किसी भी धर्म को मानने वाले क्यों न हो, सभी के लिये भी आदरणीय पुरुष हैं। इस बात का प्रमाण इसी से मिल जाता है कि वाल्मिकी, तुलसी के साथ-साथ रहीम सहित कई मुस्लिम कवियों ने भी राम का महिमा गान किया है। रावण से युद्ध के पूर्व श्रीराम ने अपने वनवास की अवधि का बहुत लंबा समय चित्रकूट में भी बिताया था। ऐसी मान्यता है कि वनवास काल के 12 वर्ष राम ने चित्रकूट के कामदगिरि में बिताये थे। इसीलिये चित्रकूट एवं कामदगिरि पर्वत की आज विशेष धार्मिक महत्ता है ।

रामरावण युद्ध की अगर बात होती है तो अंजनी पुत्र हनुमान का उल्लेख जरुर आयेगा । राम के सपत्निक वनवास गमन की बात होती है तो उनके अनुज श्री लक्ष्मण का उल्लेख भी जरुर होगा। रावण ने कपि सेना को देखकर राम की सेना को, बहुत हल्के से लिया था। उसने अपनी विशाल सेना और पराक्रमी भयंकर -बलशाली असुर सेना के साथ कपि सेना को तुलना योग्य भी नहीं समझा। यह भी उसकी उदात्त अहंकारिता एवं मतिभ्रम का परिचायक सिद्ध हुआ। और कई दिनों के घोर युद्धोपरांत रावण की मृत्यु राम के हाथों हुई।

वाल्मिकी और तुलसी कृत रामायण की गणना के अनुसार रावण का वध आश्विन शुक्ल नवमी के दिन हुआ तो समयादर्श रामायण में उल्लेखित है कि द्वादशी से चतुदर्शी तक 18 दिन तकनिरंतर युद्ध हुआ और चतुर्दशी के दिन रावण का वध हुआ था।.यहां पर यह कहना समीचीन होगा कि राम और रावण के मध्य घटित हुआ महायुद्ध दो विभिन्न संस्कृतियों के बीच लड़ा गया युद्ध था। दो विभिन्न जीवन पद्धति, सत्य और असत्य, धर्म और अधर्म अंततः यह भी कह सकते हैं कि पाप और पुण्य के बीच लड़ा गया यह युद्ध था। राम कथा भारतीय संस्कृति का आधार और मानव जीवन की आत्मा है, जिसका विकसित मूल्य प्रत्येक देशकाल के लिये चिर शाश्वत है। राम रावण का युद्ध मात्र पौराणिक काल की बात नही हैं, इसकी प्रांसगिकता आज भी दृष्टिगोचर हो रही है, साथ ही इसकी विशालता भविष्य में भी झांक रही है। हर दशहरे पर रावण की ऊंचाई बढ़ जाती है। और उसका बाहरी आवरण अधिक आकर्षित होता जाता है। रावण के पुतले के साथ उसका आवरण तो भस्म हो जाता है, पर क्या आपने स्वयं अपने अंदर और बाहर सभी जगह उसका आचरण विभिन्न रूपों में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से महसूस नहीं किया है? क्या रावण की रावणत्वता भी उसी के साथ खत्म हो गई हैं? …नहीं। आज भी हमारे चारों और यह बुराई किसी न किसी रूप में विद्यमान है। हम सभी को दृढ़प्रतिज्ञ होकर राम द्वारा दिखाये गये मार्ग का किंचित भी अनुसरण कर लिया जाता है, तो हम भी आज के राम और रावण युद्ध के विजेता कहलायेंगे, और हम भी राममय हो जायेंगे। अंत में सभी सुधि पाठकों एवं सर्व जनता जनार्दन को विजयादशमी की लाख लाख हार्दिक बधाईयां एवं जीवन संग्राम में विजयी होने की ढेरों शुभकामनायें!

लेखक: सुरेश सिंह बैस “शाश्वत”

Tags: बुराई पर अच्छाई की विजय विजयादशमी

Post navigation

Previous NABARD सर्वे: 5 साल में 57% बढ़ी ग्रामीण आय, लेकिन कर्ज़ के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी
Next राजधानी में 2 दिन में 1200 रुपए बढ़ा सोना

Related Stories

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में सुधार: सुशासन, डिजिटलीकरण और जन-राहत का नया सवेरा
  • lekh
  • छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता में सुधार: सुशासन, डिजिटलीकरण और जन-राहत का नया सवेरा

August 3, 2026
कलियुग के साक्षात भगवान हैं श्रीजगन्नाथ स्वामी’ — पुरंदर मिश्रा
  • adhytma
  • छत्तीसगढ़

कलियुग के साक्षात भगवान हैं श्रीजगन्नाथ स्वामी’ — पुरंदर मिश्रा

July 24, 2026
छत्तीसगढ़ में भी लागू होगा UCC, शीतकालीन सत्र में किया जाएगा पेश…: CM साय
  • Feature
  • छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में भी लागू होगा UCC, शीतकालीन सत्र में किया जाएगा पेश…: CM साय

July 24, 2026

Recent Posts

  • वन महोत्सव में केदार कश्यप का पर्यावरण संकल्प: ‘एक पेड़, एक जीवन’ का दिया संदेश
  • अदाणी फाउंडेशन की विज़न केयर पहल से 41 गांवों के चार हजार ग्रामीण लाभान्वित
  • मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से भटगांव विधानसभा को बड़ी सौगात, बुंदिया और बड़सरा में खुलेंगे नए धान उपार्जन केंद्र
  • हमारी सरकार ने वन संरक्षण के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों की आय और उनकेपरिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी है: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप
  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्री केदार कश्यप के प्रयासों से बदलेगी सुकमा की तस्वीर

Categories

  • adhytma
  • education
  • Feature
  • health
  • krishi
  • lekh
  • life style
  • loksabha chunaw
  • mousam
  • odisha
  • popular
  • sampadikiy
  • science
  • Trending
  • Uncategorized
  • vastu
  • weather
  • अन्तर्राष्ट्रीय
  • अपराध
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विश्व
  • व्यापार

You may have missed

वन महोत्सव में केदार कश्यप का पर्यावरण संकल्प: ‘एक पेड़, एक जीवन’ का दिया संदेश
  • छत्तीसगढ़

वन महोत्सव में केदार कश्यप का पर्यावरण संकल्प: ‘एक पेड़, एक जीवन’ का दिया संदेश

September 3, 2026
अदाणी फाउंडेशन की विज़न केयर पहल से 41 गांवों के चार हजार ग्रामीण लाभान्वित
  • छत्तीसगढ़
  • व्यापार

अदाणी फाउंडेशन की विज़न केयर पहल से 41 गांवों के चार हजार ग्रामीण लाभान्वित

September 3, 2026
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से भटगांव विधानसभा को बड़ी सौगात, बुंदिया और बड़सरा में खुलेंगे नए धान उपार्जन केंद्र
  • छत्तीसगढ़

मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से भटगांव विधानसभा को बड़ी सौगात, बुंदिया और बड़सरा में खुलेंगे नए धान उपार्जन केंद्र

September 1, 2026
हमारी सरकार ने वन संरक्षण के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों की आय और उनकेपरिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी है: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप
  • छत्तीसगढ़

हमारी सरकार ने वन संरक्षण के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों की आय और उनकेपरिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी है: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप

September 1, 2026

ओनर: स्नेहलता पटेल
7566699181

एडिटर: ललित यादव
7693947100

Address: K-13, Moti Nagar, In front of Sharda petrol pump, beside Neha medical, Raipur, Chhattisgarh 492001.
Mobile No.: 7693947100
Email: nkcnewscg@gmail.com

  • वन महोत्सव में केदार कश्यप का पर्यावरण संकल्प: ‘एक पेड़, एक जीवन’ का दिया संदेश
  • अदाणी फाउंडेशन की विज़न केयर पहल से 41 गांवों के चार हजार ग्रामीण लाभान्वित
  • मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के प्रयासों से भटगांव विधानसभा को बड़ी सौगात, बुंदिया और बड़सरा में खुलेंगे नए धान उपार्जन केंद्र
  • हमारी सरकार ने वन संरक्षण के साथ-साथ वनोपज संग्राहकों की आय और उनकेपरिवारों के कल्याण को प्राथमिकता दी है: वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री  केदार कश्यप
  • मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और मंत्री केदार कश्यप के प्रयासों से बदलेगी सुकमा की तस्वीर
  • Home
  • छत्तीसगढ़
  • राष्ट्रीय
  • अन्तर्राष्ट्रीय
  • अपराध
  • खेल
  • मनोरंजन
  • राजनीति
  • व्यापार
  • Facebook
  • Twitter
  • Linkedin
  • VK
  • Youtube
  • Instagram
Copyright © All rights reserved. | DarkNews by AF themes.