नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत लोकतंत्र की जननी है और संविधान की 75 साल की यात्रा दुनिया के सबसे बड़े और महान लोकतंत्र की यादगार यात्रा है। ‘भारत के संविधान के 75 वर्षों की गौरवशाली यात्रा’ पर चर्चा के दौरान लोकसभा में बोलते हुए पीएम ने कहा कि संविधान के 75 वर्षों में देश की यात्रा के मूल में संविधान निर्माताओं की दृष्टि है। पीएम नरेंद्र मोदी ने भारत के संविधान को अपनाने की 75वीं वर्षगांठ पर चर्चा के दौरान लोकसभा में भारत@2047 की राह पर देश के लिए 11 संकल्प रखे।प्रधानमंत्री मोदी ने संविधान पर चर्चा के दौरान लोकसभा में कहा कि, बाबा साहब को भारत रत्न देने का काम भी तब संभव हुआ जब कांग्रेस सत्ता से बाहर हुई। वोटबैंक की राजनीति में डूबे हुए लोगों ने आरक्षण के अंदर नुक्ताचीनी करने का काम किया है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान SC-ST और OBC का हुआ है।
पीएम मोदी ने सदन में रखे ये 11 संकल्प
1. महिलाओं के नेतृत्व में विकास (Women-led Development) को प्राथमिकता दी जाए।
2- राजनीतिक स्वार्थ के लिए संविधान को हथियार न बनाया जाए, संविधान का सम्मान हो।
3- “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ हर क्षेत्र और समाज को विकास का समान लाभ मिले।
4- भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाए।
5- देश के कानूनों और परंपराओं के पालन में गर्व का भाव जागृत हो।

6. परिवारवाद से राजनीति को मुक्त कर लोकतंत्र को सशक्त बनाया जाए।
7- देश की सांस्कृतिक विरासत पर गर्व किया जाए और गुलामी की मानसिकता से मुक्ति मिले।
8- धर्म के आधार पर आरक्षण न दिया जाए और जिन वर्गों को संविधान के तहत आरक्षण मिल रहा है, वह जारी रहे।
9- भारत के सभी नागरिक और सरकार अपने-अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करें।
10- राज्यों के विकास के माध्यम से राष्ट्र के विकास को सुनिश्चित किया जाए।
11-“एक भारत, श्रेष्ठ भारत” के लक्ष्य को सर्वोपरि रखा जाए।
