ईडी ने छत्तीसगढ़ शराब घोटाले मामले में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में आबकारी मंत्री रहे कवासी लखमा को गिरफ्तार किया है। उन्हें 21 जनवरी तक रिमांड पर लिया है। कोर्ट ने उन्हें सात दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। तीसरी बार पूछताछ के लिये पहुंचे कवासी लखमा को ईडी ने अरेस्ट किया। उनके गिरफ्तारी के बाद प्रदेश की सियासत गरमाई हुई है। पक्ष और विपक्ष में जमकर बयानबाजी के तीर चल रहे हैं। दूसरी और इस घोटोल में ईडी के वकील सौरभ पांडेय ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कवासी लखमा को हर महीने दो करोड़ रुपये कमीशन के तौर पर मिलते थे। उन्हीं पैसों से उन्होंने कांग्रेस भवन और अपना अलीशान घर बनवाया है।

इस केस की सुनवाई के बाद चर्चा में वकील पांडेय ने बताया कि 36 महीने में प्रोसीड ऑफ क्राइम 72 करोड़ रुपए का है। ये राशि उनके बेटे हरीश कवासी के घर के निर्माण और सुकमा कांग्रेस भवन के निर्माण में लगाई गई है। गिरफ्तार अरुणपति त्रिपाठी और अरविंद सिंह ने पूछताछ में बताया था कि पूर्व मंत्री कवासी लखमा के पास हर महीने कमीशन जाता था। शराब कर्टल से हर महीने लखमा को 50 लाख रुपए मिलते थे। 50 लाख रुपए के ऊपर भी डेढ़ करोड़ रुपए और दिया जाता था। इस तरह 2 करोड़ रुपए उन्हें हर महीने कमीशन के रूप में मिलता था।
उन्होंने कहा कि लगभग 36 महीने तक यह घोटाला चला। इस हिसाब से मंत्री को 72 करोड़ रुपये मिले हैं। आबकारी विभाग में काम करने वाले ऑफिसर इकबाल खान और जयंत देवांगन ने बताया कि वे पैसों का जुगाड़ कर उनको भेजते थे। कन्हैया लाल कुर्रे के जरिए पैसों के बैग तैयार कर सुकमा भेजा जाता था। जगन्नाथ साहू और इनके बेटे हरीश लखमा के यहां जब सर्चिंग की गई डिजिटली सबूत मिले थे। इस डिजिटल सबूत की जब जांज की गई तो मालूम चला कि इस पैसे का उपयोग बेटे हरीश का घर बनवाने और सुकमा में कांग्रेस भवन बनवाने में किया गया है।
इतना ही नहीं वकील पांडेय ने आगे बताया कि लखमा ने जांच में भी पूरी तरह से सहयोग नहीं किया। जो सबूत हैं उन्हें नष्ट करने की कोशिश हो सकती है। इस वजह से उन्हें गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद उन्हें कोर्ट में पेश किया गया , जहां कोर्ट ने सात दिन की न्यायिक रिमांड में भेजाहै। हमने कोर्ट से 14 दिन के न्यायिक रिमांड मांगी थी पर अदालत ने सात दिनों की रिमांड दी है। इस केस की अगली सुनवाई 21 जनवरी को होगी।
