डुबान प्रभावितों के साथ न्याय करो के नारे के साथ सैकड़ों ग्रामीणों ने धमतरी कलेक्ट्रेट का घेराव किया.
धमतरी: गंगरेल बांध के विस्थापितों ने एक बार फिर से आंदोलन शुरू कर दिया है. गुरुवार को गांधी मैदान से पैदल रैली निकालकर डूब प्रभावित कई गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने कलेक्ट्रट का घेराव किया. डूब प्रभावितों ने प्रशासन से पुनर्वास के तहत विस्थापन की मांग की. उनका कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी प्रशासन अपनी मनमानी कर रहा है.

गंगरेल बांध डूब प्रभावितों का प्रदर्शन: साल 1975 में जब गंगरेल बांध बना तब 52 गांव डूब गए थे. इन गांवों के सैकड़ों विस्थापित परिवारों का पुनर्वास किया जाना था. लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोगों का पुनर्वास नहीं हो पाया है. डूब प्रभावितों ने इसके लिए हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. पीड़ितों ने बताया कि साल 2020 में कोर्ट ने विस्थापितों के पक्ष में फैसला दिया और 3 महीने के अंदर सभी याचिकाकर्ताओं के पुनर्वास का आदेश दिया. लेकिन आज 4 साल बाद भी वे अपने ने हक से वंचित है. पीड़ितों ने शासन प्रशासन पर हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना का आरोप लगाते हुए जल्द से जल्द पुनर्वास करवाने की मांग दोहराई है.
गंगरेल बांध डूब प्रभावितों का प्रदर्शन
हमारी ये मांग है कि डुबान प्रभावित लोगों को बसाना पड़ेगा. हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी जिला प्रशासन काम नहीं कर रहा है. लगभग 1000 परिवार यहां वहां भटक रहे हैं. हम चाहते हैं कि पुनर्वास के तहत हमें जमीन के बदले जमीन मिले. -राम नवरे निषाद, डूब प्रभावित
सरकार हमारे मांग की अवहेलना कर रही है. हमारी मांग है कि हमें पुनस्थापन करना चाहिए. साल 2020 में हाईकोर्ट का आदेश मिलने के बाद भी हमें न्याय नहीं दिया जा रहा है. -राज नंदन सिन्हा, डूब प्रभावित
बताया गया कि गंगरेल बांध डूब प्रभावितों का कहना है कि कई गांवों में रहने वाले लोग निम्न गरीब वर्ग से आते हैं. संबंधित विभाग व शासन प्रशासन को बार-बार आवेदन निवेदन के बाद भी न्याय संगत कार्रवाई नहीं की जा रही है जिससे उन्हें कई तरह की आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ रही है.
