बीजापुर: भारत की ओर से स्पेस में कदम रखने वाले शुभांशु से नक्सलगढ़ के बच्चे भी प्रेरित हैं और इनके सपनों को पंख देने का काम बीजापुर जिला प्रशासन ने कर रहा है. हम बात कर रहे हैं बीजापुर के चुनिंदा दस स्कूलों की जहां हाल ही में डिजिटल और उपकरणों से लैस एस्ट्रोनॉमी लैब तैयार किए गए हैं. यहां बच्चे अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई के साथ खगोलीय घटनाओं का डेटा एनालिसिस के साथ खगोल विज्ञान के सिद्धांत और उसकी अवधारणा को करीब से समझ सकेंगे.

इस लैब की खासियत जानिए: विशेषज्ञों के हाथों तैयार इस लैब की खासियत है कि, यहां कई तरह के उपकरण मौजूद हैं. इन उपकरण से खगोलीय घटना, उल्का पिंड, धुमकेतु, चंद्र ग्रहण, सूर्य ग्रहण सहित ग्रहों के आरोही, अवरोही क्रम जैसी खगोलीय जानकारी दी जाएगी. साथ ही ग्रहों की वस्तु स्थिति, ज्वालामुखी, भूकंप, ऋतु परिवर्तन जैसी घटनाओं की भी जानकारी उपकरणों के माध्यम से दी जाएगी. लैब में बच्चों को टेलिस्कोप का प्रयोग करते खगोलीय पिंडों का अवलोकन कराया जा रहा है.
इस एस्टोनॉमी लैब में साइंस से जुड़ी हर तरह की एक्सपीरिमेंट्स हैं. वीआर सेट भी है जिससे बच्चे एजुकेशनल वीडियो देख सकेंगे. जिले के दूरस्थ एरिया को भी ये लैब कवर कर रहे हैं. पामेड़ में भी हमने इसे डेवलप किया है- संबित मिश्रा, कलेक्टर
पहले बच्चों को एस्टोनॉमी से जुड़े तथ्य सिर्फ थ्योरी के रूप में बताए जाते थे. प्रैक्टिकल रूप में इनके पास कुछ नहीं था. अब लैब डेवलप होने से यहां मौजूद एक्विपमेंट्स से सूर्य, चंद्रमा समेत कई ग्रहों को अच्छे से समझ पा रहे हैं- अमित गांधरला, प्रिंसिपल
इसके साथ डेटा विशलेषण का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है.बस्तर संभाग में बीजापुर इस तरह का प्रयोग करने वाला वह पहला जिला बन चुका है, जो कभी गोलियों की गूंज और धमाकों की आवाजा से थर्राया करता था, लेकिन शिक्षा के क्षेत्र में इस अभिनव पहल निश्चित ही आगे चलकर कोई कल्पना चावल, शुभांशु बन कर निकलेगा.
कौन हैं शुभांशु शुक्ला: शुभांशु भारत के एस्ट्रोनॉट हैं जो भारत, अमेरिका, पोलैंड और हंगरी के एक जॉइंट मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में जाने वाले पहले भारतीय बने हैं. ये सभी एस्ट्रोनॉट्स 14 दिन के मिशन पर स्पेस स्टेशन गए हैं. इस मिशन का नाम Axiom Mission 4 है. इस मिशन के तहत स्पेस में खेती करने, इंसानों की सेल्स और टिश्यूज़ के डेवलप होने समेत कई प्रयोग किए जाएंगे.
आपको बता दें कि 25 जून को भारतीय समयानुसार दोपहर 12 बजे शुभांशु शुक्ला ने अपने 3 अन्य साथी एस्ट्रोनॉट्स के साथ अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित स्पेसएक्स के स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स के रॉकेट Falcon 9 के माध्यम से उड़ान भरी थी. इस रॉकेट ने शुभांशु शुक्ला के ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट को पृथ्वी की निचली कक्षा तक 8 मिनट में पहुंचा दिया था. उसके बाद ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट ने 26 जून को भारतीय समयानुसार शाम 4 बजे इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन से सफलतापूर्वक डॉक किया और करीब 5:54 मिनट पर शुभांशु शुक्ला समेत अन्य अंतरिक्ष यात्रियों ने इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन में कदम रखा.
