बिलासपुर। शहर से दस किलो मीटर दूर नगर पंचायत बोदरी के वार्ड नंबर 10 डडहा में आजादी के बाद से सड़क नहीं बन पाई है। जिससे आज तक इस वार्ड में एंबुलेंस वाहन भी नहीं जाती है। गर्भवती महिला हो या कोई भी व्यक्ति के बीमार पड़ जाने पर कोई सरकारी मदद नहीं मिलती है। यहां के लोग कई सालों से जर्जर सड़क से ही गुजारा करते आ रहे हैं। नगर पंचायत होने के बाद भी वार्ड डडहा में सड़क निर्माण नहीं हो सका है। यहां के रहवासी जनप्रतिनिधि से लेकर अफसरों से गुहार लगाते थक गए, पर कोई ध्यान नहीं दिया।

वार्ड नंबर 10 डडहा से ढाई किलो मीटर की कच्ची सड़क नगपुरा होते हुए सिरिगट्टी तक जाती है। यहां की आबादी करीब दो हजार है। महिलाएं व पुरूष प्रतिदिन पैदल मजदूरी करने सिरगिट्टी के फैक्ट्री जाते हैं। यह सड़क आजादी के बाद से आज तक नहीं बन पाई है। सड़क के चारों तरफ छोटे-बड़े पत्थर बिछा है। पैदल चलने पर भी पैर भी चोटिल हो जाता है।
सबसे ज्यादा परेशानी वर्षा के मौसम में होती है। ढाई किलो मीटर सड़क में कीचड़ व गड्डें हो जाते हैं। कीचड़ के चलते मोटर साइकिल चलना तो दूर की बात है,पैदल चलना मुश्किल रहती है। मजबूरी में लोग आवागमन करते हैं। नगर पंचायत में विकास कार्य करने के लिए लाखों स्र्पए खर्च होते हैं,लेकिन अध्यक्ष व सीएमओ द्वारा वार्ड 10 डडहा के विकास के लिए ध्यान नहीं दिया गया। अफसर और जनप्रतिनिधियों की लापरवाही के चलते रहवासी आक्रोशित हैं।
साथ ही विरोध प्रदर्शन करने के लिए तैयारी कर रहे हैं। रहवासी यामु लोनिया का कहना है कि जर्जर सड़क से गुजारा करते हुए कई पीढ़ी गुजर गई,लेकिन सड़क नहीं बन सकी है। जिससे यहां के लोग मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। नगर पंचायत में शामिल होने के बाद भी एक सड़क नहीं बनना दुर्भाग्य की बात है। हमारे पूर्वज सड़क की मांग करते हुए इस दुनिया से चल बसे,लेकिन अधिकारियों को कान में जू तक नहीं रेंगा।
पुलिस तक नहीं आती वार्ड में
नगर पंचायत बोदरी के वार्ड डडहा खेतों के बीच में बसा है। शासन-प्रशासन के उदासीनता के चलते वार्ड तक आने जाने के लिए पहुंच मार्ग नहीं बना है। इस बीच मोहल्ले में कोई समस्या या अपराधिक घटना होती है,तब पुलिस से मदद मांगते हैं। लेकिन सड़क के अभाव में पुलिसकर्मी भी हाथ खड़ा कर देते हैं। उल्टा यहां के लोगों को खुद चकरभाठा थाना आने के लिए बोलते हैं। इसलिए यहां के लोगों को किसी प्रकार की राहत व सुविधा नहीं है।
बोदरी तहसील भी बन गया,पर राहत शून्य
राज्य सरकार ने बोदरी को तहसील का दर्जा दे दिया। ताकि इस क्षेत्र के लोगों का विकास हो सके। राजस्व के कार्य से ज्यादा दूरी तय करना न पड़े। लेकिन तहसील तक जाने के लिए वार्ड डडहा से पहुंच मार्ग ही नहीं है। जिससे पटवारी,तहसीलदार वार्ड नहीं पहुंच पाते हैं। लिहाजा स्थानीय लोग जर्जर सड़क को पार कर तहसील कार्यालय जाते हैं। तहसील बनने के बाद भी नगर पंचायत बोदरी के लोगों को राहत नहीं है।
