मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर : छत्तीसगढ़ में आवारा मवेशियों की परेशानी दिन ब दिन बढ़ती जा रही है. आवारा पशुओं के सड़क पर घूमने को लेकर हाईकोर्ट ने भी सख्ती दिखाई है.इसके बाद भी ग्रामीण इलाकों में आवारा मवेशियों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है.अब छत्तीसगढ़ जैसे कृषि प्रधान राज्य में यदि आवारा मवेशियों के कारण फसल के साथ हादसों में जान की हानि हो तो ये बात चिंतनीय है.ऐसे में राज्य के स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने खड़गवां दौरे में मवेशियों से निजात पाने के लिए नया आइडिया दिया है.इस आइडिया के बाद स्वास्थ्य मंत्री का मानना है कि आने वाले दिनों में सड़क पर घूमने वाले मवेशियों की संख्या में कमी आएगी. आईए जानते हैं आखिर क्या है स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल का कैटल फ्री आइडिया.

स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल ने खड़गवां जनपद पंचायत अंतर्गत रतनपुर में अंजनी जलाशय योजना के नहर विस्तारीकरण और सीसी चैनल निर्माण कार्य का भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों को अपने घरों में गाय बांधने का टिप्स दिया है. श्यामबिहारी जायसवाल ने कहा कि गांव में करीब दो हजार गायें होंगी.इसलिए हर व्यक्ति अपने घरों में गायों को बांधना चाहिए.हर दिन एक आदमी गायों को जुटाकर उन्हें बांध दें.
मैं अपने घर में शुरुआत कर चुका हूं, जाकर देख लीजिए आप लोग भी. मेरी गाय हर रोज 1 किलो दूध देती है.सड़कों पर छोड़ने से अच्छा अपने घरों में गाय बांधे गाय को घर में बांधने से कई फायदे हैं. इससे हमें दूध मिलेगा, हमारे घर के आसपास का वातावरण भी साफ रहेगा. गाय को घर में बांधने से हमें अपने परिवार के लिए भी एक अच्छा उदाहरण मिलेगा
– श्याम बिहारी जायसवाल, स्वास्थ्य मंत्री
ग्रामीणों ने मंत्री की बात को माना और कहा कि हम भी अपने घर में गाय बांधने की कोशिश करेंगे. उन्होंने कहा कि इससे हमारे गांव का विकास होगा और हमारे बच्चों को भी एक अच्छा भविष्य मिलेगा.वाह स्वास्थ्य मंत्री जी क्या टिप्स दिया है आपने. आपके आइडिया को यदि हर ग्रामीण मान ले तो उनका घर तो काफी साफ सुथरा रहेगा. स्वास्थ्य मंत्री ने अपने घर का उदाहरण भी दिया कि उनके घर में एक गा
य बंधी हुई है और वो रोजाना एक किलो दूध देती है. लेकिन मंत्री जी ये बताना भूल गए कि गाय गोबर भी देती है.यदि औसतन एक गाय एक किलो गोबर भी देगी तो उनके ही कहे के मुताबिक गांव में प्रति दिन 2 हजार किलो गोबर इकट्ठा होगा.साथ ही साथ गाय गोबर के साथ मूत्र विसर्जन भी करेंगी. इसलिए 4 हजार लीटर मूत्र गांव की गलियों में बहेगा, या यूं कहें कि हर घर के सामने मूत्र और गोबर का आनंद हर ग्रामीण ले सकता है. इसके बाद जो पालतू मवेशी पहले ही ग्रामीणों के घरों में बंधे हैं उनका तो मूत्र और गोबर इनके साथ मिलकर बच्चों का भविष्य बनाएगा. इसी तरह से यदि पूरे छत्तीसगढ़ के गांवों में गाय बांधने से क्रांति आ गई तो निश्चित तौर पर आवारा मवेशियों से राज्य बच जाएगा और एक किलो दूध से बच्चों का भविष्य तो बन ही रहा है.
